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मकसद हो तो आना जाना अच्छा लगता है
निभ जाए तो वफा ,निभाना अच्छा लगता है


 सुशील यादव रचनाकार परिचय:-



यत्रतत्र रचनाएं ,कविता व्यंग गजल प्रकाशित | दिसंबर १४ में कादम्बिनी में व्यंग | संप्रति ,रिटायर्ड लाइफ ,Deputy Commissioner ,Customs & Central Excise ,के पद से सेवा निवृत, वडोदरा गुजरात २०१२ में सुशील यादव New Adarsh Nagar Durg (C.G.) ०९४०८८०७४२० susyadav7@gmail.com

चारागर से मिल पूछूंगा ,टालने का अंदाज
किस मर्ज में कौन सा बहाना अच्छा लगता है

हम मुफलिस लोगों की ,सुनने वाला हो तो कह
वरना दर्दे दिल जिगर दबाना अच्छा लगता है

खुल के तू हंस नहीं पाती बीच सरे महफिल
बहुत दबे अंदाज ,मुस्स्काना अच्छा लगता है

तू बेकार की चीज सहेजे रहती है क्यों कर
मेरे लफ्जों में मुझे डुबाना अच्छा लगता है

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