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तीन वर्ष की सज़ा मिली है,सत्रह साला दानव को !
कुछ तो शिक्षा मिले काश,कानून बनाने वालों को !


 सतीश सक्सेना  रचनाकार परिचय:-



नाम : सतीश सक्सेना
जन्मतिथि : १५ -१२-१९५४
जन्मस्थान : बदायूं
जीवनी : जब से होश संभाला, दुनिया में अपने आपको अकेला पाया, शायद इसीलिये दुनिया के लिए अधिक संवेदनशील हूँ ! कोई भी व्यक्ति अपने आपको अकेला महसूस न करे इस ध्येय की पूर्ति के लिए कुछ भी ,करने के लिए तैयार रहता हूँ ! मरने के बाद किसी के काम आ जाऊं अतः बरसों पहले अपोलो हॉस्पिटल में देहदान कर चुका हूँ ! विद्रोही स्वभाव,अन्याय से लड़ने की इच्छा, लोगों की मदद करने में सुख मिलता है ! निरीहता, किसी से कुछ मांगना, झूठ बोलना और डर कर किसी के आगे सिर झुकाना बिलकुल पसंद नहीं ! ईश्वर से प्रार्थना है कि अन्तिम समय तक इतनी शक्ति एवं सामर्थ्य अवश्य बनाये रखे कि जरूरतमंदो के काम आता रहूँ , भूल से भी किसी का दिल न दुखाऊँ और अंतिम समय किसी की आँख में एक आंसू देख, मुस्कराते हुए प्राण त्याग कर सकूं !

अरसे बाद, पड़ोसी दोनों, साथ में रहना सीखे हैं !
अदब क़ायदा और सिखादें,शेख मोहल्ले वालों को !

अगर यकीं होता,पंडित को, मरते भरी जवानी में ,
परियां और शराब मिलेंगीं,स्वर्ग में जाने वालों को !

शोर-शराबों में, रौनक का सुख पूँछो , सन्नाटों से ,
कब्रिस्तान में नींद न आये,उसके ही रखवालों को !

सोना चांदी गिरवी रखकर, झोपड़ बस्ती सोयी है ,
धन की चिंता खाए जाती,अक्सर दौलत वालों को !

मैली बस्ती से कुछ हटकर,नगरी अलग बसाई थी,
मेलमिलाप से खौफ रहा है,उजले कालर वालों को !

बहुत ज़ल्द ही ढोंग,मिटाने जागेंगे ,दुनिया वाले,
खुला रास्ता देना होगा, जंग में जाने वालों को !

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