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 मनोरंजन कुमार तिवारी रचनाकार परिचय:-



नाम:- मनोरंजन कुमार तिवारी जन्म तिथि:- 06/01/1980 जन्म स्थान:- भदवर, जिला- बक्सर, बिहार पिता का नाम:- श्री कामेश्वर नाथ तिवारी गाँव:- भद्वर, जिला- बक्सर, बिहार वर्तमान पत्ता:- C/o- कर्ण सिंह, गाँव- घिटोरनी, नजदीक "तालाब",नई दिल्ही-30 मोबाइल न.- 9899018149 Email ID- manoranjan.tk@gmail.com


हम धूसर, विरान,
कुछ निर्जीव तमगों को लटकाए,
आसमां बन कर भी ख़ुश है,
तुम जीवन से लहलहाती,
हरियाली से भरपूर,
शस्य-श्यामली धारा बन कर भी ख़ुश क्यों नहीं?
ना जाने कितने दशकों से,
स्त्री विमर्श के नाम पर,
शब्दों को उलझाये जा रहे हो,
सशक्तिकरण के नाम पर,
निर्बलता का एहसास फैलाये जा रहे हो,
हमें तो कहीं नज़र ना आई वो अबला,
हमें तो कहीं नज़र ना आई तुम बेसहारा,
जुल्मों सितम ,सहने वाली,
जब भी देखा,
तुम्हारे आँचल को ममत्व, स्नेह और सहिष्णुता से भरा देखा,
हन मानता हूँ की कभी-कभी,
कुछ पुच्छल तारे, धूमकेतु, कुछ धूल के कण मेरे,
टूट कर गीरते है, तुम्हारे किसी हिस्से पर,
मगर वो समग्र आकाश तो नहीं होता,
तुम्हारे भी तो कुछ हिस्से सिर्फ बर्फ के बने है,
तुम्हारे भी कुछ हिस्से उगलते है आग की ज्वाला,
तुम ही तो जिम्मेवार होती हो उन आँधी, तूफानों, और अनेकानेक त्रसादियों के लिये,
विध्वंस लाकर उजाड़ देती हो उस जीवन को,
जिसे सृजित किया होता है हम दोनो ने,
तुम्हारी सारी कहीं इसलिये तो नहीं की,
हम तुम्हारे उपर क्यों है,
पर ये शिकायत, तुम्हे उस वक्त तो नहीं होती,
जब दूर कहीं भरती हो अपने आग़ोश में,
अपने आकाश को,
हाँ उनकी शिकायत वाज़िब है,
जिनका आकाश अभी मिला नहीं उससे,
पर इसके लिये तो मत कोसो सृष्टि को,
क़ुदरत ने ही हमें ऐसा बनाया,
तुम धारा ही बनी रहो,
अपनी समग्र धरणी के गुणों से परिपूर्ण,
मैं बना रहूँ आशमां,
अपनी तमाम अधूरेपन के साथ,
पूरा होने को आतुर,
तकता रहूँ हर पल तुम्हारी ओर,
इसी में हमारे सृजन की सार्थकता है।

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