रचनाकाररचनाकार परिचय:-

शबनम शर्मा
अनमोल कुंज, पुलिस चैकी के पीछे, मेन बाजार, माजरा, तह. पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि.प्र. – 173021 मोब. - 09816838909, 09638569237



हम पिछले सप्ताह ट्रेन में सफर कर रहे थे, हमें नीचे की 2 सीटें मिली थी और सामने वाली में एक छोटा सा परिवार बैठा था। पति-पत्नी और नन्हीं सी बालिका। देहरादून से गया तक वो भी हमारे हमसफर थे। बच्ची 2-2) साल की थीे। कभी अपनी वाली खिड़की में तो कभी मेरे वाली। जिस तरफ भी प्लेटफार्म आता वो उसी तरफ आ जाती और खिड़की से झांक-झांक कर छोटी-छोटी चीज़ों की डिमान्ड करती। उसके पापा ने एक बार भी उसकी इच्छा को नहीं नकारा। वह भरसक प्रयत्न कर उसे हर चीज़ लाकर दे रहे थे। उसे गोदी में बिठा खिला-पिला रहे थे। जहां गाड़ी कुछ लम्बे समय के लिये रूकी, वो उसे घुमा भी लाये। इसके अलावा बाकी सारे काम अपने, पत्नि के व बच्ची के वह खुशी-खुशी कर रहे थे। मुझे उन्हें देखकर कई बार काफ़ी अचम्भा भी हुआ। भारत में पैतृक व पुरुषप्रधान समाज में ऐसा सुलझा इन्सान देखकर हैरानी होनी कोई बड़ी बात न थी। रात का खाना हमने इक्ट्ठा आर्डर किया और साथ में ही खाया। उसने सबकी प्लेटें फटाफट समेटी और बाहर फेंक आए। मुझसे रहा न गया। पूछ ही बैठी, ‘‘बेटा, इतनी क्या जल्दी थी हम खुद कर लेते।’’ वह बोला, ‘‘नहीं आप भी मेरे माता-पिता के समान हैं इसमें क्या फर्क पड़ता है। 2 अपनी और 2 आपकी। दुआ ही तो मिलेगी।’’ ‘‘ये तो है।’’ मैंने कहा। ‘‘पर आजकल ऐसे प्यारे बच्चे कहाँ?’’ उसके चेहरे के भाव बदल से गये। मैंने कहा, ‘‘मैं कल शाम से तुम्हें देख रही हूँ, तुम लगातार काम किये जा रहे हो, थके नहीं।’’ उसने जवाब दिया, ‘‘आँटी, जब मैं 6 साल का था मेरी माँ मर गई, मेरा भाई 3) साल का था। लोगों ने पापा को दूसरी शादी करने को कहा। उन्होंने की नहीं। वह घर का सारा काम जैसे-तैसे करते और ड्यूटी पर भी जाते। मैं भी उनकी मदद करता। करते-करते आज ये वक्त आ गया और आँटी बिन माँ के बच्चे खुद ही सीख जाते हैं सारी जिम्मेदारियाँ निभाना।’’ कहते-कहते उसकी आँखें भर आईं और हम सब शाँत से हो गये।






1 comments:

  1. आप सभी सुधीजनों को "एकलव्य" का प्रणाम व अभिनन्दन। आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार(दिनांक ०३ दिसंबर २०१७ ) तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com
    हमारा प्रयास आपको एक उचित मंच उपलब्ध कराना !
    तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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