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राग-संवेदन [काव्य पाठ] - महेन्द्र भटनागर

प्रत्येक गुरुवार को प्रस्तुत की जाने वाली स्वर-प्रस्तुतियों की श्रंखला में आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय महेन्द्र भटनागर जी का काव्य पाठ। श्रोताओं/पाठकों की सुविधा के लिये कविता प्रस्तुत है:-

तुम
बजाओ साज़
दिल का,
ज़िन्दगी का गीत
मैं
गाऊँ!

रचनाकार परिचय:-


स्वर्गीय महेन्द्र भटनागर जी वरिष्ठ रचनाकार है जिनका हिन्दी व अंग्रेजी साहित्य पर समान दखल है। 

सन् 1941 से आरंभ आपकी रचनाशीलता आज भी अनवरत जारी है। आपकी प्रथम प्रकाशित कविता 'हुंकार' है; जो 'विशाल भारत' (कलकत्ता) के मार्च 1944 के अंक में प्रकाशित हुई। आप सन् 1946 से प्रगतिवादी काव्यान्दोलन से सक्रिय रूप से सम्बद्ध रहे हैं तथा प्रगतिशील हिन्दी कविता के द्वितीय उत्थान के चर्चित हस्ताक्षर माने जाते हैं। समाजार्थिक यथार्थ के अतिरिक्त आपके अन्य प्रमुख काव्य-विषय प्रेम, प्रकृति, व जीवन-दर्शन रहे हैं। आपने छंदबद्ध और मुक्त-छंद दोनों में काव्य-सॄष्टि की है। 

आपका अधिकांश साहित्य 'महेंद्र भटनागर-समग्र' के छह-खंडों में एवं काव्य-सृष्टि 'महेंद्रभटनागर की कविता-गंगा' के तीन खंडों में प्रकाशित है। अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।



उम्र यों
ढलती रहे,
उर में
धड़कती साँस यह
चलती रहे!
दोनों हृदय में
स्नेह की बाती लहर
बलती रहे!
जीवन्त प्राणों में
परस्पर
भावना - संवेदना
पलती रहे!
तुम
सुनाओ
इक कहानी प्यार की
मोहक,
सुन जिसे
मैं
चैन से
कुछ क्षण
कि सो जाऊँ!
दर्द सारा भूल कर
मधु-स्वप्न में
बेफ़िक्र खो जाऊँ!

तुम
बहाओ प्यार-जल की
छलछलाती धार,
चरणों पर तुम्हारे
स्वर्ग - वैभव
मैं
झुका लाऊँ!



काव्य-पाठ सुनने के लिये प्लेयर पर चटखा लगायें:-






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13 टिप्पणियां

  1. अच्छी प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  2. महेन्द्र जी की रचनाओं में कविता के उस युग की झलक मिलती है जब कविता वास्तव में कविता होती थी। आपकी रचना धर्मिता को प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत अच्छा लगा महेन्द्र जी की आवाज में इस कविता को सुनना।

    जवाब देंहटाएं
  4. उम्र के इस पडाव पर भी आपकी एनर्जी का जवाब नहीं। आपकी आवाज में भी वह बुलंदी है।

    जवाब देंहटाएं
  5. आपको पढना और सुनना दोनों का आनंद है।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत अच्छा लगा आपकी आवाज़ में आपकी कविता सुनना। आभार।

    जवाब देंहटाएं
  7. तुम
    सुनाओ
    इक कहानी प्यार की
    मोहक,
    सुन जिसे
    मैं
    चैन से
    कुछ क्षण
    कि सो जाऊँ!
    दर्द सारा भूल कर
    मधु-स्वप्न में
    बेफ़िक्र खो जाऊँ!


    आपकी कविता और आवाज
    दोनों ......बहुत सुंदर....


    आभार }

    जवाब देंहटाएं
  8. आपकी इस सुंदर रचना के साथ आपकी आवाज़ सुन कर सुखद अनुभाव हुआ।
    सुंदर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  9. mahendra ji ,

    pranaam
    aapki kavita padhi aur suni ..
    bahut aanand aaya.. kam shbdo men aapne kitna acchi baat kahi hai..

    aapko dil se badhai

    जवाब देंहटाएं

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