कृष्ण कुमार यादवरचनाकार परिचय:-



कृष्ण कुमार यादव : भारत सरकार में निदेशक। प्रशासन के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में भी प्रवृत्त। विभिन्न विधाओं में अब तक कुल 7 पुस्तकें प्रकाशित- 'अभिलाषा' (काव्य-संग्रह, 2005), 'अभिव्यक्तियों के बहाने' व 'अनुभूतियाँ और विमर्श' (निबंध-संग्रह, 2006 व 2007), 'India Post : 150 Glorious Years' (2006), 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा', 'जंगल में क्रिकेट' (बाल-गीत संग्रह, 2012) व '16 आने 16 लोग' (निबंध-संग्रह, 2014)।

देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर रचनाओं का निरंतर प्रकाशन। शताधिक पुस्तकों/संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, जोधपुर व पोर्टब्लेयर और दूरदर्शन से कविताएँ, वार्ता, साक्षात्कार का समय-समय पर प्रसारण। व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक 'बढ़ते चरण शिखर की ओर : कृष्ण कुमार यादव' (सं0- दुर्गाचरण मिश्र, 2009) प्रकाशित।

उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा ’’अवध सम्मान’’, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल द्वारा ’’साहित्य-सम्मान’’, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त द्वारा ’’विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगर दम्पति’’सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, भूटान में ’’परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘ साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान‘‘, आगमन संस्था, दिल्ली द्वारा ‘‘दुष्यंत कुमार सम्मान‘‘, विश्व हिंदी साहित्य संस्थान, इलाहाबाद द्वारा ‘‘साहित्य गौरव‘‘ सम्मान, सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु शताधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त।

संपर्क: कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर-342001
ई-मेलः kkyadav.t@gmail.com ब्लॉग: https://kkyadav.blogspot.in/, https://dakbabu.blogspot.in/
पिछले 50 वर्षो से अपनी पीढ़ी की आवाज माने जाने वाले अमेरिकी गीतकार और गायक बॉब डिलन को वर्ष 2016 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। 1901 से अब तक 115 साल में 109 शख्सियतों को यह नोबेल मिला, लेकिन ऐसा पहली बार होगा जब किसी गीतकार और गायक को साहित्य के नोबेल के लिए चुना गया है। बॉब डिलन का लेखन उपन्यास, कविता या किसी अन्य परंपरागत विधा में नहीं आता है, जिसके लिए अब तक यह पुरस्कार दिया जाता रहा है।

स्वीडन की नोबेल अकादमी ने 13 अक्टूबर, 2016 को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिकी गीतों की परंपरा में कविता के नए भावों को रचने के लिए बॉब डिलन को यह पुरस्कार दिया जा रहा है। एकेडमी की स्थायी सचिव सारा दानियस ने कहा कि डिलेन के गाने ‘कानों में कविता जैसे लगते हैं। ’ डिलन ने अमेरिका में प्रचलित गायन परंपरा में एक नए युग की शुरुआत की है। ब्लोविन इन द विंड, मास्टर्स ऑफ वार, ए हार्ड रेन्स ए-गोना फॉल, द टाइम्स दे आर ए-चेंजिंग और लाइक ए रोलिंग स्टोन जैसे गीतों में उन्होंने विद्रोह, असंतोष और स्वतंत्रता जैसे भावों को अभिव्यक्ति दी है।

साठ के दशक में अपने गिटार और माउथऑर्गन के साथ संगीत की दुनिया में आए डिलन को लोकगीतों का रॉक स्टार भी कहा जाता है। 75 साल के डिलन आज भी गाने लिखते हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं। स्वीडिश अकादमी के सदस्य पर वास्टबर्ग ने कहा कि वह शायद सबसे महान जीवित कवि हैं। उपन्यासकार टोनी मोरिसन के बाद से नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले डिलन पहले अमेरिकी साहित्यकार हैं। मोरिसन को 1993 में इस पुरस्कार से नवाजा गया था।

रॉबर्ट एलेन जिमेरमन उर्फ बॉब डिलेन का जन्म 24 मई, 1941 को अमेरिका में मिनेसोटा के डुलुथ में एक साधारण परिवार में हुआ। 1959 में उन्होंने मिनेसोटा के कॉफी हाउस में गायक के तौर पर कैरियर शुरू किया।1961 में वह न्यूयॉर्क चले आए। 1961 में ही उन्होंने अपना नाम औचारिक रूप से रॉबर्ट ज़िम्मरमैन से बदलकर बॉब डिलन कर लिया था। यहां के ग्रीनविच गांव में वह क्लब और कैफे में गाना गाने लगे। बड़े होने के साथ उन्होंने हार्मोनिका, गिटार और पियानो बजाना सीखा। 1961 में पहला अलबम 'बॉब डिलन' बाजार में आया। पहले अलबम की अपार सफलता के बाद बॉब ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उस समय अमेरिका के लोकप्रिय संगीत पर उनके गानों का जबर्दस्त असर पड़ा। अमेरिका के बदलते दौर और कलचर को पांच दशकों से डिलन बखूबी गायकी और लेखन में उतारते रहे हैं। उन्हें अमेरिका की दिक्कतें बताने वाला अनौपचारिक इतिहासकार भी कहा जाता है।

बॉब के बारे में कहा जाता है कि वो परंपरा के खिलाफ अलग तरह के गाने लिखते और गाते हैं। इसकी वजह से वो कई बार विवादों में भी रहे। बॉब डिलन के ‘ब्लोविन इन द विंड और द टाइम्स दे आर ए चेंज इन’ जैसे गानों को अमेरिका में जंग के खिलाफ और सिविल राइट्स मूवमेंट के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है। बॉब डिलन ने 54 साल में 70 एलबम निकाले, 653 गाने गाए और लिखे एवम 6 किताबें खुद लिखीं। बॉब के हिट एल्बमों में 1965 में ब्रिंगिंग इट ऑल बैक होम और हाइवे 61 रिविजिटेड,1966 में ब्लांड ऑन ब्लांड, 1975 में ब्लड ऑन द ट्रैक्स, 1989 में ओह मर्सी,1997 में टाइम आउट ऑफ माइंड और 2006 में मॉडर्न टाइम्स शामिल हैं। उनके सबसे लोकप्रिय गीतों में मिस्टर टैंबूरिन मैन से लेकर लाइक ए रोलिंग स्टोन, ब्लोइंग इन द विंड और द टाइम्स दे आर चेजिंग शामिल हैं।

बॉब डिलन ने अकॉस्टिक सिंगर और सॉन्ग राइटर के तौर पर करियर शुरू किया था। कहा जाता है कि शुरुआती वर्षों में बॉब डिलन जर्मन तानाशाह हिटलर से बेहद प्रभावित थे।1965 के फोक फेस्टिवल में वे तब विवादों में आ गए जब उन्होंने अपनी अकॉस्टिक गिटार अलग रख दी और इलेक्ट्रिक गिटार से परफॉर्मेंस दी। इस फेस्टिवल में लोगों ने बॉब डिलन के खिलाफ हूटिंग भी की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 1966 में उनका एक्सीडेंट हो गया। माना गया कि वे शोहरत का दबाव महसूस कर रहे थे। इसलिए उन्होंने इस हादसे के बारे में हकीकत कभी सामने नहीं आने दी। एक्सीडेंट के बाद 8 साल तक उन्होंने कोई टूर नहीं किया।

बॉब डिलन सिर्फ अमेरिका में ही नहीं बल्कि विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। बॉब डिलन को साहित्य को नोबेल मिलने पर भारत में भी खुशियां जताई जा रही हैं। सरोद वादक अमजद अली खान से लेकर संगीत निर्देशक ए आर रहमान तक ने डिलन को बधाइयां दी हैं। दोनों ने ही इसे संगीत से जुड़े सभी लोगों के लिए ‘‘गौरव का क्षण'' बताया। प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर कि यह खबर सुनकर काफी उत्साहित हूं। हम कुछ चीजों को लेकर काफी नैतिकतावादी हो जाते हैं। किसी गाने को साहित्य के तौर पर नहीं देखा जाता। गजल और नज्म को साहित्य समझा जाता है। बॉब एक शानदार इंसान हैं। उन्होंने इतिहास रचा है।

गौरतलब है कि 1901 से अब तक साहित्‍य के 108 नोबेल पुरस्‍कार दिए जा चुके हैं। बॉब डिलन साहित्‍य का नोबेल पाने वाली 109वीं शख्सियत हैं। अब तक साहित्य में सबसे अधिक नोबेल पुरस्कार जीतने वाले अंग्रेजी के लेखक (27) रहे हैं। उसके बाद फ्रेंच (14) और तीसरे नंबर पर (13) जर्मन हैं। नोबेल पुरस्कार जीतने वालों को करीब 80 लाख स्वीडिश क्रोनर (करीब छह करोड़ रुपये) पुरस्कार के तौर पर मिलते हैं। सभी पुरस्कार विजेता 10 दिसंबर को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर स्वीडेन में पुरस्कार ग्रहण करते हैं।

कृष्ण कुमार यादव
निदेशक डाक सेवाएं
राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर -342001
kkyadav.t@gmail.com


1 comments:

  1. लीक से हटकर इतिहास रचने वाले ही महान कहलाते हैं ..
    बहुत अच्छी जानकारी ..
    डिलन जी को हार्दिक बधाई ...

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