हट गये पगडंडियों से पाँव
लो, सड़क पर आ गया हर गाँव।

चेतना को गति मिली स्वच्छन्द,
हादसे, देने लगे आनंद
खिल रहे सौन्दर्य बोधी फूल
किंतु वे ढोते नहीं मकरंद।

एकजुटता के प्रदर्शन में
प्रतिष्ठित हर ओर शकुनी-दाँव।

हट गये पगडंडियों से पाँव
लो, सड़क पर आ गया हर गाँव।


आधुनिकता के भुजंग तमाम
बमीठों में कर रहे आराम
शोहदों से लग रहे व्यवहार
रुष्ट प्रकृति दे रही अंजाम।

दुखद कुछ ऐसा रहा बदलाव
छाँव भी लगती नहीं अब छाँव।

हट गये पगडंडियों से पाँव
लो, सड़क पर आ गया हर गाँव।

-----

6 comments:

  1. nice poem. Thanks Sahitya Shilpi is back.

    -Alok Kataria

    उत्तर देंहटाएं
  2. हट गये पगडंडियों से पाँव
    लो, सड़क पर आ गया हर गाँव।

    बेहतरीन रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  3. लाला जगदलपुरी की रचनाओं में गहराई होती है।

    दुखद कुछ ऐसा रहा बदलाव
    छाँव भी लगती नहीं अब छाँव।
    हट गये पगडंडियों से पाँव
    लो, सड़क पर आ गया हर गाँव।

    उत्तर देंहटाएं
  4. लाला जगदलपुरी की कविताओ की बात ही कुछ और होती है...

    उत्तर देंहटाएं
  5. लाला जगदलपुरी जी को शत शत नमन जिनके बदौलत हमे इतनी अच्छी साहित्य सामग्री मिल पाती है...

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहौत सुंदर एवं सार्थक अभिव्यक्ति....

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget