दिल के कोरे कागज पर
खींचकर कुछ आड़ी-तिरछी लकीरें
जब देखती हूँ...
बन जाती है तस्वीर तुम्हारी

और लगता है कागज़ का वह टुकड़ा
कह रहा हो मुझसे
मै तो बसा हूँ दिल में तुम्हारे
क्यों कागज पर उतारा है?
देखो बेरहम दुनियाँ जला न दे
देखो कहीं हवा उड़ा न दे
और घबरा कर मै समेट लेती हूँ
वो तस्वीर तुम्हारी....

जब सुबह का सूरज
अपनी रौशनी फ़ैलाये
मेरी खिड़की से झाँकता है
मुझे नजर आते हो तुम
अपनी इन्द्र-धनुषी बाँहे फ़ैलाये
और मेरे चेहरे से छूती
तुम्हारी बाँहे
जगा देती है मुझे
तुम्हारे अहसास के साथ

सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी
एक कविता बन गई है
और मै एक कलम
जो हर वक्त
तुम्हारे प्यार की स्याही से
बनाती है तस्वीर तुम्हारी...।

14 comments:

  1. मै तो बसा हूँ दिल में तुम्हारे
    क्यों कागज पर उतारा है?

    very nice

    जवाब देंहटाएं
  2. सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी
    एक कविता बन गई है
    और मै एक कलम
    जो हर वक्त
    तुम्हारे प्यार की स्याही से
    बनाती है तस्वीर तुम्हारी...।
    प्रभावित किया आपने।

    जवाब देंहटाएं
  3. सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी
    एक कविता बन गई है

    बस इतना ही पूरी कविता है। बहुत अच्छे।

    जवाब देंहटाएं
  4. मन को छू लेने वाली कविता है।

    जवाब देंहटाएं
  5. सुन्दर मनोभाव समेटे कविता...
    कितना अच्छा हो अगर कागज की लकीरें...हाथ की लकीरों से मेल खा जायें और किस्मत की लकीरें चमक उठें

    जवाब देंहटाएं
  6. दिल में हो तुम...

    आँखों में तुम....

    बोलो तुम्हें कैसे चाहूँ...


    प्रभावी रचना...

    जवाब देंहटाएं
  7. itna acchi kavita ,aur kitna bhaavpoorn hai ..
    सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी
    एक कविता बन गई है
    और मै एक कलम
    जो हर वक्त
    तुम्हारे प्यार की स्याही से
    बनाती है तस्वीर तुम्हारी...।
    wah wah , kya baat hai .

    bahut badhai

    vijay
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  8. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 19 अगस्त 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  9. बेहतरीन सृजन आदरणीया
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह बेहतरीन रचना। सार्थक सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  11. सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगी
    एक कविता बन गई है
    और मै एक कलम
    जो हर वक्त
    तुम्हारे प्यार की स्याही से
    बनाती है तस्वीर तुम्हारी...।
    बहुत ही सुन्दर ....लाजवाब...
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

पुस्तकालय

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...

आइये कारवां बनायें...

साहित्य शिल्पी, हिन्दी और साहित्य की सेवा का मंच, एक ऐसा अभियान.. जो न केवल स्थापित एवं नवीन रचनाकारों के बीच एक सेतु का कार्य करेगा अपितु अंतर्जाल पर हिन्दी के प्रयोग और प्रोत्साहन का एक अभिनव सोपान भी है, अपने सुधी पाठको के समक्ष कविता, कहानी, लघुकथा, नाटक, व्यंग्य, कार्टून, समालोचना तथा सामयिक विषयो पर परिचर्चाओं के साथ साहित्य शिल्पी समूह आपके समक्ष उपस्थित है। यदि राष्ट्रभाषा हिदी की प्रगति के लिए समर्पित इस अभियान में आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर एवं कुछ रचनायें हमें निम्नलिखित ई-मेल पते पर प्रेषित करें।
sahityashilpi@gmail.com
आइये कारवां बनायें...

Followers

Get widget