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(26.) होंठों पर है रागनी

 महावीर उत्तरांचली रचनाकार परिचय:-



१. पूरा नाम : महावीर उत्तरांचली
२. उपनाम : "उत्तरांचली"
३. २४ जुलाई १९७१
४. जन्मस्थान : दिल्ली
५. (1.) आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह, २००९) अमृत प्रकाशन से। (2.) तीन पीढ़ियां : तीन कथाकार (कथा संग्रह में प्रेमचंद, मोहन राकेश और महावीर उत्तरांचली की ४ — ४ कहानियां; संपादक : सुरंजन, २००७) मगध प्रकाशन से। (3.) आग यह बदलाव की (ग़ज़ल संग्रह, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से। (4.) मन में नाचे मोर है (जनक छंद, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से।

होंठों पर है रागनी, मन गाये मल्हार
बरसे यूँ बरसों बरस, मधुरिम-मधुर-फुहार
मधुरिम-मधुर-फुहार, प्रीत के राग-सुनाती
बहते पानी संग, गीत नदिया भी गाती
महावीर कविराय, ताल बंधी सांसों पर
जीवन के सुर सात, गुनगुनाते होंठों पर

(27.) पोथी-पत्री बाँचकर
पोथी-पत्री बाँचकर, होवे कौन सुजान
शब्द प्रेम के जो कहे, उसको ज्ञानी मान
उसको ज्ञानी मान, दिलों में घर कर जाता
मानव की क्या बात, जानवर स्नेह लुटाता
महावीर कविराय, बात है सारी थोथी
हिया न उपजे प्रेम, व्यर्थ है पत्री-पोथी

(28.) आई जिम्मेदारियां
आई जिम्मेदारियां, काँप गए नादान
है यह टेड़ी खीर पर, जो खाए बलवान
जो खाए बलवान, शक्ति उसको मिलती है
माने कभी न हार, मुक्ति उसको मिलती है
महावीर कविराय, काम मुश्किल है भाई
भाग गया वो वीर, मुसीबत जिस पर आई

(29.) मन में हाहाकार
मन में हाहाकार है, जीना क्यों बेकार
कर पैदा सच्ची लगन, तो जीवन साकार
तो जीवन साकार, व्यर्थ न जलाओ जी को
प्रीतम अगर कठोर, भूल जा तू भी पी को
महावीर कविराय, प्यार मत ढूंढों तन में
रंग चढ़ेगा और, लगन सच्ची यदि मन में

(30.) मरते-खपते कट गए
मरते-खपते कट गए, दुविधा में दिन, रैन
जीवन के दो पल बचे, ले ले अब तो चैन
ले ले अब तो चैन, साँस जाने कब उखड़े
कर कुछ अच्छे काम, छोड़ दे लफड़े-झगड़े
महावीर कविराय, राम की माला जपते
बहुत जिए हम मित्र, कल तलक मरते-खपते

7 comments:

  1. रमेश कुमार9 मार्च 2016 को 10:05 am

    पोथी-पत्री बाँचकर, होवे कौन सुजान
    शब्द प्रेम के जो कहे, उसको ज्ञानी मान
    उसको ज्ञानी मान, दिलों में घर कर जाता
    मानव की क्या बात, जानवर स्नेह लुटाता
    महावीर कविराय, बात है सारी थोथी
    हिया न उपजे प्रेम, व्यर्थ है पत्री-पोथी

    क्या बात है...मजा आ गया

    उत्तर देंहटाएं
  2. सरल शब्दों में अनमोल बातें कहते हैं महावीर कविराय जी .उनकी सुन्दर रचनाएँ पढ़वाने के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. महावीर जी
    वन्दे भारत भारती
    सरस कुंडलिनी छंद आनंदित करते हैं.
    मैं अलंकार कोश पर कार्य कर रहा हूँ. उत्तराँचल में प्रचलित कुमायूनी, गढ़वाली आदि भाषाओँ से अलंकारों के उदाहरण हिंदी अर्थ सहित उपलब्ध करा सकें तो जोड़ दूँ.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय आप कुण्डलिया पर महान कार्य कर रहे हैं इसके लिए आपको बधाई देता हूँ। श्री त्रिलोक सिंह ठकुरेला जी कुण्डलिया छंद के जीर्णोद्धार पर अति-उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। वह आपको कुछ मदद कर पाएं। उनका ईमेल है—"त्रिलोक सिंह ठकुरेला trilokthakurela@gmail.com

      हटाएं
  4. पोथी-पत्री बाँचकर, होवे कौन सुजान
    शब्द प्रेम के जो कहे, उसको ज्ञानी मान ...


    बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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