रचनाकार परिचय:-


10 जनवरी 1960 को चैनपुर (जिला सहरसा, बिहार) में जन्मे श्यामल सुमन में लिखने की ललक छात्र जीवन से ही रही है।

स्थानीय समाचार पत्रों सहित देश की कई पत्रिकाओं में इनकी अनेक रचनायें प्रकाशित हुई हैं। स्थानीय टी.वी. चैनल एवं रेडियो स्टेशन में भी इनके गीत, ग़ज़ल का प्रसारण हुआ है।
अंतरजाल पत्रिका साहित्य कुंज, अनुभूति, हिन्दी नेस्ट, कृत्या आदि में भी इनकी अनेक रचनाएँ प्रकाशित हैं।

इनका एक गीत ग़ज़ल संकलन शीघ्र प्रकाश्य है।

बाहर बारिश अन्दर आग
अभी शेष भीतर अनुराग

परदेशी बालम आयेंगे
कुछ बोला है छत पर काग

सब रिश्तों के मोल अलग हैं
नारी माँगे अमर सुहाग

भाव इतर और शब्द इतर हैं
रंग मिलेगा गाकर राग

खोने का संकेत है सोना
छोड़ नींद को उठकर जाग

उदर भरण ही लक्ष्य जहाँ हो
मची वहाँ पर भागमभाग

इक दूजे का हक जो छीना
लेना अपना लड़कर भाग

घाव भले तन पर लग जाये
कभी न रखना मन पर दाग

देखो नजर बदल के दुनिया
लगता कितना सुन्दर बाग

सुमन खिले हैं सबकी खातिर
लूट रहा क्यों भ्रमर पराग

9 comments:

  1. अहा ! क्या मीठी ग़ज़ल बनी है |

    अवनीश तिवारी

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  2. घाव भले तन पर लग जाये
    कभी न रखना मन पर दा
    बहुत सुन्दर गज़ल है श्यामल जी को बधाई

    जवाब देंहटाएं
  3. सुन्दर.............. मन को लुभावने वाली............ सीधे शब्दों में कही ग़ज़ल........

    जवाब देंहटाएं
  4. bahut sunder hindi gazal,,aapne to sahsa ""dushyant"" ki yaad dila di ,,har shabd sampoorn ,prtipoorn......meri badhai sweekar karen syamal ji

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  5. एक छोटी बहर की बेहद सुंदर गज़ल!

    जवाब देंहटाएं
  6. सरस रचना.

    रचना को सुन्दर-असुंदर, खूबसूरत-बदसूरत, सुरूपा-कुरूपा में वर्गीकृत किया जाना उचित है या सरस-नीरस, मधुर-शुष्क, प्रभावी-प्रभावहीन, सामयिक-असामयिक, मर्मस्पर्शी अथवा रस के आधार पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए?

    जवाब देंहटाएं
  7. waah bahut sunder gazal

    kabhi na rakhna man par daag khoob

    जवाब देंहटाएं

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