अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति हर साल कविसम्मेलन का आयोजन करती है इसी श्रृंखला के अंतर्गत इस बार के हास्य कविसम्मेलन का शुभारम्भ पहली अप्रैल को डैलस के आइज्मन सेन्टर में हुआ | उत्तरी अमेरिका में यह संस्था प्रत्येक वर्ष तक़रीबन पंद्रह से सत्रह कार्यक्रम करवाती हैं | सन् १९८० में डॉ. कुँवर चन्द्र प्रकाश सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति की स्थापना की थी तब से ले के आज तक लोग आते गए और कारवां बनता गया अब इस संस्था की मशाल डॉ.नन्दलाल सिंह, डॉ. सुधा ओम ढींगरा और श्री अलोक मिश्रा के हाथों में हैं, जिन्हें इसका आधार स्तंभ कहा जाये तो गलत न होगा | इन्हीं के अथक प्रयास से इस बार भी कवि सम्मेलनों के पंद्रह कार्यक्रम विभिन्न शहरों में संपन्न होंगें।


अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के तत्वाधान में प्रस्तुत हास्य कवि सम्मलेन में भारत के बहुचर्चित हास्य कवि डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. प्रवीण शुक्ल एवं श्री सर्वेश अस्थाना जी ने भाग लिया। श्री जयन्त चौधरी ने सभी का स्वागत करते हुए डैलस संभाग की अध्यक्षा श्रीमती निशि भाटिया जी को मंच पर आमंत्रित किया। निशि जी ने रानी भाटिया को अमेरिका का राष्ट्रिय गान प्रस्तुत करने के लिए मंच पर बुलाया | तत्पश्चात निशि जी ने कार्यक्रम को विधिवत तरीके से आरम्भ कराया। कार्यक्रम का प्रारंभ परम्परागत तरीके से एकल विद्यालयों की शुभचिंतक श्रीमती कल्पना फ्रूटवाला और श्री अशोक मागो ने दीप प्रज्वलित कर तथा श्रीमती अंशु शरन के नेतृत्व में सरस्वती बंदना से हुआ | मंच संचालन के लिए निशिजी ने अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के संयोजक डॉ. नन्दलाल सिंह को आमंत्रित किया। नन्दलालजी की वाक्य पटुता और हास्य मिश्रित कथन ने लोगों का खूब मनोरंजन किया और मन मोह लिया। डैलस में आयोजित ये २६ वाँ कवि सम्मलेन था । आज के इस फ़िल्मी युग में जहाँ लोग कौन्सर्ट में जाना चाहते हैं जब ८०० से भी ज्यादा लोग कवि सम्मलेन का आनन्द लेते हैं तो मन असीम आनंद से भर जाता है। इसका पूरा श्रेय डॉ.नन्दलाल सिंह, डॉ. सुधा ओम धींगरा और श्री अलोक मिश्रा को जाता है | डैलस में आज से २६ साल पहले इसका प्रारंभ हुआ था ।तब कुछ लोग ही ऐसे कार्यक्रमों में आते थे, पर धीरे धीरे लोग आते गए और कारवाँ बनता गया और आज ये कारवाँ काव्य प्रेमियों के जत्थे में परिवर्तित हो चुका है। नन्दलालजी ने कहा कि ----'' डैलस में दिसम्बर ८५ में पहले कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया था स्वयं सेवकों /सेविकाओं की कार्य निष्ठां से ही हम आज यहाँ तक पहुँचे हैं । आज के कविसम्मेलन की सफलता के लिए स्वयं सेवी श्री अशोक कुमार, श्रीमती ज्योति कुमार, श्री मोती अग्रवाल, श्री अशोक फ्रूटवाला , श्रीमती ज्योति भाटिया ,श्रीमती निशि भाटिया ,श्रीमती परम अग्रवाल ,श्री संजीव अग्रवाल ,श्रीमती नीतू अग्रवाल ,श्री जयन्त चौधरी ,श्रीमती शीला सिंह,श्री प्रमोद जैन ,मीरा जैन ,श्रीमती मंजू बंसल ,श्री के एन सिंह ,श्री उमेश थापड ,श्रीमती नूतन अरोड़ा ,श्री देव प्रकाश,श्रीमती अवन्ती सेठी ,श्री सुभाष सिंघल ,श्रीमती अनंता सिंघल और श्री अखिल कुमार का धन्यवाद करता हूँ | आजके इस कार्यक्रम के प्रचार और प्रसार के लिए मै फन एशिया के जौन हामिद ,शबनम मोदगिल ,श्री ओमकार मोदगिल और जैक गोदवानी का आभारी हूँ।"। नन्दलालजी ने कवियों का सारगर्भित परिचय के साथ मंच पर आमंत्रित किया। पुष्प गुच्छ भेंट कर डॉ बिष्णु सक्सेना का स्वागत श्रीमती परम अग्रवाल ने, श्री सर्वेश अस्थाना का श्रीमती रश्मि भाटिया ने और डॉ प्रवीन शुक्ल जी का श्रीमती नीतू अग्रवाल ने किया। मंच पर कवियों के आते ही पूरा हॉल करतल ध्वनि से गूँज उठा।

कवि सम्मलेन का संचालन डॉ. प्रवीण शुक्ल जी ने किया| उन्होंने लालू जी बाई पास से क्यों नहीं जाते ये कह कर बताया ----संजय मरे आकाश में -इंदिरा जी घर के पास में ---राजीव जी मद्रास में ---मुझे ले जा के मरोगे बाईपास में | इसी तरह की कुछ बहुत ही मज़ेदार बातों के साथ प्रवीण जी ने श्री सर्वेश अस्थाना जी को मंच पर आमंत्रित किया |

सर्वेश अस्थाना जी ने इन पंक्तियों के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ किया --

क्या बताऊँ इस धरती पर कैसा लगता है
इस मिटटी का ज़र्रा -ज़र्रा अपना लगता है 
मंदिर मज्जिद ,गिरजा द्वारे चाहे जैसे हो 
जहाँ लोग अच्छे होते हैं अच्छा लगता है

पुलिस पर सुनाया गया व्यंग्य श्रोताओं को को बहुत पसंद आया ....

आतंकवादी किसे कहते है?
वो बोले हत्या कर दो
पकड़े गए तो अपराधी
नहीं तो आतंकवादी

सर्वेश अस्थाना जी ने शादी पर जो हास्य व्यंग्य सुनाया तो जहाँ होठों पर मुस्कुराहट थी वहीँ आँखों में नमी भी थी - 

उसने कहा पढ़ी- लिखी जवान बेटी का गरीब बाप हूँ
इस गरीब बेटी के बाप को निराश न कीजियेगा
भले साल दो साल के लिए ही सही 
एक निर्धन बेटी को सुहाग तो मिल जायेगा
मेरी समझदार बेटी 
आप का पूरा किराया अदा कर जाएगी
आप का इशारा पाते ही स्टोव से जल के मर जाएगी

इसके बाद मंच पर आये डॉ विष्णु सक्सेना जी | उन्होंने गीत प्रस्तुत किये | उनकी मोहक आवाज़ ने सभी को मत्रमुग्ध कर दिया | उनके गीत, कार्यक्रम के अंत में सभी की जुबान पर थे......

बरसात भी नहीं पर बदल गरज रहे हैं
सुलझी हुई हैं झुल्फें और हम उलझ रहे हैं
मदमस्त एक भौरा क्या चाहता कली से
तुम भी समझ रहे हो हम भी समझ रहें है

......................

रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा
एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं
तुमने पत्त्थर सा दिल हमको कह तो दिया
पत्थरों पे लिखोगे मिटेगा नहीं
............................
गीतों की गुनगुनाहट को विराम दे कर सर्वेश अस्थाना जी, डॉ. प्रवीण शुक्ल को मंच पर आमंत्रित किया इनकी कविताओं ने लोगों को खूब हँसाया |

फोटोग्राफर ने आँख मींच के कहा कि 
जिसे खींचता हूँ वो पोज लगती हो तुम
खाट पे पड़े मरीज़ ने कहा कि 
 जीवन बचने वाला डोज़ लगती हो तुम
.............................

गाड़ियों और नेताओं की तुलना जिस व्यंगात्मक तरीके से की गई वह सभी के मन को खूब भायी |

कार्यक्रम दो चरणों में चला दूसरे चरण में पुनः कवियों के हास्य व्यंग्य ने खूब समां बांधा ,अंत में डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. प्रवीण शुक्ल एवं श्री सर्वेश अस्थाना जी ने मिल के एक गीत प्रस्तुत किया | इसके बाद भारतीय राष्ट्रिय गान से कार्यक्रम समाप्त हुआ |

अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समीति ने हिन्दी का एक बीज रोपा था आज वही बीज एक विशाल पेड़ के रूप में मजबूती से खड़ा है | इस का भान इसी बात से हो रहा था कि ८०० से भी अधिक लोग इस हास्य कवि सम्मेलन का आनंद लेने के लिए यहाँ एकत्रित थे । लगातार तीन घंटा तीस मिनट चले इस कवि सम्मलेन में हँसते- हँसते लोगों के पेट में बल पड़ गए। विदेशों के व्यस्त जीवन में हम हँसना भूल ही जाते हैं इस तरह के आयोजन हमें जीने की नई ऊर्जा देते हैं । कुछ लोगों के अनुसार तो वो आज जितना हँसें हैं, उतना जीवन में शायद ही कभी हँसे हों। ह्यूस्टन का कार्यक्रम भी बहुत सफल रहा ।। इन कवि सम्मेलनों में हिन्दी भाषी जब एक छत तले इकट्टे होते हैं तो लगता है आज भी अपनी मातृ- भाषा, अपनी मिटटी से कितना प्यार है | ऐसे आयोजन विदेशों में भी भारत को महकाए रहते हैं | कार्यक्रम समाप्ति पर जब लोग जा रहे थे तो डॉ विष्णु सक्सेना जी के गीत उनकी जुबान पर थे 

"दिल की ज़मीं पर जब फ़सल यादों की बोओगे " 
''रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा ............''

4 comments:

  1. अच्छा लगा रपट पढ़ कर...हम भी तीनों का इन्तजार २९ अप्रेल को टोरंटो में कर रहे हैं.

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  2. ji aap ko kavi sammelan me ja kr achchha lagega
    saader
    rachana

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  3. कविताओं के साथ पूरी रिपोर्ट ..आहा,,,,
    बहुत अच्छा लगा रचना जी ! इसके लियें आपका आभार ...

    उत्तर देंहटाएं

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