रचनाकार परिचय:-

शशांक मिश्र भारती संपादक - देवसुधा, हिन्दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर - 242401 उ.प्र. दूरवाणी:-09410985048/09634624150
हिन्दी के प्रथम समाचार पत्र उदंत मार्तंड के प्रवेषांक 30 मई 1826 से लेकर आज तक के समय में कभी भी विज्ञापन से अधिक जनहित समाज व देश हित को महत्व दिया गया है ।यह बात हिन्दी पत्रकारिता के जनक पं. युगलकिषोर शुक्ल से लेकर बनारसी दास चतुर्वेदी गणेश शंकर विद्यार्थी से होती हुई अब तक मानी जाती रही है।भले ही कुछ समय से दृश्य श्रृव्य मीडिया के अधिकांश पत्रकार अपने उ{श्याो कर्तव्याो से भटक गये हैं परन्तु इसका आशय यह नहीं कि शत प्रतिषत पत्रकारिता या पत्रकारों में कर्तव्य हीनता आ गई ।अभी पत्रकारिता के सत्पथों पर समर्पित होने वालों की एक लम्बी श्रंृखला है।आधुनिक तकनीकों संचार क्रान्ति से कम्प्यूटर ईमेल फैक्स वाट्सअप आदि का प्रभाव बढ़ा है।काफी कुछ यह पत्रकारिता को प्रभावित कर रहे हैं।उसके तरीकों सुविधा सुलभता को परिवर्तित कर रहे हैं।दिनों का काम घण्टों में घण्टों का काम मिनटों और सेकण्डों में होने लगा हैं। सबसे अधिक बदलाव सामग्री प्रेषण उसके तरीकों में आया है जहां कभी समाचार सूचना भेजना ही दुर्लभ होता था आज वहां सचित्र ही नहीं श्रृव्य या दृश्य अथवा दोनों ही स्वरूपों में सामग्री पहुंचायी जा रही है।इन सब में से किसी माध्यम से जुड़ा व्यक्ति भले ही वह किसी समाचार पत्र या पत्रिका से न जुड़ा हो संपादक या पत्रकार भी न हो मात्र समाज को समय पर कसौटी पर कसने वाला हो पत्रकार कहा जा सकता है।ठीक उसी प्रकार जैसाकि बुद्ध कबीर तुलसी अपनी समाज के प्रति प्रतिबद्धता के चलते माने गये हैं।

यदि इन सभी का उपयोग सदुपयोग के रूप में सत्यनिष्ठा से आदर्शपत्रकारिता के मापदण्डों पर चलते हुए हो तो न केवल जनहित समाज व देश का कल्याण होगा अपितु पत्रकारों के मान सम्मान और कार्य का क्षेत्र बढ़ेगा।पत्रकारिता नित नये नूतन आयामों का स्पर्श करेगी।गौरवान्वित होगी।पत्रकार का दायित्व मात्र किसी समस्या को पकड़ना सुलझाना या सामने लाना ही नहीं होता अपितु उसको व्यावहारिक धरातल पर लाकर सुलझाना जनसेवा की परम्परा का महान अंग बनाना भी होता है ।कई बार किसी समस्या के समाधान के लिए पत्रकार के द्वारा दिया गया मत लोकजीवन के परम्परागत मत से मेल भी नहीं खाता है पर निर्भीक व निष्पक्ष पत्रकार समय की आवश्यकता को देखते हुए अपना मत व्यक्त करने का खतरा उठाता है।लोक जीवन के लाचार विचारों को नियंत्रित कर एक क्रान्ति दूत सा आगे बढ़ता जाता है।समय के प्रवाह में अपने पैरों को डाल-डाल कर अपनी पीढ़ी को थाह ले लेकर बताता जाता है।उसको पार ले जाता है।अपने विरोधियों का वह सामना अपने चरित्र की दृढ़ता से उनको विरोध करने का पूरा पूरा अवसर देते हुए करता है। जिस प्रकार एक मजबूत वृक्ष अपने जीवन का रस कीचड़ में से खींचता है उसी प्रकार यह जन जीवन की समस्याओं चिन्तन और घटनाओं से सीखकर विश्वास बनाते हैं ।किसी को प्रसन्न करने की मानसिकता इनकी नहीं होती कहीं पर जानबूझकर अतिश्योक्ति नहीं करते सन्देह को भ्रान्तिमान या भ्रान्तिमान को सन्देह यह नहीं करते।इनके वाक्य हों या शब्द नपे तुले और विचारों की कसौटी पर तुले हुए होते हैं।

दुर्भाग्यवश देखा जा रहा है कि दूरदर्शन के विविध व असंख्य निजी चैनल रेडियो चैनल समाचार पत्र पत्रिकाओं के द्वारा अपने अमूल्य समय को अपनी ग्राहक और आर्थिक क्षमता बढ़ानें में अधिक उपयोग करते हैं इसके लिए एक पक्षीय घटनाओं उप्रेजक दृश्यों कतिपय फीचर समाचारों उदाहरणों का बार-बार या प्रमुखता से प्रसारण -प्रकाशन करते रहते हैं विज्ञापनों के सन्दर्भ में कई बार मर्यादा पार कर जाते हैं ।यहां तक कि स्वंय की प्रतिष्ठा से बढ़कर कई बार प्रसार सख्ंया को मानने लगते हैं।उनके बोल और प्रस्ततीकरण किसी के प्रतिनिधि जैसे लगते हैं।मेरे पिछले साल के एक प्रकरण में कतिपय पत्रकार सच के साथ नहीं स्थानीय पुलिस को प्रसन्न करते अधिक दिखे।यह सब जनहित से कोसों दूर है ही साथ ही समाज और देश के प्रति इनकी भूमिका को लेकर सन्देह उत्पन्न करता है।

हमारे क्षेत्र में हिन्दुस्तान अमरउजाला राष्ट्रीय सहारा दैनिक प्रभात लक्ष्य जागरण स्वतंत्रभारत दैनिक जागरण सहित कई हिन्दी के समाचार पत्र आते हैं पर आमजनमानस पर छाप एक या दो पत्रकारों की ही है।पाठक न केवल उनकी प्रशंसा करते हैं अपितु सम्बन्धित का आदर पूर्वक नाम भी लेते हैं।वाहनों पर नजर डालें तो दो दर्जन से अधिक लोगों ने पत्रकार लिखा रखा है वह कैसे पत्रकार हैं या उनका उ{ेृश्य क्या है वही जानें। पर महत्वपूर्ण है आप अपने दायित्व का निर्वहन किस प्रकार करते हैं।जनसरोकारों से आपकी निकटता कितनी है।पत्रकार या मीडिया जगत का सर्वप्रथम दायित्व जनहित होता है।जिसके लिए सत्यनिष्ठा पारदर्शिता शीघ्रता व समयबद्धता होने ही नहीं चाहिए अपितु दिखनी भी चाहिए।मर्यादा व सीमाओं की जहां तक बात है कोई भी बन्धन जनकल्याण से बड़ा नहीं हो सकता।अतः पत्रकारिता से जुड़े लोगों को स्वंय ही मर्यादा का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए।जनहित को हानि पहुंचाने वाले कार्यों से स्वंय को विरत कर लेना चाहिए। भले ही इससे आर्थिक हानि क्यों न हो जाये।आर्थिक हानि की भरपाई हो सकती है किन्तु जनहित समाजकल्याण देशहित की उपेक्षा अनदेखी की पूर्ति संभव नहीं होती। देश अपनी बहती स्वाभाविक धारा से काफी पीछे चला जाता है।

वर्तमान में हत्या बलात्कार अत्याचार हिंसा के समाचारों हीरोइनों माडलोa खेलसमाचारों को छापना दिखाना प्रचार-प्रसार व जनमत की अपेक्षा को देखते हुए बुरा नहीं कहा जा सकता।लेकिन इनमें मर्यादित आचरण की सीमा तो होनी ही चाहिए इन सबको सामान्य जनहित की सूचनाओं समाचारों से अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।समय को समय का महत्व समझ उपयोग करें।आजकल का पाठक हो या दर्शक समय का दुरुपयोग नहीं चाहता उसकी जेब का मोबाइल या हाथ का रिमोट बदलने में देर नहीं करता।अधिकांश देखा गया है कि कई टी. वी. चैनल एक ही घटना या समाचार को तीन-तीन दिन तक अथवा बार-बार दिखलाते रहते हैं जानबूझकर उप्रेजक एक पक्षीय बनाकर प्रस्तुत करने का प्रयास हो जाता है। किसी की ओर झुकाव हो जाता है परिणामतः आज के जनमानस का झुकाव कम हो जाता है। यह सब अच्छा नहीं माना जा सकता और न ही इससे दीर्घकालिक लाभ उठाया जा सकता है।

इसलिए आवश्यक हो जाता है कि लघु समाचार पत्र-पत्रिकाओं से लेकर देश विदेश स्तर तक के समाचार पत्रों टी.वी. चैनलों रेडियों आदि तक को स्वस्थ पत्रकारिता के मानदण्डों को अपनाते हुए जनहित समाज व देशहित को सर्वोप्रम मानकर उसके प्रति अपने-अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए।वर्तमान का समय 1827 का नहीं है जब देशोद्वार के लिए पाठकों में जोश और जेल जाना दो ही दायित्व अधिकांश पत्रकारों के होते थे।आजकल तो विविध विषयों मु{्दों पर जनमत को जागरूक कर समझाया जा सकता है।चर्चायें करवायी जा सकती हैं।शिक्षा स्वास्थय समाज धर्म राजनीति भ्रष्टाचार आतंकवाद पर्यावरण रक्षा विदेष नीति रोजगार जनसंख्या जनसुरक्षा महिलासशक्तीकरण औद्योगीकरण नगरीकरण आदि पत्रकारिता के लिए असख्ंय विषय हैं। जिन पर विचार प्रेषण विनिमय चर्चाओं निष्कर्षों तक जाने की आवश्कता है।


2 comments:

  1. शशांक मिश्र भारती जी, बढ़िया आर्टिकल

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’ट्वीट से उठा लाउडस्पीकर-अज़ान विवाद : ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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