जीवन में बढ़ रही हैं कुछ ऐसी जरूरतें
ऐसी  जरूरतें  कि  हों  जैसे  कयामतें

मन क्यों न ले बलाएँ भला उनकी बार-बार
होती हैं नन्हों-मुन्नों की प्यारी शरारतें

देते  हैं  मेरे  दोस्त  तेरी ही भलाई  को
कुछ मान कर तो देख बड़ों की हिदायतें

दो वक़्त की दो रोटियाँ सबको ही चाहिए
भूखा सा शख्स क्यों न करेगा बगावतें

ए दोस्त , कौन पूछेगा हर काम-काज को
मिल जाये आदमी को अगर सब सहूलतें

दुश्मन की तरह आप रुकावट नहीं बनें
गर छाती हैं तो छानें दें उन पर मुहब्बतें

ए ` प्राण ` क्यों न उनकी सुनी अनसुनी करें
करते  हैं रोज़ - रोज़ जो  ढेरों शिकायतें

--------

अब छा रही हैं हर किसी पर यूँ  बनावटें
जैसे  हों  मेरे  दोस्तो  असली  सजावटें

हर आदमी का काम है उनको पछाड़ना
आती  हैं  जिंदगानी  में  ढेरों  रुकावटें

कोशिश करो भले ही उन्हें तुम मिटाने की
मिटती नहीं हैं  यादों की सुन्दर लिखावटें

रखना उन्हें संभाल के जब तक है दम में दम
मुख पर झलकती हैं जो ह्रदय की तरावटें

उनका असर ए दोस्तो किस पर नहीं हुआ
अब तो  विचारों  में  भी घुली  हैं मिलावटें

जिस ओर देखिए तो यही आता है नज़र
बढ़ती  ही  जा  रही  हैं  जहां में  दिखावटें

ए ` प्राण ` मन की शान रहे ऊँची हर घड़ी
जीने  नहीं  देती  कभी  उसकी  गिरावटें

------------

24 comments:

  1. दो वक़्त की दो रोटियाँ सबको ही चाहिए
    भूखा सा शख्स क्यों न करेगा बगावतें
    हमेशा की तरह ही लाज़वाब ग़ज़लें. शुभकामनाये...

    उत्तर देंहटाएं
  2. हर बार की तरह चुनिन्दा ग़ज़लें ...
    कोशिश करो भले ही उन्हें तुम मिटाने की
    मिटती नहीं हैं यादों की सुन्दर लिखावटें

    उत्तर देंहटाएं
  3. दोनों गज़लों का हर शेर अर्थपूर्ण. आज के हालात पर नज़र और सन्देश भी. ये शेर बहुत ही ख़ास लगा...

    दो वक़्त की दो रोटियाँ सबको ही चाहिए
    भूखा सा शख्स क्यों न करेगा बगावतें

    शुभकामनाएँ प्राण शर्मा जी.

    उत्तर देंहटाएं
  4. दो वक़्त की दो रोटियाँ सबको ही चाहिए
    भूखा सा शख्स क्यों न करेगा बगावतें
    ***
    कोशिश करो भले ही उन्हें तुम मिटाने की
    मिटती नहीं हैं यादों की सुन्दर लिखावटें

    अगर सादगी से असर दार बातें कहने का हुनर सीखना हो तो आदरणीय प्राण साहब की ग़ज़लें पढनी चाहियें. ज़िन्दगी के अलग अलग रंगों को बहुत ख़ूबसूरती से प्रस्तुत करने में उनका कोई सानी नहीं. उनकी लेखनी यूँ ही अनवरत चलती रहे ये ही दुआ करता हूँ.

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  5. ग़ज़लों में कह दी हैं आपने इतनी सुंदर बातें
    सुंदर बाते सच्‍ची बातें जीवन की अच्‍छी बातें।

    उत्तर देंहटाएं
  6. जीवन का सत्य उड़ेल दिया है आपने अपनी इन ग़ज़लों में| नन्हों-मुन्नों की प्यारी शरारतें, बनावटें, यादों की सुन्दर लिखावटें, रुकावटें, मिलावटें, सभी का अच्छा चित्रण है और आपने अच्छी सलाह दी है -
    ए ` प्राण ` क्यों न उनकी सुनी अनसुनी करें
    करते हैं रोज़ - रोज़ जो ढेरों शिकायतें
    --दिनेश श्रीवास्तव







    -दिनेश श्रीवास्तव

    उत्तर देंहटाएं
  7. आदरणीय प्राण साहेब,
    साहित्य शिल्पी में आपकी ग़ज़लें बांच कर दिन की शुरूआत कर रहा हूँ...........दिन अच्छा गुजरेगा ...ऐसा एहसास हो रहा है .

    दोनों ग़ज़लें कमाल की हैं , ज़िन्दगी के तमाम सरोकारों को आपने जिस कुशलता और उस्तादी अन्दाज़ में एक जगह ला कर उनके दो बुत बना दिए...........वे बड़े खूबसूरत हैं और रौशनी से भी भरे हैं


    यों तो सभी शे'र उम्दा हैं ...पर ये अशआर मुझे ज़्यादा नज़दीक लगे, इसलिए दिल में त५हिक ठीक लगे..

    मुबारक हो प्राण साहेब !
    यों ही रचते रहिये........

    सादर नमन

    उत्तर देंहटाएं
  8. ए दोस्त , कौन पूछेगा हर काम-काज को
    मिल जाये आदमी को अगर सब सहूलतें ..

    कोशिश करो भले ही उन्हें तुम मिटाने की
    मिटती नहीं हैं यादों की सुन्दर लिखावटें ..

    वाह ... प्राण साहब अपनी लेखनी के माध्यम से जीवन दर्शन उतर देते हैं शब्दों में ... सच है यादों को दिमाग से मिटाना आसान नहीं होता ... लाजवाब गजल हैं दोनों ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. दो वक़्त की दो रोटियाँ सबको ही चाहिए
    भूखा सा शख्स क्यों न करेगा बगावतें

    रखना उन्हें संभाल के जब तक है दम में दम
    मुख पर झलकती हैं जो ह्रदय की तरावटें

    आपकी लेखनी का जवाब नही …………ज़िन्दगी की सच्चाइयों से रु-ब-रु कराती गज़लें।

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह... वाह... प्राण जी की गज़लें उनके जीवट और सजगता की बानगी हैं. बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत खूबसूरत ग़ज़लें नये काफि़या प्रयोग के साथ।

    उत्तर देंहटाएं
  12. अब छा रही हैं हर किसी पर यूँ बनावटें
    जैसे हों मेरे दोस्तो असली सजावटें
    हमेशा की तरह इस बार भी दोनों गज़लें लाजबाब,

    उत्तर देंहटाएं
  13. प्राण जी हिन्दी गज़ल के बादशाह हैं. दोनों गज़लें बहुत सुन्दर हैं.

    रूपसिंह चन्देल

    उत्तर देंहटाएं
  14. देते हैं मेरे दोस्त तेरी ही भलाई को
    कुछ मान कर तो देख बड़ों की हिदायतें
    ***
    कोशिश करो भले ही उन्हें तुम मिटाने की
    मिटती नहीं हैं यादों की सुन्दर लिखावटें

    ज़िन्दगी की सीधी साधारण बातों को कलात्मक ढंग से ग़ज़लों में प्रस्तुत करने का हुनर अगर सीखना हो तो आदरणीय प्राण साहब की ग़ज़लों को पढ कर सीखना होगा. जिस ख़ूबसूरती से वो ज़िन्दगी जीने का सही तरीका और समाज में चल रही बुराइयों को अपनी ग़ज़लों में ढालते हैं वो अद्भुत है. मैं इश्वर से दुआ करता हूँ के उनकी कलम यूँ ही सालों साल चलती रहे...आमीन...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  15. दोनों ही गज़लें लाज़वाब...हरेक शेर बहुत सुन्दर और ज़िंदगी के करीब..बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  16. हर आदमी का काम है उनको पछाड़ना
    आती हैं जिंदगानी में ढेरों रुकावटें

    -उम्दा सीख देती बेहतरीन गज़ल!!

    उत्तर देंहटाएं
  17. आदरणीय प्राण साहब.. दोनों ही ग़ज़लें बेहतरीन बनी हैं...वाकई भूखा आदमी क्यों न करेगा बगावतें...सुन्दर ..आमआदमी की पीड़ा आपके ग़ज़ल में मुखरित हुई है...

    उत्तर देंहटाएं
  18. प्राण जी,

    आपकी दोनों ग़ज़लें पढीं. हमेशा की तरह ज़िन्दगी का आइना बन जाती हैं आपकी कृतियाँ.

    हार्दिक बधाई और धन्यवाद,

    महेंद्र दवेसर 'दीपक'

    उत्तर देंहटाएं
  19. प्राण साहेब ..

    माफ कीजिये देरी के लिये .
    आपकी गज़ले जिंदगी का आईना होती है ..
    बस पढ़ो तो पढ़े ही जाओ .

    दुश्मन की तरह आप रुकावट नहीं बनें
    गर छाती हैं तो छानें दें उन पर मुहब्बतें

    उनका असर ए दोस्तो किस पर नहीं हुआ
    अब तो विचारों में भी घुली हैं मिलावटें

    क्या बात है . वाह . इन दोनों शेरो ने तो मेरे मन की कह दी

    आपको सलाम .
    आपका
    विजय

    उत्तर देंहटाएं



  20. प्रारंभ में ही साहित्य शिल्पी के प्रति आभार व्यक्त कर देता हूं , इतनी ख़ूबसूरत ग़ज़लें पढ़ने का अवसर देने के लिए !

    और इन ग़ज़लों के लिए बात कैसे शुरू करूं ?
    जिनमें पढ़ने का आनंद भी है , सीखने के लिए फ़नकारी भी !
    जदीदियत भी है , तो रिवायात भी !
    सरलता सहजता भी है , तो उस्तादाना हुनरआश्नाई भी !

    इधर देखने में आया है कि बहुवचन के क़ाफ़ियों को ले’कर ग़ज़ल कहना… ग़ज़ल को ले’कर बड़ी बड़ी बातें करने वालों के लिए भी बहुत मुश्किल काम साबित हो रहा है …
    :)
    लेकिन बिना शोर मचाए हमेशा ही उस्तादाना क़लाम कह देने में माहिर ग़ज़लकार के रूप में दशकों से अपनी पुख़्ता पहचान स्थापित किए हुए वरिष्ठ ग़ज़लकार आदरणीय प्राण शर्मा जी की ये दोनों ग़ज़लें साबित करती हैं कि सच्चे फ़नकार की पहचान लफ़्फ़ाज़ी से नहीं , उसके क़लाम से होती है …
    मैं अचानक इस पोस्ट पर पहुंच कर भावविभोर हो गया हूं …

    क़ाफ़ियों का अपना आकर्षण और प्रभाव तो देखते बनता ही है , तख़य्युल और तग़ज़्ज़ुल के पैमानों पर भी दोनों ग़ज़लें ऊंचा मेयार रखती हैं ।
    आदरणीय प्राण जी को पढ़ते हुए हमेशा धर्मसंकट की स्थिति से दो-चार होना पड़ता है … किन अश्’आर को कोट न किया जाए !?
    हर मिसरा ख़ूबसूरत ! हर शे’र सुख़नवरी से मुअत्तर !!
    लाजवाब कह कर ख़ुद को झूटी तसल्ली देना होगा …क्योंकि कुछ भी कहना हक़ीक़तन नाकाफ़ी है …

    सलाम !
    नमन ! !
    Long Live Sir .
    सदैव स्वस्थ रहें …
    हम जैसे ग़ज़ल में कुछ करने की इच्छा रखने वाले अगली पीढ़ी के तालिब-ए-इल्म को आशीषें देते रहें …
    रास्ता दिखाते रहें …

    हार्दिक शुभकामनाएं !
    मंगलकामनाओं सहित…

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  21. Manney Pran sharma ji ko padhna aisa hai jaisa Ghazal ki pathshala mein aakar ek naye paath se robaroo hona
    दो वक़्त की दो रोटियाँ सबको ही चाहिए
    भूखा सा शख्स क्यों न करेगा बगावतें
    Unke sada bahar kalam ki tazagee ko mera naman
    Devi Nangrani

    उत्तर देंहटाएं
  22. aapki dono gajlon ne man ko chhu liya hai,jab bhee aapki gajlon se gujarta hoon to har bar kuchh naye sandharbhon se sakshatkar ho jataa hai, jo jindagee ke kareeb hoten hain.badhai.

    उत्तर देंहटाएं
  23. अतिसुन्दर रचना ! पढकर निशब्द हूँ !
    कोशिश करो भले ही उन्हें तुम मिटाने की
    मिटती नहीं हैं यादों की सुन्दर लिखावटें

    रखना उन्हें संभाल के जब तक है दम में दम
    मुख पर झलकती हैं जो ह्रदय की तरावटें

    आजा की सच्चाई -
    उनका असर ए दोस्तो किस पर नहीं हुआ
    अब तो विचारों में भी घुली हैं मिलावटें

    जिस ओर देखिए तो यही आता है नज़र
    बढ़ती ही जा रही हैं जहां में दिखावटें
    वाह, वाह बहुत खूब लिखा है प्राण जी !

    ढेर सराहना के साथ,
    दीप्ति

    उत्तर देंहटाएं
  24. अब छा रही हैं हर किसी पर यूँ बनावटें
    जैसे हों मेरे दोस्तो असली सजावटें
    बनावट और सजावट ही तो बन कर रह गया हैं मानव

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget