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पीपल के नीचे दिया जले

सुधेशरचनाकार परिचय:-



१ कविनाम सुधेश
ं२ उपनाम सुधेश
३ दिल्ली में सन १९७५ से । अत: दिल्ली वासी ।
४ चित्र संलग्न ( सब से अन्त में )
५ जन्मतिथि ६जून सन १९३३
६ जन्म स्थान जगाधरी ज़िला अम्बाला (हरियाणा )
७ पुस्तकें
काव्य कृतियाँ

१ फिर सुबह होगी ही ( राज पब्लिशिंग हाउस ,पुराना सीलमपुर ,दिल्ली ) १९८३
२ घटनाहीनता के विरुद्ध ( साहित्य संगम , विद्याविहार , पीतमपुरा ,दिल्ली ) १९८८ ,
३ तेज़ धूप ( साहित्य संगम , दिल्ली ) सन १९९३
४ जिये गये शब्द ( अनुभव प़काशन , साहिबाबाद़ ,ग़ाज़ियाबाद ) सन १९९९
५ गीतायन ( गीत और ग़ज़लें ) कवि सभा,विश्वास नगर , शाहदरा ,दिल्ली - २००१
६ बरगद ( खण्डकाव्य ) प्रखर प़काशन ,नवीनशाहदरा ,दिल्ली - २००१
७ निर्वासन ( खण्ड काव्य ) साहित्य संगम , पीतमपुरा , दिल्ली - सन २००५
८जलती शाम (काव्यसंग़ह) अनुभव प़काशन , साहिबाबाद़, ग़ाज़ियाबाद-२००७
९ सप्तपदी , खण्ड ७(दोहा संग़ह ) ंअयन प़काशन , महरौली ,दिल्ली सन २००७
१०हादसों के समुन्दर ( ग़ज़लसंग़ह ) पराग बुक्स , ग़ाज़ियाबाद - सन २०१०
११ तपती चाँदनी ( काव्यसंग़ह ) अनुभव प़काशन , साहिबाबाद़ - २०१३
आलोचनात्मक पुस्तकें

१ आधुनिक हिन्दी और उर्दू कविता की प़वृत्तियां ,राज पब्लिशिंग हाउस ,पुराना सीलम पुर दिल्ली सन १९७४
२ साहित्य के विविध आयाम -शारदा प़काशन ,दिल्ली १९८३
३ कविता का सृजन और मूल्याँकन - साहित्य संगम, पीतमपुरा ,दिल्ली १९९३
४ साहित्य चिन्तन - साहित्य संगम , दिल्ली १९९५
५ सहज कविता ,स्वरूप और सम्भावनाएँ - साहित्य संग़म ,दिल्ली १९९६
६ भाषा ,साहित्य और संस्कृति - स्रार्थक प़काशन ,दिल्ली २००३
७ राष़्ट्रीय एकता के सोपान - इण्डियन पब्लिशर्स,क़मला नगर ,दिल्ली २००४
८ सहज कविता की भूमिका - अनुभव प़काशन ,ग़ाज़ियाबाद २००८
९ चिन्तन अनुचिन्तन - यश पब्लिकेंशन्स, दिल्ली २०१२
१० हिन्दी की दशा और दिशा -जनवाणी प़काशन , दिल्ली २०१३
विविध प़काशन
तीन यात्रा वृत्तान्त ,दो संस्मरण संग़ह,एक उपन्यास,एक व्यंग्यसंग़ह , एक आत्मकथा प़काशित । कुल २९ पुस्तकें प़काशित ।
८ प़ाप्त पुरस्कार , सम्मान
मध्यप़देश साहित्य अकादमी का भारतीय कविता पुरस्कार २००६
भारत सरकार के सूचना प़सारण मंत्रालय का भारतेन्दु हरिश्चन्द़ पुरस्कार २०००
लखनऊ के राष्ट़़धर्म प़काशन का राष्ट़़धर्म गौरव सम्मान २००४
आगरा की नागरी प़चारिणी सभा द्वारा सार्वजनिक अभिनन्दन २००४
९ जीवनी - बचपन जगाधरी ,देवबन्द में बीता ।शिक्षा देवबन्द, मुज़फ़्फ़रनगर , देहरादून में पाई । एम ए हिन्दी में ( नागपुर वि वि ) पीएच डी आगरा विवि से । उ प़ के तीन कॉलेजों में अध्यापन के बाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू वि वि में २३ वर्षों तक अध्यापन । प़ोफेसर पद से सेवानिवृत्त । तीन बार विदेंश यात्राएँ । अब स्वतन्त्र लेखन ।
१० मैं प़माणित करता हूँ कि मेरी अब तक प़काशित २९ पुस्तकों पर मेरा कॉपीराइट है और मेरी सब प़काशित पुस्तकों के प़काशकों की ओर से अनाप़त्ति प़माणपत्र प़स्तुत करता हूँ ।

सम्पर्क का पता
३१४ सरल अपार्टमैन्ट्स , द्वारिका , सैक्टर १०
दिल्ली ११००७५
फ़ोन ९३५०९७४१२०

विरहन का मानो जिया जले ।
जो किसी याद में खोई सी
मेरी आँखों में दिया जले ।

रावण लंका में गरज रहा
उपवन में बैठी सिया जले ।
प़ीतम विदेश में खटता है
घर में घुटती राबिया जले ।

जंगल में घोर अंधेरे को
आलोकित करने दिया जले ।
पीपल पर भूतों का डेरा
क्या उन्हें भगाने दिया जले ।।

पीपल पर दुबके हैं पंछी
उन को शंका आशियाँ जले ।
दीपक से आग चुरा कर के
पटना राँची हल्दिया जले । ।

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