मैं और मेरा प्यारा देश भारत
शहीदों के खून से घडी इबारत
पर शायद अब ये कोई बड़ी बात नहीं
आज़ादी भी अब रही सौगात नहीं ,
दोगली आज इसी भारत की तस्वीर लग रही है
जो स्वतंत्रता भी हमको जंजीर लग रही है |
प्रश्न है कि इस तस्वीर पे मरूं के न मरूं ?
आज अपने भारत पे फ़क्र करूँ के न करूँ ?

भारतीयता की मोहर बस रिकार्ड में बची है
आपके लेसंस या वोटर कार्ड में बची है !
भारतीय ही महंगाई और भूख से लड़ रहे है
बड़ी मुश्किल से उगे अनाज यहाँ सड़ रहे हैं !
शादियाँ टूट रही हैं ,रिश्ते अब कट जाते हैं
फैशन में आजकल परिवार बँट जाते है !
धीमे -धीमे रेंगते कानून सरकारी हैं
उस पे भारतियों को बहुत धैर्य की बीमारी है !

दोगलेपन के और बहुतेरे उदाहरण बाकी रहते है
जिसे दैनिक जीवन में हम सभी रोज़ सहते हैं |
देशभक्ति का प्रश्न लोग चुपके से दबा देते है
या ब्रेकिंग न्यूज़ में ही अपनी जुबां देते है |

5 comments:

  1. दोगलेपन के और बहुतेरे उदाहरण बाकी रहते है
    जिसे दैनिक जीवन में हम सभी रोज़ सहते हैं |
    देशभक्ति का प्रश्न लोग चुपके से दबा देते है
    या ब्रेकिंग न्यूज़ में ही अपनी जुबां देते है |

    Waah...!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. धीमे -धीमे रेंगते कानून सरकारी हैं
    उस पे भारतियों को बहुत धैर्य की बीमारी है !
    सरोकारों को उठाती अच्छी कविता है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. l.k astrologer
    shadian toot rahi hain,rishtey kut rahe hain
    faishon mein aakar pariwar bant rahe hain

    waah.....kya khoob likha hai ,congratulations

    उत्तर देंहटाएं

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