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पंडित गोपाल प्रसाद व्यास


WRITER NAMEरचनाकार परिचय:-



अभिषेक सागर बिहार के एक छोटे से गाँव मे जन्मे तथा अपनी साहित्यिक अभिरुचि तथा अध्ययनशील प्रवृत्ति के कारण आप लेखन से जुड़े।
वर्तमान में एन एच पी सी मे कार्य करते हुए आप साहित्य शिल्पी के संचालक सदस्यों में हैं।

हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार तथा ब्रजभाषा और पिंगल के मर्मज्ञ, पंडित गोपाल प्रसाद व्यास का जन्म - 13 फरवरी, 1915 को स्व. ब्रजकिशोर शास्त्री और स्व. चमेली देवी के घर गोवर्धन, मथुरा में हुआ।

आपकी प्रारंभिक शिक्षा पहले पारसौली के निकट भवनपुरा में हुई। उसके बाद आपने मथुरा में केवल कक्षा सात तक पढ़ाई की। स्वतंत्रता-संग्राम के कारण उसकी भी परीक्षा नहीं दे सके और स्कूली शिक्षा समाप्त हो गई। तत्पश्चात आपने स्व० नवनीत चतुर्वेदी से पिंगल पढ़ा। इसके अतिरिक्त अंलकार, रस-सिद्धांत का ज्ञान सेठ कन्हैयालाल पोद्दार से प्राप्त किया तो नायिका भेद का सैंया चाचा से और पुरातत्व, मूर्तिकला, चित्रकला आदि का डॉ॰ वासुदेवशरण अग्रवाल से। विशारद और साहित्यरत्न का अध्ययन तथा हिन्दी के नवोन्मेष का पाठ आपने डॉ॰ सत्येन्द्र से पढ़ा।

आप ब्रजभाषा के कवि, समीक्षक, व्याकरण, साहित्य-शास्त्र, रस-रीति, अलंकार, नायिका-भेद और पिंगल के मर्मज्ञ माने जाते थे। पंडित जी हिन्दी में व्यंग्य-विनोद की नई धारा के जनक थे। गोपाल प्रसाद व्यास हास्य रस में पत्नीवाद के प्रवर्तक माने जाते थे। वे सामाजिक, साहित्यिक, राजनीतिक व्यंग्य-विनोद के प्रतिष्ठा प्राप्त कवि एवं लेखक थे और 'हास्यरसावतार' के नाम से प्रसिद्ध थे।

आपका विवाह सन 1931 में हिन्डौन, राजस्थान की श्रीमती अशर्फी देवी के साथ हुआ था। आपके तीन पुत्र - स्व.जगदीश, गोविन्द, ब्रजमोहन तथा तीन पुत्रियाँ - पुष्पा उपाध्याय, मधु शर्मा और डॉ. रत्ना कौशिक हैं।

भारत सरकार द्वारा पद्मश्री, दिल्ली सरकार द्वारा शलाका सम्मान और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती सम्मान से विभूषित पंडित गोपाल प्रसाद व्यास का निधन शनिवार, 28 मई, 2005, प्रातः 6 बजे, अपने निवास बी-52, गुलमोहर पार्क, नई दिल्ली-110049 पर हुआ।

आपके जन्मदिवस के अवसर पर साहित्य शिल्पी की तरफ से आपको सादर नमन करते हुए प्रस्तुत है आपकी एक हास्य रचना...

 

 पत्नी को परमेश्वर मानो

यदि ईश्वर में विश्वास न हो,
उससे कुछ फल की आस न हो,
तो अरे नास्तिको ! घर बैठे,
साकार ब्रह्‌म को पहचानो !
पत्नी को परमेश्वर मानो !

वे अन्नपूर्णा जग-जननी,
माया हैं, उनको अपनाओ।
वे शिवा, भवानी, चंडी हैं,
तुम भक्ति करो, कुछ भय खाओ।
सीखो पत्नी-पूजन पद्धति,
पत्नी-अर्चन, पत्नीचर्या
पत्नी-व्रत पालन करो और
पत्नीव्रत शास्त्र पढ़े जाओ।
अब कृष्णचंद्र के दिन बीते,
राधा के दिन बढ़ती के हैं।
यह सदी बीसवीं है, भाई !
नारी के ग्रह चढ़ती के हैं।
तुम उनका छाता, कोट, बैग,
ले पीछे-पीछे चला करो,
संध्या को उनकी शय्‌या पर
नियमित मच्छरदानी तानो !!
पत्नी को परमेश्वर मानो !

तुम उनसे पहले उठा करो,
उठते ही चाय तयार करो।
उनके कमरे के कभी अचानक,
खोला नहीं किवाड़ करो।
उनकी पसंद के कार्य करो,
उनकी रुचियों को पहचानो,
तुम उनके प्यारे कुत्ते को,
बस चूमो-चाटो, प्यार करो।
तुम उनको नाविल पढ़ने दो,
आओ कुछ घर का काम करो।
वे अगर इधर आ जाएं कहीं ,
तो कहो-प्रिये, आराम करो !
उनकी भौंहें सिगनल समझो,
वे चढ़ीं कहीं तो खैर नहीं,
तुम उन्हें नहीं डिस्टर्ब करो,
ए हटो, बजाने दो प्यानो !
पत्नी को परमेश्वर मानो !

तुम दफ्तर से आ गए, बैठिए !
उनको क्लब में जाने दो।
वे अगर देर से आती हैं,
तो मत शंका को आने दो।
तुम समझो वह हैं फूल,
कहीं मुरझा न जाएं घर में रहकर !
तुम उन्हें हवा खा आने दो,
तुम उन्हें रोशनी पाने दो,
तुम समझो 'ऐटीकेट' सदा,
उनके मित्रों से प्रेम करो।
वे कहाँ, किसलिए जाती हैं-
कुछ मत पूछो, ऐ 'शेम' करो !
यदि जग में सुख से जीना है,
कुछ रस की बूँदें पीना है,
तो ऐ विवाहितो, आँख मूँद,
मेरे कहने को सच मानो !
पत्नी को परमेश्वर मानो ।

मित्रों से जब वह बात करें,
बेहतर है तब मत सुना करो।
तुम दूर अकेले खड़े-खड़े,
बिजली के खंबे गिना करो।
तुम उनकी किसी सहेली को
मत देखो, कभी न बात करो।
उनके पीछे उनके दराज से
कभी नहीं उत्पात करो।
तुम समझ उन्हें स्टीम गैस,
अपने डिब्बे को जोड़ चलो।
जो छोटे स्टेशन आएं तुम,
उन सबको पीछे छोड़ चलो।
जो सँभल कदम तुम चले-चले,
तो हिन्दू-सदगति पाओगे,
मरते ही हूरें घेरेंगी,
तुम चूको नहीं, मुसलमानो !
पत्नी को परमेश्वर मानो !

तुम उनके फौजी शासन में,
चुपके राशन ले लिया करो।
उनके चेकों पर सही-सही
अपने हस्ताक्षर किया करो।
तुम समझो उन्हें 'डिफेंस एक्ट',
कब पता नहीं क्या कर बैठें ?
वे भारत की सरकार, नहीं
उनसे सत्याग्रह किया करो।
छह बजने के पहले से ही,
उनका करफ्यू लग जाता है।
बस हुई जरा-सी चूक कि
झट ही 'आर्डिनेंस' बन जाता है।
वे 'अल्टीमेटम' दिए बिना ही
युद्ध शुरू कर देती हैं,
उनको अपनी हिटलर समझो,
चर्चिल-सा डिक्टेटर जानो !
पत्नी को परमेश्वर मानो ।

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