दुनिया में सबसे अच्छी और सबसे खूबसूरत चीज़ों को देखा नहीं जा सकता और न ही छूआ जा सकता है। उन्हें तो दिल से महसूस ही किया जा सकता है।

बेशक दुनिया में तकलीफ़ों की कमी नहीं है, लेकिन इन तकलीफ़ों से पार पाने के रास्ते भी कम नहीं हैं।

चरित्र जो है उसे आसानी से और गुपचुप तरीके से विकसित नहीं किया जा सकता। बार-बार की कोशिशों और तकलीफ़ों के अनुभवों से ही आत्मा शक्ति पाती है, आकांक्षाएं प्रेरणा लेती हैं और सफलता के द्वार खुलते हैं।

विचारों को पनपने देने के लिए कॉलेज सही जगह नहीं है।

हर चीज़ के अपने रहस्य  हुआ करते हैं, यहां तक कि अंधियारे और मौन के भी अपने रहस्य होते हैं। और मैं जिस हालत में रही हूं, उसी में मैंने सीखा है और उसी में संतुष्टि पायी है।

मैं ऐसी शां‍ति नहीं चाहती जो समझ विकसित करे, मैं तो ऐसी समझ विकसित करना चाहती हूं जो शांति का संदेश लाये।

जीवन या तो चुनौतीपूर्ण रोमांच है या कुछ भी नहीं है। प्रकृति में सुरक्षा जैसी किसी चीज़ का अस्तित्व नहीं होता, न ही इन्सान की संतानें कुल मिला कर इसका अनुभव करती हैं। लम्बे् अरसे की बात करें तो सामने आ कर भिड़ जाने की तुलना में खतरों से मुंह चुराना आपको सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।

साहित्य मेरा आदर्श है। मुझे इससे कोई अलग नहीं कर सकता। महसूस की जा सकने वाली कोई भी रुकावट मुझे किताब नाम की अपनी मेरी सखियों सहेलियों से मिलने वाले असीम, दैविक सुख से वंचित नहीं कर सकती।

कई लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि आखिर खुशी है क्या। इसे स्व -संतुष्टि से नहीं पाया जा सकता। इसे पाने के लिए सही प्रयोजन के प्रति ईमानदारी होनी चाहिये। 

कभी अपने सिर को झुकने मत दो। अपना सिर हमेशा ऊंचा उठाये रखो। दुनिया की आंखों में आंखें डाल कर देखो।

आज तक किसी निराश आदमी ने सितारों के रहस्यों  पर से पर्दा नहीं उठाया, न अछूती ज़मीन तक पहुंचने की समुद्री यात्रा की, और न ही मानवीय आत्मा् के लिए नये दरवाजे ही खोले हैं। 

जब किसी आदमी में ऊपर, और ऊपर उठने की उत्कट चाह होती है तो वह घिसटने के लिए कभी हामी नहीं भर सकता।

लोग सोचना पसंद नहीं करते। यदि कोई सोचता है तो उसे निष्कर्षों तक ज़रूर पहुंचना चाहिये। निष्कर्ष हमेशा सुख नहीं देते।

आत्म दया से बड़ा शत्रु और कोई नहीं है और यदि हम आत्म दया के आगे घुटने टेक दें तो दुनिया में कभी भी कुछ भी अच्छा नहीं कर सकते।

महक एक ऐसा ताकतवर जादू है जो आपको हज़ारों मील दूर भी ले जा सकती है और आजीवन आपके साथ बनी रह सकती है।

ऐसा कोई राजा नहीं रहा जिसके पूर्वजों में कोई दास न रहा हो और ऐसा कोई दास नहीं रहा जिसके पूर्वजों में कोई राजा न रहा हो।

यदि दुनिया में सिर्फ खुशियां ही खुशियां होतीं तो हम कभी भी बहादुर और संयमशील न बन पाते।

जब खुशियों का एक द्वार बंद होता है तो दूसरा खुल जाता है। लेकिन हम अक्सर बंद दरवाजे को ही इतनी देर तक ताकते रह जाते हैं कि हम उस दरवाजे की तरफ देख ही नहीं पाते जो हमारे लिए खोला गया है।

जब हम अपनी तरफ से बेहतरीन करके दिखाते हैं तो हम बिल्कुकल भी नहीं जानते कि उससे हमारे जीवन में या किसी और के जीवन में क्या चमत्काकर होने वाला है।

शिक्षा का सबसे बड़ा उपहार सहनशक्ति है। 

हो सकता है कि विज्ञान ने अधिकांश बुराइयों का इलाज खोज लिया हो लेकिन उन सबसे घातक बुराई का इलाज विज्ञान आज तक नहीं खोज पाया है और वह है – मानवीय उदासीनता।

2 comments:

  1. दुनियां में प्रत्येक महसूस करे वाली वस्तु अथवा प्राकृतिक गुणों को देखा नही जा सकता है उसको केवल महसूस किया जा सकता है जैसे दर्द, मौत हवा गंध, प्रेम,दू;ख, सुख , सम्बेदना,आह्लाद ,किरणों का ताप,हवा की मधुरता, आदि -आदि महसूस किये जा सकते हैं|
    मेरा मानना कि विचारो को पनपने के लिए स्वच्छ वातावरण सहायक समुन्नत होता है | सीखना! मानव स्वभाव होता है ,सम्पूर्ण जीवन मात्र यदि कहा जाए कि मानव सीखता रहता है तो बेमानी नहीं होगी | सीखने के लिए किसी मापदंड अथवा विशेष जगह या परिसर की आवस्यकता का होना आवश्यक नही अपितु वह हर जगह (सर्वत्र ) सीखता ही है | यह कहना कि केवल पुस्तके सीखे में सहायक होती है`,या प्रतेक परिस्थिति में पुस्तको का सहारा लिया जा सकता है यह सही नही होगा |
    दू :ख -सुख जीवन में आते -जाते रहते हैं ,मानव को प्रत्येक परिस्थिति में धैर्य धारण करके बेहतरीन तरीके से कार्य को करना चाहिए|

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  2. जीवन केवल अनुभूति हैं ।उपलब्धि नहीं ।दिशा जीने की भ्रमित होना ही निराशा हार ओर कुण्ठा हैं ।विसंगतियों का बीज तृष्णा अतृप्ति वासना हैं जो चिन्तन का विरोधी हैं ।जहाँ चिन्तन नहीं वहाँ मानव जीवन की कल्पना बेमानी हैं ।हाँ यह जीना एक दृष्टि से जीवन हैं जब हम संघर्ष से तपे तपे मननशील होते हैं तभी लगता हैं इन्सान सोचता हैं शायद मानव हैं ।

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