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बदली छायी
 डा. महेंद्र भटनागर रचनाकार परिचय:-


डा. महेंद्रभटनागर
सर्जना-भवन, 110 बलवन्तनगर, गांधी रोड, ग्वालियर -- 474 002 [म. प्र.]

फ़ोन : 0751-4092908 / मो. 98 934 09793
E-Mail : drmahendra02@gmail.com
drmahendrabh@rediffmail.com

तय है कि काली रात गुजरेगी,
भयावह रात गुजरेगी।
असफल रहेगा
हर घात का आघात,
पराजित रात गुजरेगी।
यव़्ाफ़ीनन हम
मुक्त होंगे त्रसदायी स्याह घेरे से,
रू-ब-रू होंगे
स्वर्णिम सबेरे से,
अरुणिम सबेरे से।
तय है-
अँधेरे पर उजाले की विजय तय है।
पक्षी चहचहाएंगे,
मानव प्रभाती गान गाएंगे।
उतरेंगी गगन से सूर्य-किरणें
नृत्य की लय पर,
धवल मुसकान भर-भर।
तय है कि
संघातक कठिन दुःसह अँधेरी
रात गुजरेगी।
कुचक्रों से घिरा आकाश बिफरेगा,
आहत जिदगी इंसान की
सँवरेगी।


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