Photobucket


बात कहने की धुन गीत लिखने की धुन,
जिन्दगी है खुशी गम को सहने की धुन।
है कहाँ वश में कुछ हौसला के सिवा,
बन पतंगा मुहब्बत में जलने की धुन।।

रास्ते में पहाड़ी है दरिया कभी,
सामना जिन्दगी में तो करते सभी।
ये समन्दर की लहरें सिखाती हैं क्या,
जूझकर के सदा दिल में बढ़ने की धुन।।

भले फिसलन सही जो पिछड़ता नहीं,
ठंढ़ भीषण भी हो तो सिकुड़ता नहीं।
एक इन्सान सच्चा कहें हम किसे,
जिन्दगी में हो चढ़ने उतरने की धुन।।

जब कि कुदरत ने सबको है सींचा यहाँ,
कौन ऊँचा यहाँ कौन नीचा यहाँ।
कैसे आँगन में दीवारें तन के खड़ी,
दूरियों से हमेशा निबटने की धुन।।

लोग अपने सभी हो न दिल में जलन,
राह ऐसे चले जो उसी को नमन।
वो सुमन तो हमेशा ही बेचैन है,
जिसे बेहतर फिजा में है सजने की धुन।।

1 comments:

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget