ओढने के वास्ते गर रेशमी चादर नहीं
क्या हुआ ए दोस्तो गर मखमली बिस्तर नहीं

रहने को बँगला नहीं , कोठी नहीं तो क्या हुआ
इतना क्या कम है कि मेरे यार हम बेघर नहीं

रास आयेगी बहुत ये इक न इक दिन आपको
ज़िन्दगी है ज़िन्दगी कोई सड़ी गाजर नहीं

पल ही पल में पंख वाले पंछी तो उड़ जायेंगे
वे बिचारे क्या उड़ें जिन पंछियों के पर नहीं

यूँ तो इंसानों में रिश्ते हैं सभी सुन्दर बड़े
कोई रिश्ता माँ के रिश्ते से मगर बढ़ कर नहीं

"जी" भी कहना छोड़ दे उनको सभी के सामने
गर बुजुर्गों के लिए मन में तेरे आदर नहीं

बाँध कर सर पर कफ़न घर से चला था `प्राण` तू
चंद ईंटे रास्ते में देख कर अब डर नहीं
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11 comments:

  1. प्राण जी को जन्मदिन की शुभकामनायें।

    "जी" भी कहना छोड़ दे उनको सभी के सामने
    गर बुजुर्गों के लिए मन में तेरे आदर नहीं

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  2. जन्मदिन की शुभकामना। ये शिकायत भी है कि इन दिनों आप साहित्य शिल्पी पर कम नजर आ रहे हैं। हर शेर इस ग़ज़ल का बहुत अच्छा है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. आपको जन्मदिन की ढेर सारी शुभ कामनाएँ...आप स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें...और हमें अपनी खूबसूरत गज़ल पढवाते रहें..



    पल ही पल में पंख वाले पंछी तो उड़ जायेंगे
    वे बिचारे क्या उड़ें जिन पंछियों के पर नहीं

    उत्तर देंहटाएं
  5. आप को जनमदिन मुबारक। इस सुन्दर ग़ज़ल के लिये आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्राण जी को जन्मदिन की शुभकामनायें।वह बहुत अच्छी रचना है !मेरे ब्लॉग पर अपना सहयोग दे !
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  7. janmdin ki bahut bahutu shubhkamnayen

    sunder gazal ke dhnyavad aur abhar
    saader
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
  8. प्राण जी को जनम दिन की बहुत बहुत बधाई ... बहुत लाजवाब गज़ल और कमाल के शेर ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. Waah bahut Achchi gazal hai Pran sharma ji.. "जी" भी कहना छोड़ दे उनको सभी के सामने
    गर बुजुर्गों के लिए मन में तेरे आदर नहीं
    bahut khoob sher hain sare hi

    aapko janamdin par hardik shubhkamnaayen.. Deri se aane ke liye muaafi chahti hun..

    उत्तर देंहटाएं
  10. "यूँ तो इंसानों में रिश्ते हैं सभी सुन्दर बड़े
    कोई रिश्ता माँ के रिश्ते से मगर बढ़ कर नहीं"

    इस पंक्ति ने अभिभूत कर दिया. बहुत बहुत बधाई.

    वाचस्पति पाण्डेय

    उत्तर देंहटाएं

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