"आमचो बस्तर उपन्यास पढ़ता हूँ तो मेरा उत्तर बस्तर में बीता बचपन याद आने लगता है । उपन्यास के कई किरदार ऐसे लगते हैं जैसे मैं निजी तौर पर रू-ब-रू हुआ हूँ । यह उपन्यास हमारे आज के युवा उपन्यासकारों के बीच अधिक सार्थक और मौलिक लेखन का अभिप्रमाणन जैसे भी है । उपन्यास की भाषा में काव्यात्मक लय तो पढ़ते ही बनती है । बस्तर पर लिखित कई उपन्यासों में यह अधिक श्रेष्ठ और विश्वसनीय है ।" - यह कहना था प्रतिष्ठित उपन्यासकार तेजिन्दर का ।

पिछले दिनों रायपुर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित 'एकल पाठ' के 14 वें अनुक्रम में पाठकों और छत्तीसगढ़ के रचनाकारों के मध्य सुना गया हिंदी के युवा उपन्यासकार राजीव रंजन प्रसाद को ।

राजीव रंजन प्रसाद ने अपने उपन्यास “आमचो बस्तर” से उन अंशों को पाठ के लिये चुना था जो बस्तर में नक्सलवाद पनपने के कारणों की व्याख्या कर सकते हैं । इन अंशों में वर्ष 1961 का लौहण्डीगुडा गोली काण्ड, बैलाडिला लौह खदान के कारण बदलती सामाजिक अवस्थिति आदि के संदर्भ थे ।

उपन्यास अंश पाठ पर बोलते हुए बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला ने कहा कि वे लेखक की रचना-प्रक्रिया का स्वयं भी हिस्सा रहे हैं । उन्होंने बताया कि राजीव ने अपने अपने उपन्यास में सभी सहमतियों और असहमतियों को समान रूप से स्थान दिया है।

साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य गिरीश पंकज ने उपन्यास को बस्तर का समाजशास्त्र निरूपित किया ।

वरिष्ठ कवि-लेखक स्वराज करुण ने अपनी बात रखते हुए उसे बेहद पठनीय और आदिवासी संसार की खुशहाली की पड़ताल करने वाला उपन्यास बताया ।

कवि सुशील भोले ने 'आमचो बस्तर' उपन्यास को बस्तर के संदर्भों को समझने के लिये एक महत्वपूर्ण कृति बताया।

जे. आर. सोनी जी ने कहा कि उपन्यास अंश का पाठ लेखक द्वारा इस तरह किया गया जैसे कोई एकलनाटक का प्रदर्शन हो ।

'आदित्य-यश' पत्रिका की सम्पादक शोभा यादव ने कहा कि आमचो बस्तर की विषयवस्तु हर पढ़ने वाले को प्रभावित करती है ।

वैभव प्रकाशन के निदशक डाॅ. सुधीर शर्मा ने कहा कि बस्तर पर लम्बे कालखण्ड में अनेक पुस्तके लिखी गयी हैं, 'आमचो बस्तर' को पढ़ना बस्तर पर सभी संदर्भ पुस्तकों के निचोड़ को ग्रहण कर लेना है।

वरिष्ठ समीक्षक डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि यह पुस्तक उन्होंने ख़रीद कर पढी है तथा इसमें वर्णित इतिहास और वर्तमान के संदर्भ नितांत प्रामाणिक हैं । मनोरंजनात्मक विधा में इतिहास, समाज और राजनीतिक यथार्थ को जिस तरह राजीव ने प्रतिष्ठित किया है स्वयं में अनुपम है ।

कार्यक्रम के सूत्रधार का दायित्व सृजनगाथा डॉट कॉम के सम्पादक जयप्रकाश मानस ने कहा कि 'आमचो बस्तर' का उपन्यासकार महज एक शब्द नहीं उठाता है, वह उस शब्द से बस्तर के एक अतीत, आगत और वर्तमान का जीवंत दृश्य भी हमारी आँखों के सामने ला खड़ा करता है, यथार्थ का इतना सघन रेखांकन कम उपन्यासकार कर पाते हैं, जिसे अपने पाठ में उपन्यासकार और भी मजबूती से सिद्ध कर देता है ।

उपन्यास अंश पाठ व उस पर समीक्षात्मक टिप्पणियों के पश्चात लेखक राजीव रंजन प्रसाद को ताराचन्द विमलादेवी फाउंडेशन, सृजनगाथा, वृन्दावन लायब्रेरी पाठक मंच और सृजन गाथा डॉट कॉम सहित राजधानी रायपुर की प्रमुख साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थाओं - सद्-भावना दर्पण, छत्तीसगढ़ मित्र, छ.ग. राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, गुरुघासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बाबू मावली प्रसाद साहित्य पीठ, माधवराव सप्रे साहित्य एवं शोध संस्थान, लोक सेवा संस्थान, मिनीमाता फ़ाउंडेशन, दैनिक भारत भास्कर, नाचा थियेटर, रूपक, वैभव प्रकाशन, मयारू माटी आदि की ओर से स्मृतिचिन्ह प्रदान किया गया।

धन्यवाद ज्ञापन किया वृंदावन पाठक मंच के संयोजक किरण अवस्थी ने ।

1 comments:

  1. साहित्य समाचार के लिए धन्यवाद...
    राजीव जी की पुस्तक मैंने पढी है...मजा आ गया पढ कर...

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