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ग्राम –महोत्सव गरिमा बिखेर रहा था । लक –दक सजावट, बार –बालाओं की अठखेलियाँ, हास्य कलाकारों के करतब गज़ब ढाये हुए थे । सोम –रस की सरिता जन से लेकर प्रतिनिधि तक को सराबोर किये थी ।

 मनन कुमार सिंह  रचनाकार परिचय:-



मनन कुमार सिंह संप्रति भारतीय स्टेट बैंक में मुख्य प्रबन्धक के पद पर मुंबई में कार्यरत हैं। सन 1992 में ‘मधुबाला’ नाम से 51 रुबाइयों का एक संग्रह प्रकाशित हुआ, जिसे अब 101 रुबाइयों का करके प्रकाशित करने की योजना है तथा कार्य प्रगति पर है भी। ‘अधूरी यात्रा’ नाम से एक यात्रा-वृत्तात्मक लघु काव्य-रचना भी पूरी तरह प्रकाशन के लिए तैयार है। कवि की अनेकानेक कविताएं भारतीय स्टेट बैंक की पत्रिकाएँ; ‘जाह्नवी’, ‘पाटलीपुत्र-दर्पण’ तथा स्टेट बैंक अकादमी गुड़गाँव(हरियाणा) की प्रतिष्ठित गृह-पत्रिका ‘गुरुकुल’ में प्रकाशित होती रही हैं।

शीत ऋतु में उष्णता का अहसास ऐसा ही होता है। तन आधे –अधूरे ढँके होने से क्या? मन की उमंगों पर कोई लगाम न होनी चाहिए । हर तरफ मादकता छितरायी –सी जाती है, जो जितना लपक -झटक ले। एक पत्रकार ने नेताजी से मुखातिब हो सलाम ठोंका । नेताजी मुँह बिचकाते –बिचकाते रह गये ।कैमरे की निगाह में थे न । ‘सवालों का गोला लिए आया होगा, समय का ध्यान ही नहीं रहता इन लोगों को’, फुसफुसाये फिर बोले,

‘हाँ, बोलो भाई। कुछ खाया?’

‘जी नहीं । आज मैं हाल के दंगे के विरोध में उपवास पर हूँ’।

‘भली बात । चाहता मैं भी नहीं था, पर यह हर साल का रिवाज है, सो आयोजन करना पड़ा।’

‘राहत –शिविर में कोई सामाग्री नहीं है, सर । पीड़ित परेशान है’।

‘यही तो मैं ऐलान कर रहा था कि विपक्षवाले हमें बदनाम कर रहे हैं । देखो, यहाँ एक नाटिका का आयोजन हुआ है जिसमें बताया गया है कि हमारी सरकार पीड़ितों के लिए कितना कुछ कर रही है’। ‘जी’।

सब लोग नाटिका देखने लगे । उत्तरार्द्ध में एक वृद्धा हाथों में एक नवजात शिशु लिए बिलखती कह रही थी कि इसके माँ –बाप दंगे की भेंट हो चुके हैं, मदद कीजिये । सिने तरीका उसे ढाढ़स बंधा रही थी, नेताजी ताली बजा रहे थे, ‘वाह, क्या सटीक चित्रण है दंगे के बाद की दशा का !’

‘हुजूर ! यह नाटिकावाली बुढ़िया नहीं है । यह तो शिविर से सीधे आयी एक पीड़िता है, सैकड़ों –हजारों तो बाहर खड़े हैं । हमारे सिपाही उन्हें रोके हुए हैं’, नेताजी के शोहदों ने उन्हे समझाया । नेताजी माथा पीटने लगे । फॉटोग्राफर महोत्सव में हो रही नाटिका की भीतर –बाहर की फिल्में निकालकर जा चुका था ।

***

*

4 comments:

  1. आदरणीय मनन कुमार जी आप को कोटि कोटि धन्यवाद पत्रकार फोटोग्राफर कोशुभाशीर्वाद जिस रचना में सजीव चत्रन हो बरवस हो वह रचनाकार धन्यवाद का पात्र हो ही जाता है |...

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय मनन कुमार जी आप को कोटि कोटि धन्यवाद पत्रकार फोटोग्राफर कोशुभाशीर्वाद जिस रचना में सजीव चत्रन हो बरवस हो वह रचनाकार धन्यवाद का पात्र हो ही जाता है |...

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. रमेश कुमार23 मई 2016 को 11:15 am

    सच्चाई को कोई नही देखना चाहता...अच्छी नाटिका...

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