[साहित्य शिल्पी के सभी पाठकों को नव-वर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनायें।] 

नवीनता के पंख होते हैं
और वर्ष पलों के पंखों से
उड़ता थामे आता है
थरिया भर आसमान सितारों भरा
मेरी आँखों की धरती में टाँक जाता है चंदा।

कि धरती में खुशबू भर जाएगी अबके बरस
कि उम्मीद कठपुतली न रहेगी बल्कि नाचेगी
कि आशा बाँसुरी बजाएगी
कि मन के पास धरती होगी
और धरती के पास सोना।

और मेरे स्वजन
हमारी आत्मीयता का विश्वास भी तो
फूलों से लद जाएगा
अंतरंगता की नदी का कोकिल कलरव
तार बन गूथ देगा हम तुम को
और मधुरता आसमान से इतनी ऊँची हो लेगी
जितनी ऊँची होती है बुजुर्गों की दुआ।

नवीनता में पुरातनता को अलविदा कहना है
लेकिन अनुभव जीवन का गहना है
तो फिर हर नवीन खुशियों में
जीवन की अदाओं का साथ भर देंगे
अपने दिल इतने पास कर देंगे
आपको अपने मन में घर देंगे।

नवीनता इसलिए मुबारक हो
कि सोच के मौसम अब कि बदलेंगे
मुझको आशा है हर ग़लतफ़हमी
अब धुआँ न बन के फैलेगी।
बन के खुशबू हमारे मन के गुल कहते हैं
सब के साथ अपनी खुशियों का पर्वत हो
नूतन वर्ष स्वागत हो॥

- राजीव रंजन प्रसाद

2 comments:

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    Saira Bano, Shravan Mandavi, Satyendra Prasad Srivastava और 20 अन्य को यह पसंद है.
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    Vishwajit Kumar Tiwari
    Vishwajit Kumar Tiwari
    Vishwajit Kumar Tiwari की फ़ोटो.
    पसंद · जवाब दें · 23 घंटे
    Ashok Singh Yadav
    Ashok Singh Yadav Good wishes on new years to you and your family Rajeev
    पसंद · जवाब दें · 21 घंटे
    Anil Mishra
    Anil Mishra Happy New Year Rajeev ji
    पसंद · जवाब दें · 14 घंटे

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