6 मई को पंजाबी विरह के बादशाह शिव बटालवी की पुण्यतिथि पर विशेष

ऐ शिव ! तूने कभी इश्तहार दिया था
एक गुमशुदा लड़की का
जो अभी भी गुमशुदा है....
किसी ने कोशिश ही नहीं की
उसे तलाशने की, तुम्हारे बाद
वर्ना वह भी फ़कीर हो जाता
तुम्हारी भांति....
तूने उस लड़की का इश्तहार दिया था
जिसका नाम था मुहब्बत
जो कि दुनिया के हर रिश्ते से ख़त्म हो चुकी है
तूने उसकी बात की
जिसकी सूरत थी परियों जैसी
जो गुम हो चुकी है नकली मुखौटों की भीड़ में
तूने उसका ज़िक्र किया
जिसकी सीरत थी पाक और साफ़
मरियम जैसी
जो कि ओझल हो चुकी है
मंद विचारों के अंधियारे में
ऐ शिव ! ये कैसी लड़की थी
जिसकी ख़ातिर ज़माने ने तुझ पर तोहमतें लगाईं.
खरी खोटी भी सुनाई
आज भी सुना रहा है
ये लोग भी एक लड़की की तलाश में हैं
परंतु ये तुम्हारी तरह फकीर नहीं होंगे
उसे तलाशते तलाशते
क्योंकि जिसे ये तलाश रहे हैं
उसका नाम मुहब्बत नहीं
दौलत है, शोहरत है
जो उन्हें एक दिन अवश्य मिल जाएगी
या शायद मिल चुकी होगी
परंतु ऐ शिव !
जिस लड़की का तूने इश्तहार दिया था
वह अभी भी गुमशुदा है.....

(शिव बटालवी की कविता ‘इश्तहार’ पर आधारित)
[चित्र https://karuppurojakkal.wordpress.com/ से साभार]

3 comments:

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget