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उस तितली से बन जाओ [बाल-कविता] - रचना सागर




कोमल कोमल पंखो वाली

नभ को देखो छूने वाली

रंगीनी बरसाने वाली

प्यारी तितली आई है



एक संदेशा लाई है

हिन्दु मुस्लिम सिख ईसाई

आपस मे है भाई- भाई

सब संग मिलकर रहा करो

प्यार सभी से किया करो

सदाचार अपनाओ तुम

भूलों को राह दिखाओ तुम



हो भविष्य कल का तुम

सच्चाई को अपनाओ

जैसे रंग- बिरंगे पंख

उस तितली से बन जाओ॥

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13 टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर भाव हैं, बधाई.

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  2. एकता और सदाचार का यह संदेश बहुत ही सामयिक और आवश्यक है ।

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रेरणा देती सुन्दर बाल कविता

    जवाब देंहटाएं
  4. खूबसूरत मनभावन बाल-कविता। सब नहीं लिख सकता। बच्चा बनना पड़ता है। बाल मनोविज्ञान को आत्मसात कर ही ऐसी सच्ची कविता लिखी जाती है। रचना सागर जी, कविता के लिये बधाई स्वीकारें।
    -सुशील कुमार।

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  5. तितली और भाव

    दोनों सुंदर हैं

    और रचना
    सबसे।

    जवाब देंहटाएं
  6. हो भविष्य कल का तुम
    सच्चाई को अपनाओ
    जैसे रंग- बिरंगे पंख
    उस तितली से बन जाओ॥

    बहुत अच्छी कविता है, बधाई स्वीकारें।

    जवाब देंहटाएं
  7. प्रेरणात्मक बाल रचना सरल सुलभ शब्दों में..बधाई

    जवाब देंहटाएं
  8. खूबसूरत बात. बेहद आसान अल्फाजो के साथ . जमी रहिये . :-)

    जवाब देंहटाएं
  9. हो भविष्य कल का तुम


    सच्चाई को अपनाओ


    जैसे रंग- बिरंगे पंख


    उस तितली से बन जाओ॥

    bahut sunder rachana

    जवाब देंहटाएं
  10. सहज-सुंदर और मनभावन बाल गीत । भीतर का बालक बोल उठा ।

    प्रवीण पंडित

    जवाब देंहटाएं
  11. Seedhe-saade aur thode shabdon
    mein sunder aur badee baat.Rachna
    jee ,aapne to gagar mein sagar bhar
    diya hai.

    जवाब देंहटाएं

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