एक जनप्रचलित पुरानी नीति कथा सुनें। एक चालू बंदा हलवाई की दुकान पर गया, दुकान पर हर आइटम का भाव समान था। चालू ने कहा कि ला भाई एक किलो बरफी तौल दे।

बरफी तुली। दी गई। चालू का मूड बदला, बोला - बरफी छोड़ो, एक किलो जलेबी दे दे।
ओके, बरफी वापस, जलेबी आ गई।

चालू का मूड फिर बदला, बोला - जलेबी छोड़, तू तो लड्डू ही तौल दे।
ओके, बरफी वापस, लड्डू तुले।

चालू का मूड फिर बदला और बोला - लड्डू रहने ही दे, तू फाइनली एक किलो बालूशाही दे दे।

ओके लड्डू अंदर, बालूशाही तुली। चालू बालूशाही लेकर निकल लिया। हलवाई ने पूछा - पैसे कौन देगा।

चालू बोला - किस चीज के पैसे। हलवाई बोला - बालूशाही के। चालू बोला - बालूशाही तो लड्डू के बदले ही है। हलवाई बोला - तो भाई लड्डू के पैसे ही दे दे। चालू बोला - लड्डू जलेबी के बदले है। हलवाई बोला - तो जलेबी के पैसे दे भाई। चालू बोला - जलेबी बरफी के बदले ली है। हलवाई बोला - तो बरफी के पैसे दे। चालू बोला - अमां कमाल करते हो, बरफी ली ही कहां है। बरफी तो मैंने ली ही नहीं।

इस चालू कथा का थोड़ा सा रूपांतरण:
खौं-खौं, खाऊं-खाऊं सरकार को हम घेरेंगे, रिटेल सेक्टर में एफडीआई पॉलिसी, डीजल की महंगाई पर धरना, मोरचा, जुलूस होगा। महंगे डीजल से देश तबाह होगा।

ओके तो फिर ये मानें सारी तबाही डीजल की है। कोयला का मसला खत्म ना।
नहीं, खौं खौं, कोयला ही तो असली इशू है।

राइट, तो फिर ये मानें कि कोयला असली इशू है, तो फिर टू जी टेलिकॉम घोटाले का मसला नकली मान लेते हैं, वो इशू ही नहीं है।
नहीं, खौं-खौं, टेलिकॉम घोटाला असली इशू है।

ओके, अब असली इशू क्लियर हो गया, हम मान लेते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला कोई मसला नहीं बचा।
नहीं, नहीं, नहीं, खौं-खौं कॉमनवेल्थ गेम्स पर हम धरना, प्रदर्शन, मोरचा करेंगे। वही असली इशू है।

आपका धरना प्रदर्शन बेकार है उस पर, आप किसी से भी पूछो, कॉमनवेल्थ घोटाला तो अब इशू ही नहीं है।

बात में दम तो है, धरना-प्रदर्शन बेकार है, बरफी थिअरी के हिसाब से कॉमनवेल्थ घोटाला इशू ही कहां है अब।

1 comments:

  1. bahut hi satik kataksh....
    Gaharaayee me jaake sarkaar ko lataada hai aapne is vyangya ke madhyam se.....
    maja aa gaya

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