बहे बासन्ती बयार, मन हुआ बेक़रार ,
छूटे रंगों की फुहार घर अंगना
फागुन आज गली मेरे आना !!

अलियों की करे पहुनाई
कलियों ने करी चतुराई
घूँघट पट खोल भरमाना
फागुन आज गली मेरे आना !!

फूटी डाली-डाली अरुणाई
शाखों पातों की तरुनाई
कोयलिया का रह-रह शरमाना
फागुन आज गली मेरे आना !!

बाजे ढोलक-झांझ मंजीरा
गावे राग बसंत फकीरा
फाग गाकर मन को लुभाना
फागुन आज गली मेरे आना !!

5 comments:

  1. होली की हार्दिक शुभकामना। बहुत सुन्दर होली गीत।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बाजे ढोलक-झांझ मंजीरा
    गावे राग बसंत फकीरा
    फाग गाकर मन को लुभाना
    फागुन आज गली मेरे आना !!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बधाई शकुंतला जी अच्छा गीत है। होली की शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  4. निधि अग्रवाल जी,नितेश जी, रितु रंजन जी आप सबका आभार आपने होली गीत पसंद किया .

    उत्तर देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget