साख को अपनी कभी नीचा नहीं करते
दोस्त , अपने आपको सस्ता नहीं करते

इल्म है हर चीज़ का माना तुम्हे लेकिन
इल्म वाले इल्म का दावा नहीं करते

बेखबर हो इस कदर अपनी उदासी से
लगता है , तुम आइना देखा नहीं करते

सबको ही नीचा दिखाना आपका हर रोज़
आप जो ये करते हैं अच्छा नहीं लगता

कोसना ही है तो अपने बच्चों को कोसो
औरों के बच्चों को ही कोसा नहीं करते

सोचने की बात को सोचो हज़ारों बार
बेतुकी हर बात को सोचा नहीं करते

माना , हमने " प्राण " दुख देते हैं बहुतेरे
झंझटों से जग के दिल छोटा नहीं करते

20 comments:

  1. बहुत दिनों बाद प्राण जी साहित्य शिल्पी पर नज़र आये। बहुत अच्छी ग़ज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेखबर हो इस कदर अपनी उदासी से
    लगता है , तुम आइना देखा नहीं करतेकोसना ही है तो अपने बच्चों को कोसो
    औरों के बच्चों को ही कोसा नहीं करते
    सोचने की बात को सोचो हज़ारों बार
    बेतुकी हर बात को सोचा नहीं करते

    माना , हमने " प्राण " दुख देते हैं बहुतेरे
    झंझटों से जग के दिल छोटा नहीं करते

    हर शेर ज़िन्दगी की सच्चाइयों से रु-ब-रु करवा रहा है॥………गज़ब की गज़ल है…………आभार पढवाने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  3. उम्दा ग़ज़ल, लेकिन प्राण जी के मूल रुतबे से कमतर।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेखबर हो इस कदर अपनी उदासी से
    लगता है , तुम आइना देखा नहीं करते

    बहुत उम्दा शेर।

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह .. प्राण साहब का हर शेर इस ग़ज़ल में सामाजिक सीख देता हुवा है ... गहरा दर्शन है हर शेर में ... कोसना ही है ... या सोचने की बात को .... कितनी गहरी बात कह गये हैं सीधे शब्दों में .... बहुत ही लाजवाब ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत उम्दा...
    आद. प्राण साहब, हर शेर में पैग़ाम दिया है.

    उत्तर देंहटाएं
  7. सोचने की बात को सोचो हज़ारों बार
    बेतुकी हर बात को सोचा नहीं करते

    प्राण साहब की ग़ज़ल हो और उसमें से जीवन जीने के नए आयाम न मिलें ऐसा हो ही नहीं सकता...हर ग़ज़ल हमें प्रेरणा देती है...सुखी रहने का रास्ता दिखलाती है...मानवीय बुराइयों पर से पर्दा हटाती है...ये ग़ज़ल भी उनकी खूबसूरत ग़ज़लों की श्रृंखला का ही एक हिस्सा है...इश्वर उन्हें हमेशा स्वस्थ रखे

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  8. सबको ही नीचा दिखाना आपका हर रोज़
    आप जो ये करते हैं अच्छा नहीं लगता

    ये शेर इस ग़ज़ल का हिस्सा नहीं है या फिर इसे ठीक से छापा नहीं गया है...अतः ये शेर इस ग़ज़ल में खटकता है इसलिए या तो इसे हटा दें अथवा प्राण साहब से पूछ कर इसे सुधारें.
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  9. Neeraj Goswami sahee kahte hain . kripya is
    sher ko yun padhiye -

    SAB KO HEE NEECHA DIKHAANAA AAPKAA HAR ROZ
    AAP JO YE KARTE HAIN ACHCHHA NAHIN KARTE

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत बेहतरीन...

    नीरज जी न इंगित किया और हमने आपके द्वारा सुधारा वर्जन पढ़कर आनन्द लिया...बहुत सुन्दर!!!

    उत्तर देंहटाएं
  11. Pran sharma ji,
    har sher bahut umdaa, ye ek sher bahut khaas laga...
    कोसना ही है तो अपने बच्चों को कोसो
    औरों के बच्चों को ही कोसा नहीं करते

    nimn sher mein shayad typing mistake hua hai. 'karte' ki jagah 'lagta' likh gaya hai...
    सबको ही नीचा दिखाना आपका हर रोज़
    आप जो ये करते हैं अच्छा नहीं लगता

    daad sweekaaren.

    उत्तर देंहटाएं
  12. SAB KO HEE NEECHA DIKHAANAA AAPKAA HAR ROZ
    AAP JO YE KARTE HAIN ACHCHHA NAHIN KARTE
    ग़ज़ल को दो तीन बार पढ़ा, लगा कि कुछ खटकता है ..
    सोचा प्राण भाई साहब से पता करूंगी | दो तीन दिन नेट पर नहीं आई |आज नीरज जी की टिप्पणी और प्राण भाई साहब के शे'र से बात समझ में आई और ग़ज़ल का पूरी तरह आन्नद लिया |
    सुधा ओम ढींगरा

    उत्तर देंहटाएं
  13. साख को अपनी कभी नीचा नहीं करते। जी हाँ आदरणीय प्राण साहब ने गजलों की दुनिया में अपनी साख कभी नीचा नहीं की। बहुत ही अच्छी गजल।

    उत्तर देंहटाएं
  14. इल्म है हर चीज़ का माना तुम्हे लेकिन
    इल्म वाले इल्म का दावा नहीं करते

    बेखबर हो इस कदर अपनी उदासी से
    लगता है , तुम आइना देखा नहीं करते
    khubsurat gazal
    bahut aanand aaya
    badhai
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  15. अच्छी गजल पढने को मिली है....बधाई...

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget