‘ मुझे बड़ी हमदर्दी है सर कि आज आपकी कुटाई हो गई, मैं इसकी कड़े शब्दों में निन्दा करता हूँ’ हमने कहा।

‘ निन्दा फिन्दा छोड़ो यार, निन्दाऐं तो अब तक दो ढाई लाख इकट्ठी हो लीं, चाय पीयोगे?’ वे बोले

‘ मॅगा लीजिये, कहीं चोट वोट? कोई टूट फूट?’

‘ वो तो उसके ही ज्यादा आई हैं’

‘ अच्छा किया, बधाई’

‘ हमने कुछ नहीं किया यार, हमारे अन्ना जी कहते हैं हम अहिंसक हैं, चाहो तो रेफरेन्डम करा लो’

‘ नहीं रहने दीजिये लेकिन सिर्फ वही कहते हैं? और आप?’

‘ छोड़ो, हम अहिंसा पर कोई बयान नहीं देते, हॉ टीम के संविधान के लिहाज से हम ऑन स्क्रीन तो अहिंसक ही हैं’ वे मुस्कराये।

‘ तभी उसे कूटते वक्त आपका चेहरा नहीं दिखा, कॉलर तो पकड़े थे आप’

‘ वो तो कुटते में भी दो चार लातें मार ही ली थीं, पर लड़के जवान थे भाई, बिना पूर्व सूचना के पिल पड़े थे लेकिन बदला तो वकील साथियों ने ले ही लिया, चाहो तो रेफरेन्डम करा लो’

‘ लेकिन बापू तो दूसरा गाल...?’

‘ बापू से अन्ना तक अहिन्सा में भी कुछ तो रिफॉर्म आना है भाई, चाहो तो रेफरेन्डम करा लो’

‘ छोड़िये वैसे आप किस विषय पर बयान देते हैं?’

‘ जिन विषयों में कन्टोवर्सी भरपूर हो’

‘ जैसे?’

‘ जैसे कष्मीर, नक्सलवाद, बोडोलैन्ड वगैरा’

‘ लेकिन आपके बयान हमेषा बहुमत से अलग क्यों होते हैं’

‘ भीड़ का हिस्सा कोई भी महत्वाकॉक्षी नहीं बनना चाहता चाहो तो रेफरेन्डम करा लो’

‘ ये आप बार बार रेफरेन्डम क्यों करा रहे हैं’

‘ क्या बतायें पिछले दिनों इतने रेफरेन्डम कराये हैं, दिल्ली में, अमेठी, रायबरेली, इलाहाबाद, हिसार, अब तो हमारा तकिया कलाम बन गया है, अब बिना रेफरेन्डम के कोई डिसीजन नहीं ले पाते हम, कल तुम्हारी भाभी ने पूछा खिचड़ी खाओगे कि कचौड़ी?
तो भी हमने रेफरेन्डम ही बोला था ’

‘ बाप रे फिर?’

‘ फिर क्या, हेकड़ीवाल के साथ चने फॉक कर मटके का पानी पीना पड़ा’

‘ ओह....अब समझा कष्मीर मुद्दे पर भी इसी तरह मुँह से निकला था, भाई लोग जबरन कुटाई कर गये ’

‘ नहीं दरअसल वो तो अपना ऑथेन्टिक बयान था, ये आप बार बार कुटाई कुटाई क्यों डकरा रहे हैं, कुटा वही ज्यादा है’

‘ अरे ...? लेकिन मैं कष्मीर पर आपके बयान का विरोध करता हूँ’

‘ रूको जरा ..’ उन्होंने हैल्मेट उठाया

‘ ये हैल्मेट..?’

‘ मुझसे जवान हो, तंदुरूस्त हो, विरोध करने वाले हो इसलिये..’

‘ नहीं मैं लोकतांत्रिक विरोध करूँगा’

‘ तो करो ना.. स्टार्ट कैमरा...ऐक्षन.... ’

‘ मैं वॉल्टेयर वाले लोकतंत्र की बात..’

‘ अच्छा ठहरो..कैमरा ऑफ...एक्षन...’

दो तीन वकील नुमा लोग मेरी ओर बढ़े

‘ य...ये...आप?’

‘ वॉल्टेयर के बाद लोकतंत्र में भी रिफार्म हो चुके हैं यार, चाहो तो रेफरेन्डम करा लो’

‘ मैं अपने शब्द वापस लेता हूँ’ हम चिल्लाये

‘ ये लोकतंत्र में आखिरी रिफॉर्म है..कट....’ वे हॅसे, वकीलनुमा लोग थमे।

‘ मैं शंका समाधान तो कर...सकता...हूँ?’

‘ शंका लघु ही हो ’ उन्होंने आदेश दिया

‘ जी...आप कष्मीर में आज रेफरेन्डम कैसे करा सकते हैं? रेफरेन्डम सन सैंतालीस में तो एक हल हो सकता था, उसके बाद आधा कष्मीर तो पाकिस्तान के पास है, भारत वाले हिस्से में से एक समुदाय विषेष के कितने कष्मीरियों ने पलायन सैंतालीस से अब तक किया इसकी कैलकुलेषन तो आपके पास होगी नहीं, आज कष्मीर में रेफरेन्डम होगा कल महाराष्ट में, तमिलनाडु ने तो पचास साल पहले ही रेफरेन्डम दे दिया था कि राजभाषा हिन्दी वहॉ नहीं चलेगी, परसों वहॉ भी करा लेना, फिर असम और मणिपुर में भी, फिर एक देश तेलंगाना बना देना, फिर मेरठ, मुजफ्फर नगर, हापुड़ बुलंदषहर को मिलाकर हरित देष बना देना, कायावती दलित देष मॉगेंगी भालू यादव जी अपने विधान सभा क्षेत्र के राष्टपति बनना चाहेंगे करा लो रेफरेन्डम, रेफरेन्डम यदि करेगा तो हर मसले पर पूरा देष करेगा केवल हुर्रियत या शिवसेना नहीं ’ हम उत्तेजित हुए।

‘ अरे ये तो तुम विरोध कर रहे हो’ उन्होंने ऑखें निकालीं, वकीलनुमा लोग हमारी ओर बढ़े।

‘ नहीं नहीं शंका ही है, थोड़ा दीर्घ हो गई थी’ हम चिल्लाये वे रूक गये।

‘ देखो बात तुम्हारी सही है लेकिन इसमें कन्टोवर्सी कहॉ है?’ वे मुस्कराये।

‘ कन्टोवर्सी जीवन में जरूरी है?’

‘ नहीं आम हिन्दुस्तानी की मौत मरना है तो कतई नहीं, लेकिन खास बनना है तो वाकई जरूरी है, अब बताओ हम कब तक अन्ना हमारे के कुर्ते के छोर को पकड़ के मेला देखेंगे? मानते हैं हमारी क्या बाबूजी की भी टी.आर.पी. अभी अन्ना के आस पास नहीं, कल का छोकरा हेकड़ीवाल हमसे आगे निकला जा रहा था, धनीष और कुमार अभिलाष जैसे सैकंड लाइनर हमारी बराबरी पर आ चुके थे, इस कुटाई एपिसोड के बाद हम हेकड़ीवाल तक तो आ गये ’

‘ लेकिन देष...?’

‘ जन लोकपाल देखेगा देश को, हर वक्त हम ही देखेंगे?’

‘ आप इलैक्षन क्यों नहीं लड़ते, कन्टोवर्सी तो आपके पास भी दिलविजय जी जित्ती हैंगी ?’

‘ नो कमेन्ट, देखो अभी भी अन्ना का कुर्ता छूटा नहीं है, इलैक्षन में उनके भाषण के बिना तेरह वोट नहीं मिलने, हॉ चार छै कन्टोवर्सी के बाद कद बढ़ जाय तो व्यक्ति बन कर सोचेंगे’

‘ तब तक ऐसे ही हाड़ कूटते और कुटवाते रहेंगे?’

‘ इसी सोच ने तुम्हें आम बनाया है, देखो इसमें कुटने और कूटने वाले दोनों का लाभ है, इन तीन लड़कों के नाम आज के पहले इनके पड़ोसियों ने नहीं सुने थे, ये राम सेना रावण सेना कौन जानता था इन्हें? अब? अब इनकी दूकान भी चल निकलेगी, भले सभासद न बनें, मुहल्ले में, सरकारी दफतरों में, बड़ी फर्मों से चौथ उगाही तो कर ही सकते हैं, तुम्हारे बचपन की बात रही होगी जब एक विमान अपहरण कर्ता को विधायक का टिकट मिला था, ऐसा ही एकाध काम और कर दें बस...टिकट मिल ही जायेगा, ये रिफार्म्ड लोकतंत्र है’

‘ यानी ये कुटाई हादसा नहीं महोत्सव है’

वे मुस्कराये -‘ चाहो तो रेफरेन्डम करा लो’

5 comments:

  1. छुपाने की क्या आवश्यकता कि यह व्यंग्य प्रशांत भूषण पर किया गया है। चाहे तो रेफ्रेंडम करा लो :)

    शक्ति जी खूब निचोड़ा है तेल। संवेदनशील मुद्दों पर बोलने वालों को अपनी बात के दूरगामी परिणामों [पर विचार करना चाहिये। कश्मीर में अलगाववादी और पाकिस्तान में जरदारी ताली बजा रहे हैं।

    कल को कोई प्रशांत भूषण आ कर कहे कि हमारे भागलपुर में भी रेफ्रेंडम करवा दो। है कि नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. भूषण की कुटाई करने वालों को तो जमानत मिल गयी। अन्ना कहते हैं इस बयान से हमारा कोई लेना देना नहीं। प्रशांत जी को शांत रहने की नसीहत मिली कि नहीं पता नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. वास्तव में बड़ा अच्छा लगा यह व्यंग्य.....चाहो तो रेफरेंडम करवा लो.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाचस्पति पाण्ड़ेय, भूटान16 अक्तूबर 2011 को 10:37 pm

    श्री शक्ति प्रकाश जी का कुटाई महोत्सव आलेख बहुत ही समयोचित लगा.

    सार्वजनिक जीवन में रहने वालों को सोच समझकर सम्वेदनशील मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करनी चाहिए.कश्मीर का मुद्दा हर भारतीय के जनमानस से जुडा हुआ है . अरुंधती राय जैसे छद्म सामाजिक कार्यकर्त्ता के बोलने से लोग ध्यान भी नहीं देते है पर प्रशांत भूषण जैसे सम्मानित लोगों को देश की करोडो लोगो की भावना का ध्यान रखना चाहिए था. हर साल उसी कश्मीर की हिफाजत में हजारो की संख्या में सैनिक शहीद हो जाते है . उन लोगों की भावना की क़द्र की जानी चाहिए. इससे भी बड़ा मुद्दा है जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ लोग अन्ना जी के नेतृत्व में एकजुट दिख रहे है उनकी इस एकता की रक्षा की जाये . ऐसे उल-जुलूल स्वान्तः सुखाय बयानबाज़ी से बचना चाहिए वर्ना दिग्विजय सरीखे भ्रष्ट एवं बेगैरत लोगों को बोलने का मौका मिल जाता है. कांग्रेस जोर शोर से इसी बयान के मद्दे-नज़र भ्रष्टाचार के खिलफ मुहीम को कमजोर करने में जुटी है. जिसको जितना भौकना है भौक रहा है . सभी सरकारी कुत्ते देशहित में भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़े हो गए है. अतः प्रशांत जी को अपना बयान वापस ले लेना चाहिए. आज केवल इसी बयान के चलते कोई उनका साथ नहीं देना चाहता है बरना अन्ना की टीम के किसी सदस्य को कोई छू भी दे तो बवाल हो जाता. इसी जनभावना के डर सरकार के खिलाफ अन्ना की मुहीम को सरकार बर्दाश्त कर गयी बरना सरकार इन लोगों को कटवा चुकी होती .

    वाचस्पति पाण्डेय, भूटान

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