एक रुपये में से दस पैसे ही मिल पाते
पता करो बाकी नब्बे किसके घर जाते|

नहीं हमारी खुद की क्या ये नाकामी है
बिना डरे ही लोग करोड़ों यूं खा जाते|

चोर लुटेरे नेता तस्कर सब पर भारी
पता नहीं उनका हम क्यों कुछ न कर पाते|

बात बात में हम शासन सत्ता पर निर्भर
क्यों न हम खुद उचित दंड उनको दे पाते|

बहिष्कार कर घर,समाज,सारे कुनबे से
क्यों न करनी का उनको अहसास कराते|

छोटी मोटी धमकी घुड़की से क्या होगा
इन पर फतवा क्यों न हम जारी करवाते|

हम बैठे चुपचाप हाथ पर धरे हाथ हैं
इस कारण से वे हमको हर तरह सताते|
रचनाकार परिचय:-


नाम- प्रभुदयाल श्रीवास्तव
जन्म- 4 अगस्त 1944 धरमपुरा दमोह {म.प्र.]
शिक्षा- वैद्युत यांत्रिकी में पत्रोपाधि


लेखन- विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन


कृतियां - दूसरी लाइन [व्यंग्य संग्रह]शैवाल प्रकाशन गोरखपुर से प्रकाशित, बचपन गीत सुनाता चल[बाल गीत संग्रह]बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र भोपाल से प्रकाशित, बचपन छलके छल छल छल[बाल गीत संग्रह]बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र भोपाल से प्रकाशित


सम्मान - राष्ट्रीय राज भाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा "भारती रत्न "एवं "भारती भूषण सम्मान", श्रीमती सरस्वती सिंह स्मृति सम्मान वैदिक क्रांति देहरादून एवं हम सब साथ साथ पत्रिका दिल्ली, द्वारा "लाइफ एचीवमेंट एवार्ड", भारतीय राष्ट्र भाषा सम्मेलन झाँसी द्वारा" हिंदी सेवी सम्मान", शिव संकल्प साहित्य परिषद नर्मदापुरम होशंगाबाद द्वारा"व्यंग्य वैभव सम्मान", युग साहित्य मानस गुन्तकुल आंध्रप्रदेश द्वारा काव्य सम्मान।

2 comments:

  1. एक रुपये में से दस पैसे ही मिल पाते
    पता करो बाकी नब्बे किसके घर जाते Sabko malum hai ki kahan jate hain Poonam bhalavi

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिनके घर जाते हैं उनके चेहरे अब सब जानने लगे हैं।

    उत्तर देंहटाएं

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