सविता मिश्रारचनाकार परिचय:-



सविता मिश्रा o9411418621 w/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक ) फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउस खंदारी अपार्टमेंट , खंदारी आगरा २८२००२ पिता का नाम ..श्री शेषमणि तिवारी (रिटायर्ड डिप्टी एसपी ) माता का नाम ....स्वर्गीय श्रीमती हीरा देवी (गृहणी ) जन्म तिथि ...१/६/७३ शिक्षा ...बैचलर आफ आर्ट ...(हिंदी ,रजिनिती शास्त्र, इतिहास) अभिरुचि ....शब्दों का जाल बुनना, नयी चीजे सीखना, सपने देखना 'मेरी अनुभूति' परिलेख प्रकाशन से प्रकाशित पहला संयुक्त काव्यसंग्रह 'मुट्ठी भर अक्षर' पहला प्रकाशित साँझा लघुकथा संग्रह | 2012.savita.mishra@gmail.com




भोर सी मुस्कराती हुई भाभी साज सृंगार से पूर्ण अपने कमरे से निकली।
"अहा भाभी आज तो आप नयी नवेली दुल्हन सी लग रहीं है, कौन कहेगा शादी को आठ साल हो गए है।" ननद ने अपनी भाभी को छेड़ा।
"हां! आठ साल हो गए पर खानदान का वारिस अब तक न जन सकी।" सास ने मुहँ बिचका दिया।
"माँ भी न, जब देखो भाभी को कोसती रहती हैं। सोचते हुए वह भाभी की और मुखातिब हुयी। "भाभी मैं आपके कमरे में बैठ जाऊं, मुझे 'अधिकारों की लड़ाई' पर लेख लिखना है।"
"सुन सुधा, सुन तो! तू माँ के ....|" भाभी की बात अधूरी रह गयी थी और वह कमरे में जा पहुचीं थी।
"भाभी यह क्या? आपका तकिया भीगा हुआ है। किसी बात पर लड़ाई हुई क्या भैया से!"
"वह रात थी सुधा, बीत गयी। सूरज के उजाले में तू क्यूँ पूरी काली रात देखना चाह रही है।"
"काली रात का तो पता नहीं भाभी परन्तु रात का स्याह अपनी छाप तकिये पर छोड़ गया है और इस स्याह में भोर सा उजास आप ही ला सकती हैं।" सुधा अनायास ही गंभीर हो गयी थी और इधर उसका लेख 'अधिकारों की लड़ाई' भाभी के दिमाग में सबक बन कौंध रहा था।

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget