आकांक्षा यादवरचनाकार परिचय:-

आकांक्षा यादव: कॉलेज में प्रवक्ता के बाद साहित्य, लेखन और ब्लाॅगिंग के क्षेत्र में प्रवृत्त। नारी विमर्श, बाल विमर्श और सामाजिक मुद्दों से सम्बंधित विषयों पर प्रमुखता से लेखन। लेखन-विधा- कविता, लेख, लघुकथा एवं बाल कविताएँ। अब तक 2 पुस्तकें प्रकाशित- चाँद पर पानी (बाल-गीत संग्रह-2012) एवं 'क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा' (संपादित, 2007)। ”आधी आबादी के सरोकार” नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन।

देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर रचनाओं का निरंतर प्रकाशन। व्यक्तिगत रूप से ‘शब्द-शिखर’ और युगल रूप में ‘बाल-दुनिया’, ‘सप्तरंगी प्रेम’ व ‘उत्सव के रंग’ ब्लॉग का संचालन। 60 से अधिक प्रतिष्ठित पुस्तकों/संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणी से समय-समय पर रचनाएँ, वार्ता इत्यादि का प्रसारण। व्यक्तित्व-कृतित्व पर डाॅ. राष्ट्रबंधु द्वारा सम्पादित ‘बाल साहित्य समीक्षा’ (नवम्बर 2009, कानपुर) का विशेषांक जारी।

उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा ’’अवध सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लाॅगर दम्पति’’ सम्मान, अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लाॅगर सम्मेलन, काठमांडू में ’’परिकल्पना ब्लाग विभूषण’’ सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलन, श्री लंका में ’’परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान’’, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाॅक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ’’डाॅ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान’’, ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘‘ व ’’भगवान बुद्ध राष्ट्रीय फेलोशिप अवार्ड’’, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’’भारती ज्योति’’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, ‘‘एस.एम.एस.‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार, निराला स्मृति संस्थान, रायबरेली द्वारा ‘‘मनोहरा देवी सम्मान‘‘, साहित्य भूषण सम्मान, भाषा भारती रत्न, राष्ट्रीय भाषा रत्न सम्मान, साहित्य गौरव सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु 50 से ज्यादा सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त। जर्मनी के बॉन शहर में ग्लोबल मीडिया फोरम (2015) के दौरान 'पीपुल्स चॉइस अवॉर्ड' श्रेणी में आकांक्षा यादव के ब्लॉग 'शब्द-शिखर' को हिंदी के सबसे लोकप्रिय ब्लॉग के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है।


संपर्क: आकांक्षा यादव, द्वारा-श्री कृष्ण कुमार यादव, निदेशक डाक सेवाएँ, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर-342001 (राजस्थान)
ई-मेल : akankshay1982@gmail.com ब्लॉगः http://shabdshikhar.blogspot.in/


आज सावन का पहला सोमवार था। रमा खूब करीने से मंदिर को धो-पोंछकर मूर्ति सजा रही थी। शिवलिंग पर फूल-माला चढ़ा ही रही थी कि अचानक उसकी बेटी वहांँ आई और पूछ बैठी- ”मम्मी, हम पूजा क्यों करते हैं ?” अपनी बेटी के इस जिज्ञासु प्रश्न का हँसते हुए रमा ने जवाब दिया- ”बेटी, हम भगवान की कृपा पाने के लिए और अपनी भावना को प्रदर्शित करने के लिए पूजा करते हंै।”

..........”लेकिन भगवान हैं कहाँ मम्मी ?”

..........”यहाँं इस मूर्ति में।”

अचानक बात करते-करते रमा का संतुलन बिगड़ा और भगवान की मूर्ति टूट गयी।

”अरे ! ये क्या हो गया ? अब तो ईश्वर का कोप सहना पडेगां।”

मूर्ति के समक्ष हाथ जोड़कर रमा गिड़गिड़ाने लगी- ”हे भगवान ! गलती से ऐसा हो गया। हमसे भूल हो गई, क्षमा करना प्रभु।”

.........”मम्मी ! इसमें घबराने की क्या बात है ? पत्थर की मूर्ति ही तो थी टूट गयी। बाजार से नई खरीद लेना।”


”अरे नहीं बेटी! जरुर कुछ अशुभ घटित हुआ है। लगता है भगवान जी हमसे नाराज हो गए हैं।”

.......ट्रिन..ट्रिन..ट्रिन..बेटी ने फोन उठाया और चीख पड़ी- ”मम्मी, पापा का एक्सीडेंट हो गया है। वे अस्पताल में भर्ती हैं। जल्दी से चलो।”

”.......मैंने कहा था न कि कुछ अशुभ घटित होने वाला है। ऐसा करो, तुम अपनी स्कूटी से अस्पताल निकलो और मैं मंदिर होकर आती हूँ। भगवान का कोप है, मंदिर में प्रसाद चढ़ा दूँ। पंडित को दान देकर भिखारी को भी खाना दे दूंँ ताकि तेरे पापा जल्दी से ठीक हो जाएं।”

”.....मम्मी, तुम भी किस अंधविश्वास में पड़ी हो। यह कोई कोप नहीं है। पापा को इस स्थिति में हमारी जरुरत है। तुम भी मेरे साथ चलो।”

”....नहीं बेटी, तुम अभी यह चीजें नहीं समझोगी। तुम चलो, मैं भी मंदिर से सीधे वहीं पहुँचती हूँ।”

बेटी अस्पताल पहुँची तो डाक्टर ने बताया कि काफी खून बह गया है। तुरंत ’बी पाॅजिटिव’ ब्लड की जरूत है। उसे याद आया कि मम्मी का भी बी पाजिटिव ब्लड है। पर मम्मी फोन उठाए तो सही।

इधर बेटी ब्लड बैंक का नंबर ढूंँढ़कर ’बी पाॅजिटिव’ ब्लड की माँंग कर रही थी और उधर रमा अंधविश्वास में गुम होकर मंदिर के दरवाजे पर भिखारियों को खाना खिलाने में जुटी थी....!!

-आकांक्षा यादव,
द्वारा-श्री कृष्ण कुमार यादव,
निदेशक डाक सेवाएँ, राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर-342001 (राजस्थान)
ई-मेल: akankshay1982@gmail.com ब्लॉगः http://shabdshikhar.blogspot.in/

***************************************

1 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’रंगमंच के मुगलेआज़म को याद करते हुए - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    उत्तर देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget