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 डॉ अनामिका गुरू रिछारिया रचनाकार परिचय:-







नाम ---डॉ अनामिका गुरू रिछारिया जन्म 27 जून 1950
जन्म-स्थान -भोपाल म,,प्र ,भारत
पिता -स्व,डॉ राजेश्वर गुरू
पितामह --विश्व विदप्रथम व्याकरणाचार्य स्व,पंडित कामता प्रसाद गुरू
पति-डॉ सुरेश रिछारिया
शिक्षा ---एम,बी,बी,एस ,,,डी जी ओ
शिक्षा [अन्य ]--पत्राचार डिप्लोमा -उर्दू 2005 ,,संस्कृत --2012
रूचि साहित्य –सृजन, पठन पाठन एवं पेंटिंग
स्थाई पता –बी-3, तालपुरा योजना, आवास -विकास ,कानपुर -रोड ,झाँसी ,उ ,प्र ,भारत
सम्प्रति ---2010 मुख्य में मुख्य चिकत्सा अधीक्षका जिला महिला चिकित्सालय महोबाचित्रकूट धाम मंडल के पद से सेवा -निवृत
प्रकाशित पुस्तकें –1.संकल्प -कथा संग्रह 2 त्रिधा काव्य संग्रह 3 हैपी बर्थ डे टू यू -बाल कवितओं का संग्रह
प्रकाशित कहानियाँ --कोलकाता से प्रकाशित मासिक पत्रिका -वागर्थ ,आगरा से प्रकाशित --उत्तरार्ध ,नूतन कहानियाँ लखनऊ झाँसी महोत्सव स्मारिका झाँसी-दर्पण,..-दैनिक समाचार पत्र देशबन्दु ,एवं समवेत शिखर --रायपुर छ ग बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा एवं निधि मेल -झाँसी
लेख --दैनिक भास्कर झाँसी धारावाहिक स्वास्थ सम्बन्धी लेख ,,रेल संगम -झाँसी ,,सप्ताहिक पत्र राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी झाँसी ---संक्षेपिका शा ,दू व् ,.म,स्ना, महा.,रायपुर छ ग।
ग़ज़ल एवं कविताओं का प्रकाशन ---मासिक पत्रिकाएं --नारी -अस्मिता -बड़ोदरा --शाश्वत -भारती -उज्जैन म ,प्र रश्मि -पुँज -भोपाल --ग्लोबल मेडिकल न्यूज़ --फ़नकार -ग्वालियर ---नई ग़ज़ल महिला विशेषांक [त्रेमासिक]शिवपुरी म प्र ,--विवेकवाणी -बड़वाह पश्चिम निमाड़। पी एम एच पत्रिका झाँसी आई ,एम ,ए। पत्रिका झाँसी से नियमित कविताओं का प्रकाशन ठाणे से प्रकाशित- ललाट
दैनिक समाचार पत्र --- देशबन्धु रायपुर -छ,ग,,जागरण -झाँसी अमर उजाला झाँसी दैनिक भास्कर झाँसी दैनिक विश्व परिवार साप्ताहिक निधि मेल
संकलन में रचनाएं ---ठाणे से प्रकाशित --अभियान [महिला रचनाकारों का काव्य संकलन ग़ज़ल- दुष्टयन्त के बाद ,नारी चेतना के स्वर ,एकता की मशाल
कलियों को खिलने दो ,फरीदाबाद गीत- वल्लरी झाँसी विवेक -वीर छतरपुर म ,प्र प्रयास जलोंन काव्य -सुमन --कवर्धा छ ग काव्य सुधा --भोपाल म,प्र ,श्रेष्ट काव्य माला स्वर्ण जयन्ती काव्य गौरव
जे एम डी पब्लिकेशन के संकलनों के सम्पादक-समिति में नाम
प्रसारण --आकाश वाणी झाँसी एवं छतरपुर म,प्र से सतत रचनाओं का प्रसारण
सम्मान -- 1
1 --बुंदेलखंड शोध संस्थान झाँसी ---सारस्वत सम्मान
2 नव चेतना साहित्य संघ झाँसी ---काव्य -कला कौमुदी सम्मान
3 पुष्प -गंधा प्रकाशन कवर्धा ---काव्य सुमन सम्मान
4 मध्य प्रदेश नव लेखक संघ ---साहित्य -मनीषी सम्मान
5 रेलवे हिन्दी विभाग द्वारा सम्मानित
6 राष्ट्रीय चेतना छतरपुर म,प्र द्वारा सम्मानित
7 बुंदेलखंड विकास परिषद नई दिल्ली द्वारा सम्मानित
8 साहित्य लेखक संघ महोबा चित्रकूट मंडल द्वारा
9 हम सब साथ -साथ -हिन्दी पत्रिका द्वारा सम्मानित




काले -काले आते बादर
भर-भर लाते अपनी गागर
तरह -तरह के धरते रूप
छन -छन के आती है धूप

रिमझिम-रिमझिम कभी फुहार
कभी बरसते बन के धार
बिजली की होती चमकार
वन में हाथी की चिंघाड़
कभी हवा आंधी बन जाती
संग अपने तूंफा ले आती
जड़ से कभी उखाड़े पेड़
कभी उड़ा छप्पर ले जाती
भीग गया धरती का आँचल
भीग गए हैं पौधे -पेड़
भीग गए खलिहान -खेत हैं
भीग गई खेतों की मेड़



3 comments:

  1. रिछारिया की रचना सुन्दर !प्राकृति सौन्दर्य 'रिमझिम-रिमझिम कभी फुहार' सुन्दरता का बोध कराती |कोटिशः धन्यवाद

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  2. Kavita Mann ko chhoo gayi, tan ko jal ki bochhaar se bhiga gayi. Hasti be ki chinghaad aur person ki ukhaad sundar tak hila gayi. Badhaai ho

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  3. Kavita Mann ko chhoo gayi, tan ko jal ki bochhaar se bhiga gayi. Hasti be ki chinghaad aur person ki ukhaad sundar tak hila gayi. Badhaai ho

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