प्यारे बच्चों,
"बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपको "अपनी धरोहर" के अंतर्गत हिंदी के पहले कवि माने जाने वाले अमीर खुसरो से परिचित करायेंगे। तो आनंद उठाईये इस अंक का और अपनी टिप्पणी से हमें बतायें कि यह अंक आपको कैसा लगा।
- साहित्य शिल्पी

अमीर खुसरो का जन्म सन्‌ १२५४ ई० में एटा (उ०प्र०) के पटियाली नामक कस्बे में हुआ था। कवि के साथ-साथ वे सूफी संत भी थे। उन्होंने आठ वर्ष की अवस्था में ही प्रसिद्ध सूफी संत शेख निजामुद्‌दीन औलिया का शिष्यत्व ग्रहण कर लिया था। उनकी मृत्यु शेख औलिया के देहावसान के ६ माह बाद ही हो गई। शेख औलिया के देहावसान पर कहा गया उनका यह दोहा बहुत प्रसिद्ध है--
गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने रैन भई चहुं देश॥
खड़ी बोली हिंदी के पहले कवि होने का श्रेय प्रायः अमीर खुसरो को ही दिया जाता है। उन्होंने मूल रूप से बच्चों के लिए रचनाएं नहीं लिखीं हैं, पर आज भी उनकी पहेलियां, मुकरियां आदि बच्चों की जुबान पर रटी हुई हैं। आइए, हम लोग भी उनकी कुछ रचनाओं का आनंद उठाते हैं--
एक थाल मोती से भरा,
सबके सिर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे ,
मोती उससे एक न गिरे।
(आसमान)

हरा था मन भरा था,
लाख मोती जड़ा था,
राजा जी के बाग में
दुशाला ओढ़े खड़ा था।
(भुट्‌टा)
बाला था तब सब को भाया,
बड़ा हुआ कुछ काम न आया,
खुसरो कह दिया उसका नाम,
अर्थ करो, या छोड़ो ग्राम।
(दिया/दीपक)

सावन भादों बहुत चलत है, माह पूस में थोरी।
अमीर खुसरो यों कहे, तू बूझ पहेली मोरी॥
(मोरी/नाली)

बीसों का सिर काट लिया,
न मारा ना खून किया।
(नाखून)
एक कहानी मैं कहूँ, तू सुन ले मेरे पूत।
बिन परों के उड़ गयी, बाँध गले में सूत॥
(पतंग)
एक नार ने अचरज किया। सांप मार पिंजरे में दिया॥
ज्यों-ज्यों सांप ताल को खाए। सूखे ताल सांप मर जाए॥
(दीपक-बाती)
एक नार दो को ले बैठी,
टेढ़ी होके बिल में पैठी।
जिसके बैठे उसे सुहाय,
खुसरो उसके बल-बल जाए।
(पाजामा)
अरथ जो इसका बूझेगा।
मुख देखो तो सूझेगा॥
(आइना/ दर्पण)

3 comments:

  1. डॉ. मो. अरशद खान नें साहित्य शिल्पी पर जो बीडा उठाया है उसे बडा काम कहा जायेगा। अंतर्जाल पर एसी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों का संग्रहालय बनता जा रहा है। आभार आपका।

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