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 मनोरंजन कुमार तिवारी रचनाकार परिचय:-



नाम:- मनोरंजन कुमार तिवारी जन्म तिथि:- 06/01/1980 जन्म स्थान:- भदवर, जिला- बक्सर, बिहार पिता का नाम:- श्री कामेश्वर नाथ तिवारी गाँव:- भद्वर, जिला- बक्सर, बिहार वर्तमान पत्ता:- C/o- कर्ण सिंह, गाँव- घिटोरनी, नजदीक "तालाब",नई दिल्ही-30 मोबाइल न.- 9899018149 Email ID- manoranjan.tk@gmail.com


पता नहीं क्यों,
मगर जब भी, मेरे जीवन के,
भुली हुई स्मृतियों में से,
कोई बहुत ही सुन्दर सी, रोचक और प्यारी सी,
बात मेरे जेहन में आ जाती है,
तो उसे तुम्हे बताने की उत्कट अभिलाषा होती है,
जिसे सुन कर तुम्हारे होठों पर,
बिल्कुल बच्चों सी,
निश्छल, निर्मल मुस्कुराहट कौंध जाए,
मैं सोचता हूँ रात-रात भर,
ढुंढ़ता हूँ वो किस्से,
जिसे सुना कर तुम्हारे होठों पर,
उस उन्मुक्त मुस्कुराहट हो देख सकूँ,
जिसे देखने के लिए तरसता रहा हूँ हर पल।
पता नहीं क्यों,
मगर जब भी मेरे जीवन की,
गहरे दुख, पिडा, उदासी और निराशा
भरे लम्हे, मुझे असीम दर्द,
के गहराइयों में दुबोने लगते है,
तो वो बात तुम्हे बताने की,
बेचैनी सी हो जाती है,
पता नहीं क्यों मगर,
तुम्हारे आँखों में,
अपने लिए दर्द, सहानुभूति और फिक्र,
देखने की ललक सी लगी रहती है मन में।
पता नहीं क्यों मगर,
हजार परेशानियों के बीच भी,
तुम्हारे लिए परेशान होने को,
कुछ रह जाता है मन में,
और जब तक रात ढलने तक,
तुमसे बात ना कर लूँ,
हर पल लगता है,
कहीं परेशान होगी तुम,
कुछ बुरे से ख्वाब भी आते है,
की कहीं अकेले में बैठी रो रही हो तुम,
पता नहीं क्यों मगर,
ये सोच कर मन इतना व्यग्र हो जाता है की,
भूल जाता हूँ वो सब कुछ,
जो गुस्से में मैने कहा था,
तुमने कहा था,
भूल जाता हूँ वो सारे प्रण,
जो तुमसे बात ना करने के बारे में होता,
भूल जाता हूँ वो सारे वादे,
जो खुद से, और तुमसे किए होते है,
तुम्हे और ज्यादे परेशान ना करने के बारे में।
पता नहीं क्यों मगर,
जिन्दगी चल तो रही है बदस्तूर,
मगर जीने का एहसास नहीं होता तुम बिन।


2 comments:

  1. सूक्ष्म भावनाओं की सुंदर कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  2. भावों का अपरुप सुदर चित्रण व शब्दांकन.

    उत्तर देंहटाएं

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