कल नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में आयोजित किये गये विश्व पुस्तक मेले का आखिरी दिन था। विश्व पुस्तक मेला, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। यह आयोजन न केवल पुस्तकों का देश में लगने वाला सबसे बड़ा मेला है अपितु सर्वाधिक समृद्ध भी है। देश विदेश से सैंकड़ों प्रकाशन संस्थान, लेखक तथा पाठक यहाँ जुटते हैं तथा देशी-विदेशी भाषाओं की अनगिनत पुस्तकों का एक ही स्थान पर समागम देखा जा सकता है। पुस्तकों के विषय भी विविध हैं तथा प्रकाशकों की सूची भी इतनी लम्बी है कि प्रगति मैदान मे आयोजित इस मेले क़ो अनेक हॉलों तथा स्टॉलों में विभाजित कर दिया गया है। यहाँ जुटने वाले पुस्तक प्रेमियों कि सुविधा के लिये सभी हॉलों के सामने प्रकाशकों के विवरण प्रदान किये गये हैं।

प्रत्येक हॉल में एक लेखक मंच स्थापित किया गया है जहाँ सारे दिन साहित्य के विभिन्न विषयों पर विमर्श आयोजित किये जाते हैं। हर विधा पर विभिन्न तरह की चर्चायें लेखक मंच को महत्वपूर्ण बना देती हैं। सारे दिन आयोजनों के दौरान अनेक पुस्तकों पर विमोचन चलते रहते हैं तथा यह भी देखने में आता है कि सभी स्टॉलों पर प्रकाशक अपने अपने तरीके से विमोचन कार्यक्रमों का आयोजन कर लेखकों एवं पुस्तक का प्रचार करते देखे जाते हैं। सम्भवत: एक साथ एक ही मंच पर अनगिनत पुस्तकों को लोकार्पित किये जाने का अद्भुत अवसर केवल विश्व पुस्तक मेले में ही दिख पाता है।

मेले और उत्सवों का मुख्य उद्देश्य ही मिलना मिलाना तथा परिचय करना और कराना होता है। देश भर के अनेकों बुद्धिजीवी इस अवसर पर एक साथ एकत्रित होते हैं, अत: पाठक लेखक संवाद को सहजता से यहाँ स्थापित देखा जाता है। अपने प्रिय लेखकों को सामने पा कर न केवल पाठक ही अभिभूत होता है अपितु लेखक को भी रचनाओं पर स्वाभाविक एवं सम्मुख प्रतिक्रियायें मिल पाती हैं। ऐसे आयोजन इस लिये भी नितांत आवश्यक हैं चूंकि इनके माध्यम से पुस्तकों के प्रति एक गंभीर अभिरुचि उत्पन्न होती है। युवा पीढी जो एक तरह से पुस्तकों से विरक्त हो रही है तथा केवल गूगल को ही अपना पुस्तकालय समझ बैठी है, उसके सामने जब ज्ञान का यह महासागर समुपस्थित हो उठता है तो वह भी सर्च और शोध के बीच का अंतर समझ पाती है।

2 comments:

  1. विश्व पुस्तक मेले में अगणिय साहित्य लोकार्पण हुआ यह अच्छा शुभ मौका होता है | पाठकों/प्रकाशकों की
    बोली में प्रायः खा जाता है जैसा आप से भी ज्ञात हुआ कि युवा पीढ़ी पुस्तक पढ़ने से अपने को अलग करते जा रहे हैं \ इसके तह में जाना होगा | अभी कल २२/०२/२०१५ को नागरीप्रचारणी सभा'निर्गुण' जी आयोजित संगोष्ठी में भी कुछ इसी प्रकार की बात पर चर्चा हुई जिसमे कहा गया कि मूल्य का निर्धारण करते समय प्रकाशक को पाठक का ध्यान रखना होगा जिससे पाठक पढ़ने में रूचि लेवें |

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  2. विश्व पुस्तक मेले की बारे में बहुत बढ़िया सार्थक चिन्तनकारी जानकारी प्रस्तुति हेतु आभार!

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