सुलतानपुर। कवि डॉ0 डी0एम0मिश्र की आठवीं पुस्तक ’’रोशनी का कारवॉ’’ का विमोचन वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि सुभाषराय ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात कथाकार शिवमूर्ति ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।
अपने अध्यक्षीय भाषण में सुभाष राय ने कहा कि वही कविता बड़ी होती है जो जीवन का परिष्कार करती है। उन्होने कहा कि इस संग्रह की ज्यादातर ग़ज़ले सामाजिक और राजनैतिक चेतना की हैं जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है। कवि अपने समय के आवेग को भलीभॉति पहचानता है। इस पुस्तक की मूल ध्वनि सड़े-गले को तोड़ना और बदलना है।

कथाकार शिवमूर्ति ने कहा कि डी0एम0मिश्र की पुस्तक में गॉव है। लोक है। कहने का तरीका है। उन्होंने कहा कि मैंने श्री मिश्र की कई पुस्तकें पढ़ा है और उनसे मुझे बड़ी उम्मीद हैं। ’’युग तेवर’’ पत्रिका के सम्पादक कमलनयन पाण्डेय ने कहा कि डी0एम0मिश्र की गजलंे समकालीन हैं। व्यंग्य उनकी ग़ज़लो का प्राण है। स्वप्न भंग के सधे रचाव से उनकी ग़ज़लों का असर दूर तक जाता है। कमला नेहरू संस्थान के हिन्दी विभागाध्यक्ष डा0 राधेश्याम सिंह ने कहा कि डा0 मिश्र संवेदना के धरातल पर निरन्तर समृद्ध होते जा रहे हैं। चाहे पारिवारिक सम्बन्धो की दरकन हो या अपनी जड़ों से कटाव का दर्द। यह विविधता सम्पन्न जिन्दगी उनकी काव्य का जरूरी हिस्सा है। वे मौन की भाषा का समर्थन करते है।

कवि एवं आलोचक डा0 चन्देश्वर ने कहा कि श्री मिश्र शब्दों का चयन लोक से करते हैं न कि शब्दकोश से। श्री मिश्र समय से मुठभेड़ भी करते हैं और मुद्दो से जूझते भी हैं। राणा प्रताप पी0जी0 कालेज के प्रध्यापक डा0 इन्द्रमणि कुमार ने कहा कि डा0 मिश्र की ग़ज़ले सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में नया प्रतिमान रचती हैं। उनकी ग़ज़लें कोरी कल्पना नही। शायर तेवर सुलतानपुरी ने कहा डा0 मिश्र ने आसान और बोलचाल लफ्ज़ो का इस्तेमाल किया है। उन्होने हिन्दी और उर्दू को करीब लाने की चेष्टा की है। पुस्तक का प्रकाश नमन प्रकाशन नई दिल्ली ने किया।

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