आपने प्रजातंत्र के विषय में जार्ज अब्राहम लिंकन की प्रसिद्ध परिभाषा तो पढ़ी ही होगी:-”Democracy is a Government of the people by the people and for the people”यानी प्रजातंत्र जनता की जनता के द्वारा और जनता के लिए सरकार है। आइए:भारत के प्ररिप्रेक्ष्य में इसका परीक्षण करते है।

चुना हुआ सदन-लोकसभा निर्वाचित प्रति 545 आइए इन चुने हुए प्रतिनिधियों पर नियंत्रण की बात करें। दी प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियां काग्रेस एवं बी0जे0पी0।ज्यादा तकनीकी बातों पर गौर करने के बजाय तथ्यों पर ध्यान देती काग्रेस के लगभग 200 सदस्यों का नियत्रण सोनिया जी अथवा राहुल जी के हाथ में है। बी0जे0पी0 के 100 सदस्यों का रिमोट आर0एस0एस0 प्रमुख श्री मोहन भागवत,आडवाणी जी एवं नितिन गड़करी जी के सम्मिलित हाथों में। कुल सदस्य संख्या हुई लगभग 320 शेंष बचे 545-320=225। आइए इनकी स्थिति देखें। उ0प्र0 कुल सदस्य 80। मुख्य क्षेत्रीय नेता मुलायम सिंह 25-30 सदस्य माया 30 अजीत सिंह 4 लगभग 60 सदस्य। बिहार नीतीश, शरद 30,लालू 4 रामविलास पासवान0। महाराष्ट्र-शिवसेना। बाला साहेब ठाकरें-10 शरद पवार-10। दक्षिण में तमिलनाडु कुल 29 अधिकतर पर जयललिता बनाम करूणानिधि। केरलू-कम्यूनिस्टों की बंगाल के साथ बात करेगें। कर्नाटक-देवगौडा-5 सद0। आंध्रा- चन्द्रशेखरन-9सं0। बंगाल ममता बनाम कम्युनिस्ट। कम्युनिस्टो का नियंत्रण पोलित ब्यूरों बनाम प्रकाश करात के हाथ में रहता है जो प्राय: बंगाल सहित 45-50 के लगभग सीट पर अधिकार जमा लेते है। उत्तरपूर्व में उडीसा नवीन पटनायक-25 असोम- प्रफुल्ल एवं फूकन-10 शेष को नगण्य मान लें। अब सीटों की संख्या को महत्व न देते हुए उन प्रमुख राजनीतिज्ञों की सूची बना लें जो देश की राजनीति को नियंत्रित करते है:-

1. सोनिया एवं राहुल =2
2- श्री भागवत,आडवाणी,गड़करी=3
3- प्रकाश करात
4- ममता बनर्जी
5- जयललिता
6- करूणानिधि
7- देवगौड़ा
8- चन्द्रशेखरन
9- डा0 चन्द्र बाबू नायडू
10- नीतीश-शरद-लालू-रामविलास=4
11- माया-मुलायम-अजीत=3
12- बाला साहब ठाकरे-शरद पवार
13- 13 नवीन पटनायक
14- प्रफुल्ल मोहन्तों एवं भृगु कुमार फूकन-2
15- फारूख अब्दुल्ला/उमर/और महबूबा मुफ्ती-3

बस यही राजनेता सम्पूर्ण देश के पक्ष-विपक्ष की राजनीति को सम्भालते है। इसमें भी राष्ट्रीय राजनीति के वी0जे0पी0 काग्रेस एवं कम्युनिस्टों के अलावा बामुशिकल 5 या 6 लोग ही महत्वपूर्ण स्थिति में रहते है।ऐसे में जब आकाओं के रवैयें पर अथवा जनप्रतिनिधि कहलाने वाले इनके सिपहसालार जन की नहीं आका के पक्ष में भुजाएं तानते-चीखते चिल्लाते नजर आते है। यही आपने अन्ना हजारे के साथ देखा,बाबा रामदेव के साथ देखा, पी0ए0सी0 की रिपोर्ट। मुरली मनोहर जोशी के साथ देखा और भरोसा रखें आगे भी यही देखेगें। इनका साथ देते है मीडिया चैनल/मीडिया ग्रुप जिनमें से काफी तो इन्ही नेताओं के ही है। जिस पर कभी आगे बात करूंगा। मामले की बानगी देखिये। प्रशान्त भूषण शान्ति भूषण पर मुकदमा दर्ज कीजिए कानूनी कार्यवाही करिये लेकिन किसी ने नही कहा कि कानून अपना काम करेगा। बस मीडिया ट्रायल के करिये बदनाम करों और अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को ढेर सारा शोर करके दवा दो शायद भारत के पहले राजनीतिज्ञ रहे होगें जिन्होने इस तरकीब का प्रयोग किया था'' अश्वस्थामा हतो नरो वा कुंजरों '' और बीच में शंख बजा दिया। उन्होने धर्म के लिए किया और ये रोज अधर्म के लिए करते हैं भारतीय संविधान के पिता। डा0 भीमराव बाबा साहेब आप कहॉ हो। यदि शोर गुल करके बहुमत का भीडतंत्र बनाकर ही देश चलाना था तो आपको क्या आवश्यकता थी संविधान में ''अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मूलाधिकार रखने की। यदि हर मूल अधिकार और जनतांत्रिक उददेश्य को यों ही राजसत्ता के द्वारा दबाया जाता रहा तो कब तक कायम रहेगा आपका संवैधानिक जन प्रतिनिधित्मक प्रजांतत्र। बाबा साहब आप ही जानों ....... 

आशुतोष सिटी बरेली (उ. प्र.)

3 comments:

  1. Good mathamatics. Politics in india is just number game.

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  2. बहुत सटीक विश्लेषण आज के राजनैतिक परिदृश्य का। सुन्दर।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

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