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" डाक्टर साहब ! प्लीज़ मुझे बचा लीजिये ."

" आप निश्चिन्त रहिये , ब्लाकेज अधिक तो है पर क्योरेबल है ."


 सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा रचनाकार परिचय:-


हरियाणा स्थित जगाधरी में जन्मे सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा 32 वर्ष तक दिल्ली में जीव-विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में कार्यरत रहने के उपरांत सेवानिवृत हुए हैं तथा वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लघुकथा, कहानी, बाल - साहित्य, कविता व सामयिक विषयों पर लेखन में संलग्न हैं।
आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, यथा “आज़ादी”, “विष-कन्या”, “तीसरा पैग” (सभी लघुकथा संग्रह), “बन्धन-मुक्त तथा अन्य कहानियाँ” (कहानी संग्रह), “मेरे देश की बात” (कविता संग्रह), “बर्थ-डे, नन्हे चाचा का” (बाल-कथा संग्रह) आदि। इसके अतिरिक्त कई पत्र-पत्रिकाओं में भी आपकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं तथा आपने कुछ पुस्तकों का सम्पादन भी किया है।
साहित्य-अकादमी (दिल्ली) सहित कई संस्थाओं द्वारा आपकी कई रचनाओं को पुरुस्कृत भी किया गया है।

" डाक्टर साहब , मुझे सर्जरी नहीं चाहिए .इतने पैसों का इंतजाम मेरी वाईफ नहीं कर पायेगी . जितनी भी सेविंग थी उससे बेटी का ब्याह होना है ."

" हम कोशिश करेंगे कि दवाओं से बात बन जाये पर आपकी वाइफ तो हर तरह से आपके इलाज के लिए तैयार हैं .वे चाहती हैं कि आप हर हाल में ठीक होने चाहिए ."

" असल में डाक्टर साहब मैं अपनी वाइफ के लिए अभी और जीना चाहता हूँ . वो मुझे बहुत प्यार करती है .मुझे कुछ हो गया तो मेरे बाद वो भी जी नहीं पायेगी ."

" आप ज्यादा इमोशनल मत होइए . ऊपर वाले से दुआ कीजिये कि आप इस अटैक को झेल जाएँ . हम तो केवल इलाज ही करते हैं ,असल में ठीक तो वही करता है जो सबका ख्याल करता है . "

" डाक्टर साहब ! मेरी वाइफ मेरे बिना मर जायेगी . वो मुझसे बहुत प्यार करती है . मैं उसके प्यार को ही प्यार करता हूँ और तब तक उसकी जिंदगी है मैं भी जीना चाहता हूँ . है ईश्वर मुझे इस जीवन के कुछ दिन और दे दो ."

अभी उनकी बात उनके हलक में ही थी कि प्राणो ने शरीर का साथ छोड़ दिया .

" प्रभो ! जब से इन प्राणो को लाया गया है , इन्होने वापस उसी शरीर में जाने का प्रलाप छेड़ रखा है . परलोक के किसी भी नियम - कानून को मानने के लिए तैयार ही नहीं है "

" क्या इन्हे समय से पूर्व लाया गया है .".

" जी ! आपके आदेश से इन्हें इनके निर्धारित समय से थोड़ा पहले लाया गया है , प्रभो ."

" यह तो वही पुण्यतमा है जिसने अपने माता - पिता कि सेवा सहित बहुत सारे पुण्य कर्म किये हैं . ."

" जी प्रभो . इन्होने अपने जीवन काल में अपने माता - पिता की भरपूर सेवा की और यथा सम्भव कोई भी गलत काम अपनी जानकारी में नहीं किया न कभी किसी को कोई नुक्सान पहुँचाया ."

" इनकी अतृप्ति का कारण क्या है जो यह वापस उसी शरीर में जाना चाहते हैं . इन्हे तो यहां आकर प्रसन्न होना चाहिए ."

" पर्भु इनका कहना है कि इनकी पत्नी इनसे बहुत प्यार करती है और इनकी अनुपस्थिति में उसे जो कष्ट होंगे , इनके प्राण उन कष्टों के कारण निरंतर आहत होते रहेंगे ."

" तो यह अपनी पत्नी के प्रेम के वशीभूत वापस अपने उसी शरीर में जाना चाहते हैं ."

" इनका यही प्रलाप है भगवन ."

" क्या आपने इनका यह अज्ञान दूर नहीं किया कि इनके भले के लिए ही इन्हे समय से पूर्व यहां बुलाया गया है ?"

" आज्ञा दें पर्भु .."

" इन्हें बताया जाये कि इन्होने धरती पर अपने माता - पिता कि सेवा तथा अन्य सद - कर्मों के रूप में जो पुण्य अर्जित किये हैं , उसी के प्रसाद स्वरूप इन्हे . इनके उस शरीर से समय से कुछ पहले मुक्ति दे दी गयी है क्योंकि यदि यह कुछ वर्ष और ये उसी शरीर में रहते तो जो संताप इन्हे भोगना पड़ता वह इनके लिए असहनीय होता ."

" परन्तु मेरी पत्नी को मेरी अनुपस्थिति में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ेगा ,वह मेरे लिए असहनीय है दयानिधान . मुझे वापस उसी शरीर में भेज दीजिये ."

" अरे निष्पाप प्राणात्मा ,यहां जो कुछ भी होता या किया जाता है उसके पीछे कोई न कोई उपयुक्त कारण होता है . तुम्हारी उस प्रियतमा के अश्लील प्रपंचों का तुम्हें अपने जीवन - काल में पता न चल पाये और उसके द्वारा किये गए पाप के भागीदार तुम न बनों एवं तुम्हारा शेष जीवन तुम्हारे लिए बोझ न बन जाए i इसीलिए समय से पूर्व , तुम्हें यहां लाया गया है ."

" आप बड़े कृपालु और न्यायकारी हैं पर्भु . "
“अन्य कोई शंका या दुःख हो तो कहिये "
“कोई नही दयानिधान ."

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