मैं लड़की हूँ तो क्या हुआ…..?
मुझे जन्म देकर एक माँ ने क्या गुनाह किया…..?
मेरे पैदा होते ही क्या तुम मुझे मार डालोगे…..?
क्या मेरे आने की खुशियाँ नहीं मनाओगे…..?

मैं लड़की हूँ तो क्या हुआ……?
क्यों तुमने मुझको बोझ समझ लिया…..?
मेरे जीने का हक़ भी क्यों छीन लिया….?
क्या मेरा किसी चीज पर अधिकार नहीं…..?
मैं भी दुनिया देखूँ, क्यों तुम्हें ये स्वीकार नहीं….?

मैं लड़की हूँ तो क्या हुआ……?
क्या मुझको पढ़-लिखकर आगे बढ़ने नहीं दोगे…..?
घर के काम-काज ही तो करने हैं मुझे,
क्या यही सोचकर अनपढ़ रहने दोगे……?

मैं लड़की हूँ तो क्या हुआ…..?
क्या मुझे डरा-धमका कर रखोगे…..?
हर बात के लिए मेरे ऊपर ताने कसोगे…..?

मैं लड़की हूँ तो क्या हुआ…..?
क्या मेरी इच्छाओं का गला घोंट दोगे…..?
मेरे हर सपने को चूर-चूर कर दोगे….?
लड़का ही तुम्हारा सहारा है, ये सोचकर,
क्या सारे हक़ उसको ही दोगे…..?

मैं लड़की हूँ तो क्या हुआ…..?
क्या तुम मुझको दुःख-दर्द दोगे, सताओगे…..?
मैं खुश रहूँ, मेरा भविष्य भी उज्जवल हो……?
क्या ये सपने नहीं सजाओगे…..?

मैं लड़की हूँ तो क्या हुआ……?
मैं ही घर की लक्ष्मी हूँ……।
तुम्हारा सहारा हूँ, सम्मान हूँ……।।
मैं ही तो इस संसार की शान हूँ……।।।

मुझ पर अत्याचार करके कुछ न पाओगे.....।
थक जाओगे, हार जाओगे…….।।
स्वर्ग तो दूर नरक में भी जगह न पाओगे…….।।।

4 comments:

  1. दूसरा पहलू भी होता है.

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  2. टी०वी० पर एक तरफ दिखलाया जाता है महिलाओं का शोषण
    तो दूसरी ओर दिखलाया जाता है महिला मुक्ति का आन्दोलन
    और महिला मुक्ति आन्दोलन का समाज पे इतना प्रभाव है
    कि जन्म से पहले ही"मुक्ति" का प्रस्ताव है।
    सादर
    श्यामल सुमन
    www.manoramsuman.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. राहुल सर दूसरा पहलू क्या है वो भी बताएं...............बबीता नेगी

    उत्तर देंहटाएं

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