रचनाकार परिचय:-

विजय कांत मिश्रा,
बेचलर आफ ज्र्नेलिज्म & मासकम्यूनिकेशन
एम.काम.(बिज.ओर्गेन.& ईक्नो &एकाउन्ट्स)
164/5, प्रशान्ती लेन,सेंट्रल स्कल रोड़,
कोटा जं 324002.
मोबा:9799241575
(सरजी ,आसाम से नितेश गुरुंग का नमस्कार)
मिस्टर मिश्रा तुमको आसाम में मिलिटरी के कुछ एरीया मे सोफ्टवेयर में कुछ सीक्रेट सिस्टम और प्रोग्रेम डालने जाना हे और वहा पर मिलिटरी औफिशीयल्स को ट्रेनिंग भी देना हे.यह काम कम से कम 3 महीने चलेगा.
सर ! हमेशा मुझे ही क्यों बाहर भेजा जाता हे.में अभी तो गुजरात मे काम करके लौटा हूँ.मेरा भी परिवार हे.घर मे बच्चे पढ रहे हें.सर मेरे काम करने से यहा बारह एम्प्लोई फ्री हो जाते हें.यह तो सरकारी कंपनी हे इसलिये यहाँ चल भी रहा हे.प्राइवेट होती तो पता चलता.सर मेंने मन लगा कर काम सीखा तो सभी को में ही दिखता हूँ.सर मे भी इंसान हूँ.आप किसी ओर को भेजे.
मेने स्पष्ट बोल दिया.
जनरल मेनेजर साहब हंस कर बोले.सो तो हे.
मै कोटा राजस्थान मे एक सरकारी कंपनी में सोफ्टवेयर इंजिनियर था.तन,मन से काम करता था तो काम में पारन्गत हो गया.लेकिन सरकारी कंपनी होने के कारण कुछ स्टाफ के एम्प्लोई तो यूनियन बाजी के कारण फ्री हो गये थे.कुछ मेनेजमेन्ट के चमचे बन कर कामचोर हो गये थे.यह बात मेनेजमेन्ट को भी पता था.सरकारी कंपनी होने के कारण ये सब चल भी रहा था.प्राइवेट कंपनी होती तो सब ठिकाने आजाते.
में मेहनत से काम करता था तो किसी की गलत बात सुनता भी नही था.ये उपर तक का मेनेजमेन्ट जानता था.मुह पर साफ़ भी बोल देता था. फिर भी प्राय: मुख्य अर्जेंट काम मुझसे ही कराया जाता था.
पिओन ने आकर मुझसे कहा आपको बडे साहब बुला रहे हें.
सर!आपने मुझे बुलाया?
देखो मिश्राजी आपको तत्काल आसाम जाना होगा.मेने आपकी बात उपर तक पहूँचा दी हे,यह मिलिटरी का गोपनीय काम हे,आप मेरी बात मत मानो किंतु हायर मेनेजमेन्ट के ओर्डर तो मानो.ये देखो डाइरेक्टर के भी साईन हें.
मेरे उपर बहुत दबाव डाला गया. फिर मेरा भी
मन नही माना क्योकी एक तो ये मिलिटरी का काम हे.मिलिटरी 24 घंटे सीमा पर विषम परिस्थितीयों में काम कर रही हे और हम?
घर पर सभी बन्दोबस्त करके मेने दिल्ली होते हुवे राजधानी से गोहाटी तक का रिजर्वेशन करा लिया.
प्रोग्राम मे गौहाटी रेलवे स्टेशन पर कर्नल नारायण को आकर रीसीव करना था.पूरे प्रोग्राम मे कर्नल नारायण ही चीफ को ओर्डिनेटर थे.उनके अनुसरण मे मुझे सारा काम करना था.उस समय आसाम मे हवा जरा बिगडी हुई थी.वातावरण में गर्माहट थी.मुझे सख्त हिदायतें थी कि में किसी से मिलु जुलू नही.पूरे काम में किसी को मेरी पहचान पता नही होनी चाहिये.यानी की दायें हाथ की बायें हाथ को भी नही.
खैर!जेसे ही गौहाटी रेल्वे स्टेशन पर उतरा. कर्नल -नारायण ने स्वागत किया.कडी निगरानी मे मिलिटरी छावनी ले जाया गया.कर्नल नारायण द्वारा मुझे सभी हिदायतें दे दी गई.
मेने कर्नल नारायण से कहा कि सर मुझे आज से ही काम बता दें .कर्नल नारायण बहुत खुश हुवे.
अरे! मिश्राजी आपको तो मिलिटरी में होना चाहीये था.चलो आपको काम भी बतादें और स्टाफ से भी मिला दें !
स्टाफ बहुत मिलनसार था.मुझे एक जीप और ड्राइवर दिया गया था.
रात को लंच पार्टी मे कर्नल नारायण ने सभी मिलिटरी औफिसर्स के साथ मुझे भी बुलाया था.लंच मे ज्यादातर नानवेज और वाइन थी.में वेजिटेरीयन था.अतएव कुछ भी नही खाया.कर्नल नारायण ने इसे नोटिस लिया.
रात को गेस्टहाउस मे दूध पीकर सो गया.दूसरे दिन सेमिनार में कर्नल नारायण ने कहा कि यार मिश्रा तुम तो महान पंडित हो.एसे आदमी कम ही देखे हे.तुम्हारे लिये वेज रसोईया देखतेँ हें.कुछ दिनो तक तो रसोईया मिला नही.मेने ब्रेड.दूध.बिस्किट खाये.
एक दिन कर्नल नारायण ने मुझे कुछ सोल्जर्स के साथ कामख्या माताजी के दर्शन को भेजा.दर्शन बहुत अच्छे हुवे.वापसी मे अचानक एक 15-16 साल का लडका जीप के सामने आ गया.लडका टकरा कर बेहोश हो गया था.मे उसे शीघ्र उठा कर पास के अस्पताल ले गया.वो बेहद भूखा और गरीब सा लग रहा था.होश आने पर उसने अपनी लोकल भाषा में कुछ कहा जो किसी के भी समझने मे नही आया.खैर! उसकी बातो को हमने इशारे से समझा.उसको भी बताया गया कि तुम इशारे से अपनी बात कहो.उसे अस्पताल में भर्ती करा के खाना खिला कर और कुछ पैसे देकर हम गेस्टहाउस आ गये.
दूसरे दिन मेरा मन नही माना.में जीप मे बेठ कर अस्पताल पहूँच गया.वह ठीक था और उदास सा बेठा था.इशारों से उसने बताया कि वह अपने गावं से रोजगार की तलाश मे गौहाटी आया हे.अभी तक उसे कोई काम नही मिला हे.वो दो दिन से भूखा था.वो कोई भी काम करने को तैयार था.उसके बोलने से उसका नाम नितेश गुरुन्ग पता चल रहा था.जो सही था.
मेने उससे खाना बनाने के बारे में बात की.
सर!आप मुझे रख ले में सब सीख लूँगा.
मेने कर्नल साहब से बात की उन्होने हेड क्वाटर से विशेष अनुमति लेकर उसे केजुअल रसोईया रखवा दिया.
गरीब होने के कारण वो घर से खाली हाथ आया था.मेने उसे अपने पेसो से कपडे आदि दिलवा दीये.कुछ पेसे मनी ओर्डर से उसके घर भिजवा दीये.इससे वो बहुत खुश हुवा.वो मन लगा कर हर काम करने लगा.वेज रसोई की भी जल्दी ट्रेनिंग ले ली.जल्दी उठ कर नहाने का पानी गर्म कर देना.गर्म नाश्ता बनाना.गर्म खाना बनाना.
मुझे नहा धो कर पूजा करता देख वो भी नहा धो कर मेरे साथ पूजा भी करने लगा.उसमे हर जानकारी जानने की ललक देख कर मेने उसे स्लेट,बत्ती,पेन,कापी,किताबें भी दिला दी.खाली समय मे वो पढाई करने लगा.वो हर काम तेजी से करता और मन लगा कर पढाई भी करता.हर काम मुझसे कहने से पहले कर देता.
कुछ ही समय मे हर काम में उस पर डिपेंड हो गया.लेकिन उसने कभी मौका नही दिया कि में परेशान हूँ.आगे से आगे वो हर काम कर दिया करता था.वेसे एक अनपढ लडके से मुझे इतनी आशा नही थी.वो मेरे साथ गायत्री मंत्र और हनुमान चालीसा का पाठ भी करने लगा.अब वो समझदार भी हो चला था.
अब मुझे अलग अलग स्थानो पर भी भेजा जाने लगा.मेरा जाना बहुत गोपनीय रहता था.फटाफट तैयार हो कर पूरे साजो सामान के साथ निकलना होता था.
कभी ट्रक से,बस से.ट्रेन से,हेलीकोप्टर आदि से जाना होता था.हेलीकोप्टर यात्रा में वो पूरे समय हेलीकोप्टर से उपर से नीचे आखेँ फाड़ फाड़ कर जमीन को देखता रहा.
एक बार गंगटोक के पास एक स्थान पर काम हेतु जाना पडा.वो ही गाँव नितेश का भी था.
सर,आप मेरे गाँव आये हें तो मेरे परिवार से मिल लें.सर,हम गरीब हें ,लेकिन यदि आप चलेंगे तो वो सब बहुत खुश होंगे.
मेने कर्नल नारायण से सम्पर्क किया.उन्होने एहतियात बरतते हुवे सादे ड्रेस मे कमानडोज के साथ जाने की अनुमति दे दी.
नितेश का नया रूप देख कर वो सभी बहुत खुश हुवे.मुझे भी उन्होने टोपी और शाल पहनाई.उनके प्रेम से में भी अभीभूत हो गया.
काम चलता रहा.कर्नल नारायण मेरे काम से पूर्ण रूप से संतुष्ट थे.
समय निकलता जा रहा था.में भी अपना प्रोजेक्ट वर्क निपटाता जा रहा था.लेकिन ये सब नितेश की मेहनत और लगन का ही नतीजा था.मेने नितेश का एडमीशन ओपन यूनिवर्सिटी में करा दिया .जहाँ पत्राचार माध्यम से खाली समय मे दसवी की परीक्षा दे सके.
नितेश मेरे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका था.में चाहता था कि नितेश अपने जीवन में कुछ बन जाये.रोज भगवान से प्रार्थना भी करता था कि भगवान नितेश कुछ बन जाये.ये बात नितेश को भी पता थी.वो तन मन से पढने भी लगा.वो कुशाग्र बुद्धी का मेह्नती लड़का था.
समय पंख लगाए ऊड़ता जा रहा था.मेरा प्रोजेक्ट वर्क खत्म होने को ही था.कर्नल नारायण मेरे काम से बहुत प्रसन्न और संतुष्ट थे.क्योकी में समय से पहले काम खत्म कर लेता था.
लेकिन मेरा मन बहुत घबरा रहा था,में नितेश के बगैर केसे रह पाउन्गा.में जितना कमजोर होता जा रहा था.नितेश उतना ही मजबूत था..शायद पहाडी लोग जितना शरीर से मजबुत होते हे,उतना ही मन से भी.
आखिर प्रोजेक्ट वर्क खत्म हो गया.कर्नल नारायण ने एक जोरदार पार्टी दी,साथ ही प्रोजेक्ट वर्क कंपलिट का सर्टिफीकेट भी दीया.
गौहाटी स्टेशन पर कर्नल नारायण अपनी यूनिट के कुछ लोंगो कि साथ मुझे छोडने भी आये.नितेश भी अपने परिवार कि साथ आया था.स्टेशन पर मुझे बहुत भावभीनी विदाई दी जा रही थी.
कर्नल नारायण:मिश्राजी आपने बहुत अच्छा काम किया.कोई काम हो तो अवश्य बताना.
सर,आप प्लीज नितेश का ध्यान रखना.
अरे!उसको तो आज ही हमने कैजुअल वेज कुक रखा हे.वो मेरी यूनिट मे ही रहेगा.
ट्रेन धीरे धीरे चलना शुरू हुई थी.सब हाथ हिला रहे थे.नितेश चलते चलते मेरा हाथ अपने हाथों से कसके पकड़ कर बोला.
सर,आप मेरा लाइफ बनाया.में आपको कुछ बन कर दिखायेगा.वो भाव शून्य था.
ट्रेन गति पकड़ चूकी थी.में गेट पर खडा खडा रोता हुवा हाथ हिला रहा था.
इतने में टी.टी.ई. ने कंधे पर हाथ थप थपाया,
सर!मे बीस मिन्ट से आपकी सी आफ सेरेमनी देख रहा था.मुझे लग रहा था,ये सेरेमनी इन्नोसेन्ट और सेनसिटीव होगी.
सर! ये फ़र्स्ट ए.सी.कोच हे.यहाँ रोना अलाऊ नही हे.आप सीट पर बेठेँ.में टिकट चेक करूँगा तब तक आप बैलेन्स का भी रो लें. यह सुन कर
मुझे न तो हसना आ रहा था,न रोना.
खैर!में कोटा आकर अपने काम में व्यस्त हो गया.
बहुत समय बाद एक दिन नितेश का फोन आया:
सर!आसाम से नितेश गुरुंग का नमस्कार.सर आप मुझे भूल गया?
अरे!नितेश तुम?बिल्कुल नही भुला.
सर!अब आप मोबाइल मे ट्रु कालर चालू कर लें ,अब आप घर मे कमरे मे पंखा चला कर आराम से बेठ जायें अब मेरी बात सुनते समय आप रोयेन्गे नही.मुझे ट्रु कालर मे सब दिखेगा.
सर!मेंसभी एग्जाम पास करके आसाम रेजीमेन्ट में सेलेक्ट हो गया हूँ.ये सब आपके कारण संभव हुवा हे.सर, मुझे यूनिफ़ार्म मे देखे.आशीर्वाद दे.
शाबाश!नितेश यार शाबाश.अबतो तुम देखो की में रो रहा हुँ या हँस रहा हुँ.
शाबाश नितेश यार! शाबाश तूने उड़ना सीख ही लिया.



0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Google+ Followers

Get widget