प्यारे बच्चों,
"बाल-शिल्पी" पर आज आपके डॉ. मो. अरशद खान अंकल आपको "फुलवारी" के अंतर्गत शिवचरण चौहान अंकल की कविता "मेरे साथी रोबो प्यारे" पढवा रहे हैं। तो आनंद उठाईये इस अंक का और अपनी टिप्पणी से हमें बतायें कि यह अंक आपको कैसा लगा।

- साहित्य शिल्पी
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मेरे साथी रोबो प्यारे

थका बहुत हूं आज काम से,
करवा लो कुछ काम हमारे,
मेरे साथी रोबो प्यारे।

बस्ते से कापियां निकालो,
प्रश्न गणित के हल कर डालो,
फिर आकर बैठो कुर्सी पर,
पियो संग में चाय हमारे।
मेरे साथी रोबो प्यारे।

मेरे संग में कैरम खेलो,
मां जी के संग पूड़ी बेलो,
मेरे लिए समोसे तलकर,
लाओ गरमा गरम करारे।
मेरे साथी रोबो प्यारे।

शाम हुर्इ छत पर आ जाओ।
आसमान पर नजर टिकाओ,
मुझे जगाना तब, जब गिन लो
आसमान में कितने तारे।
मेरे साथी रोबो प्यारे।

शिवचरण चौहान, कानपुर (उ0प्र0)

2 comments:

  1. शाम हुर्इ छत पर आ जाओ।
    आसमान पर नजर टिकाओ,
    मुझे जगाना तब, जब गिन लो
    आसमान में कितने तारे।
    मेरे साथी रोबो प्यारे।

    सुन्दर है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह बहुत मजेदार और नवीनता लिये हुए

    उत्तर देंहटाएं

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