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मंदा और धंधा [सप्ताह का कार्टून] - अभिषेक तिवारी

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12 टिप्पणियाँ

  1. सही कार्टून है. स्कूल और अस्पताल में कभी मंदी नहीं आएगी.

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  2. सहित्य शिल्पी को पढ़ता रहता हू, बहुत ही अच्छे और सच्चे मन से साहित्य की सेवा कर रहा है। मेरी ओर से साहित्य शिल्पी के सभी सदस्यों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  3. वाह.. !!
    अभिषेक जी

    इसे कहते हैं गरम लोहे पर हथौडे की सही चोट ... परन्तु मित्रवर यहाँ तो फ़िर भी कुछ नहीं होने वाला .... शुभकामना, बढ़िया कार्टून के लिए

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  4. अंधागिरी तो हर जगह

    दौड़ती है हर पल

    पल पल हर पल।

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  5. स्कूल अब व्यापारिक संस्थान हो गये हैं यह सत्य है। और इनका धंधा मंदा हो ही नहीं सकता।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

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  6. सही कहा आपने। अच्छा कार्टून है।

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  7. स्कूलों के व्यापार पर आपका व्यंग्य तगडा है।

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  8. भईये सब मार गरीबों ही पर पडती है... छटनी हो, मंदी हो या कुछ और हो..

    वैसे स्कूल अब स्कूल/कालेज/अस्पताल रह कहां गये हैं.. यह तो सब कमर्शिलय दुकाने हैं..

    बहुत उपयुक्त कार्टून.. आभार

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  9. एक व्यंग्य -वाक्य मे सम्पूर्ण कथानक प्रस्तुत करना कोई अभिषेक तिवारी से सीखे।
    प्रवीण पंडित

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  10. abhishek ji ,

    is behatren cartoon ke liye aapko bahut bahut badhai ..

    desh mein ab yahi to chal raha hai .

    aapka
    vijay
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

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