आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता

आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वॊ नाम नहीं होता

जब ज़ुल्फ़ की कालिख़ में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं हॊता

हँस- हँस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टुकडे़
हर शख्स़ की किस्मत में ईनाम नहीं होता

बहते हुए आँसू ने आँखॊं से कहा थम कर
जो मय से पिघल जाए वॊ जाम नहीं होता

दिन डूबे हैं या डूबे बारात लिये कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता


टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाहा दिल को समझें, हँसने की आवाज़ सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली

मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखों में, सादा-सी जो बात मिली


यूँ तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रे

यूँ तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रे
काँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे

बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडहर सजा कर
शायद इसी तरफ़ से एक दिन बहार गुज़रे

बहती हुई ये नदिया घुलते हुए किनारे
कोई तो पार उतरे कोई तो पार गुज़रे

तू ने भी हम को देखा हमने भी तुझको देखा
तू दिल ही हार गुज़रा हम जान हार गुज़रे।

3 comments:

  1. शुक्रिया सूरज भाई. मीना कुमारी की बहुत ही खूबसूरत गज़लें पढ़ने का अवसर दिया. पहले नहीं पढ़ा था. वह इतनी अच्छी गज़लकारा भी थीं, मालूम नहीं था.

    चन्देल

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुक्रिया सूरज भाई. मीना कुमारी की बहुत ही खूबसूरत गज़लें पढ़ने का अवसर दिया. पहले नहीं पढ़ा था. वह इतनी अच्छी गज़लकारा भी थीं, मालूम नहीं था.

    चन्देल

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  3. मीन कुमारी की इन गज़लों से उनकी रूहानियत झलकती है. काफी संजीदा गज़लें है. यदि संभव हो तो इसे ई-बुक के रूप में उपलब्ध करने की कृपा करें.

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