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अब मुझे तू प्यार कर [कविता] - अमन दलाल

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साहित्य शिल्पीरचनाकार परिचय:-


मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जन्मे अमन दलाल एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा में बी.टेक. के विद्यार्थी हैं।

लेखन में बहुत अर्से से रूचि है। विद्यालयीन स्तर पर लेखन, वाद-विवाद आदि के लिये कई बार पुरुस्कृत भी हुये हैं। अंतरजाल पर भी सक्रिय हैं।

जज्बात पे मेरे रहम की नज़र कर,
इनायत हो, पाकीजा मेरे शामो-सहर कर,
मेरी दुआएं भी अब मुकम्मल हों!
मेरे दिल की जमीं पर ऐसी, नमाज़-ऐ-अज़र कर
फरियाद है, अब मुझे तू प्यार कर...

मेरे खवाबों को भी, रहमतें नवाज़ कर,
जेहन में मेरे भी, छोटा एक घर कर,
उस खुदा का रुतबा, और बढ़ा ज़रा
आकर आवाज़ मेरी, नई ग़ज़ल कर
फरियाद है, अब मुझे तू प्यार कर...

हो, न यकीं गर मुकद्दर पर,
भावो से मेरे अजान, वो गीता-उवाच कर,
मिसालों में कहीं रख छोड़ मुझे,
थाम ले दामन, दिल पर नज़रे-करम कर,
फरियाद है, अब मुझे तू प्यार कर...
अब मुझे तू प्यार कर...

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6 टिप्पणियां

  1. जेहन में मेरे भी, छोटा एक घर कर,
    bahut khoob

    जवाब देंहटाएं
  2. मेरे दिल की जमीं पर ऐसी, नमाज़-ऐ-अज़र कर
    फरियाद है, अब मुझे तू प्यार कर...
    kya baat kahi hai apne

    जवाब देंहटाएं
  3. सुधार की बहुत गुंज़ाइश है अभी!

    जवाब देंहटाएं
  4. मेरे दिल की जमीं पर ऐसी,
    नमाज़-ऐ-अज़र कर फरियाद है,
    अब मुझे तू प्यार कर...

    sundar likha hai .....

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत अच्छे अमन भाई... भाव उमड़ कर आ रहे हैं .. शब्दों से अधिक शिल्प को महत्व दें तो और सुन्दर परिणाम पाएंगे | :-)

    जवाब देंहटाएं

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