HeaderLarge

नवीनतम रचनाएं

6/recent/ticker-posts

यूँ न पढाई- पढाई करें [बाल साहित्य] - रचना सागर

छोटा सा बचपन है
प्यारा सा उपवन है
यूँ न पढाई- पढाई करें।
रचनाकार परिचय:-
रचना सागर का जन्म 25 दिसम्बर 1982 को बिहार के छ्परा नामक छोटे से कस्बे के एक छोटे से व्यवसायिक परिवार मे हुआ। इनकी शिक्षा-दीक्षा भी वहीं हुई। आरंभ से ही इन्हे साहित्य मे रूचि थी। आप अंतर्जाल पर विशेष रूप से बाल साहित्य सृजन में सक्रिय हैं।

मम्मी के आंचल में
रहने दो हमें पल दो पल
पापा की गोद में अनमोल
खेलने के पल
ये ही तो अभी जीवन है
छोटा सा बचपन है
प्यारा सा उपवन है
यूँ न पढाई- पढाई करें।

कल को हम जान सकेंगे
पहचान से संभाल सकेंगे
जीवन भी संवरेगा
हर उम्मीद पर होंगे हम खरे
लेकिन अभी हैं नन्हे हाँथ
चाँद कहाँ पायेंगे
अभी तो, छोटा सा बचपन है
प्यारा सा उपवन है
यूँ न पढाई-पढाई करें।

टिप्पणी पोस्ट करें

8 टिप्पणियां

  1. लेकिन अभी हैं नन्हे हाँथ
    चाँद कहाँ पायेंगे
    अभी तो, छोटा सा बचपन है
    प्यारा सा उपवन है
    यूँ न पढाई-पढाई करें।

    अच्छा संदेश और बच्चों की स्वाभाविक पीडा की अभिव्यक्ति है।

    जवाब देंहटाएं
  2. बच्चों पर बढाई का अधिक बोझ डाल कर उनका बचपन छीनना ठीक नहीं है।

    जवाब देंहटाएं
  3. बेशक बड़ी सामयिक और आवश्यक रचना है ... सभी अभिभावकों को पढ़नी चाहिये . यहाँ महानगर में छोटे छोटे बच्चों को बातें करते देखता सुनता हूँ तो लगता ही नहीं कि ये २-४ साल पहले ही पैदा हुए हैं .. :-)

    जवाब देंहटाएं

आपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.

आइये कारवां बनायें...

~~~ साहित्य शिल्पी का पुस्तकालय निरंतर समृद्ध हो रहा है। इन्हें आप हमारी साईट से सीधे डाउनलोड कर के पढ सकते हैं ~~~~~~~

डाउनलोड करने के लिए चित्र पर क्लिक करें...