धृतराष्ट्र खुश हुए [व्यंग्य कथा] - डॉ. सुभाष राय

दिल्ली यानि इंद्रप्रस्थ के एक गांव मेंकुछ वर्ष पूर्व दो बच्चों का जन्म हुआ। एक को दिखायी नहीं पड़ता था। उसकी दृष्टिश्वेत-श्याम थी। काले और सफ...

आओ पीएम बनने के लिए दौड़ लगायें [व्यंगय] - अविनाश वाचस्पनति

पी एम को बदल डालने की सुगबुगाहटें तेज हो गई हैं। पहले नेपथ्‍य में तो चल रही थीं परंतु अब सामने हैं। सुगबुगाहट से अधिक यह चिंगारी शोला बन ...

नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी) 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' हेतु चयनित [साहित्य समाचार]- दुर्ग विजय सिंह 'दीप'

प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. तभी तो पाँच वर्षीया नन्हीं ब्लागर अक्षिता (पाखी)  को वर्ष 2011 हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार ( National Chi...

माँ करती  हूँ तुझे मै नमन [कविता]- ज्योति चौहान

माँ करती हूँ ,   तुझे मै नमन तेरी परविरश को   करती हूँ नमन प्यासे को मिलता जैसे पानी , माँ तू है वो जिंदगानी , नो महीनो तक सींचा तूने...

गम-ए-जिन्दगी [कविता]- सुमन मीत

अश्क बनकर बह गए जिन्दगी के अरमां चाहतें अधूरी रह गई इसी दरमियां खाबों का घरौन्दा टूट कर बिखर गया हमसे हमारा साया ही जैसे रूठ गया फूल...

तख्ता पलट दो ससुरों का [कहानी]- राजीव तनेजा

ठक...ठक... ठक्क...ठक्क “लगता है स्साला!...ऐसे नहीं खोलेगा....तोड़ दो दरवाज़ा”… "जी!…जनाब"... थाड़......थाड़...धमाक...धमाक(ज़ोर से द...

सड़क किनारे लाचार बचपन [कविता]- डॉ अमिता कौण्डल

सड़क किनारे लाचार बचपन आँखों में लिए लाखों सवाल घूरता रहा मेरे मुन्ने को जो लिए था हाथ आइस क्रीम और पहने था सुंदर वस्त्र जो पकडे था म...

देवताओं का जागना [व्यंग्य] - डॉ. वेद व्यथित

अच्छे भले देवता लोग सो रहे थे | चारों ओर शांति थी न कहीं शोर न शराबा , न ढोल न नगाड़ा , न बाजा न ढोलक , न हाय न तोबा  न  वाहनों  में भीड़...

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