याद की बज़्म सजी दिल में सितारों की तरह
फिर से महसूस ख़लिश दिल ने की ख़ारो की तरह

दूर वो हो गया अब हम से दरारों की तरह
उससे मुश्किल है मुलाकात किनारों की तरह

बेरुख़ी उसकी है, गोया कोई पतझड़ की हवा
मेरे अरमान हैं अब उड़ते गुब्बारों की तरह

आइना सामने था और मुक़ाबिल मैं थी
अक्स था जैसे बियाबानों के नज़ारों की तरह

कितना नटखट है मुक़द्दर ये , है कितना चंचल
खेलता आँख मिचौली है वो तारों की तरह

जाने क्या बात है क्यों रूठ गया है मौसम
साथ हंसता था मेरे वो भी बहारों की तरह
==========


8 comments:

  1. नागरानी जी की हमेशा की तरह एक और सुन्दर ग़ज़ल -

    जाने क्या बात है क्यों रूठ गया है मौसम
    साथ हंसता था मेरे वो भी बहारों की तरह

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  2. जाने क्या बात है क्यों रूठ गया है मौसम
    साथ हंसता था मेरे वो भी बहारों की तरह
    akharee pangatee dil ko chhu lene valee hai...

    उत्तर देंहटाएं
  3. दूर वो हो गया अब हम से दरारों की तरह
    उससे मुश्किल है मुलाकात किनारों की तरह

    मन को छू गयी बात।

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  4. नागरानी जी
    अच्छी गज़ल के लिये बधाई
    प्रभुदयाल श्रीवास्तव‌

    उत्तर देंहटाएं
  5. door ab ho gaya vo hamase dararon ki tarah
    us se mushkil hai mulakat kinaron ki tarah.
    ek achchhi ghazal ka bahut achchha sher. bahut bahut badhai ho Devi Nagrani ji

    उत्तर देंहटाएं

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