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" हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति


साहित्य शिल्पी नें वर्ष -2008 को आज "हिन्दी दिवस" के दिन ही अपनी आमद की घोषणा की थी। अपने एक वर्ष पूर्ण करने के अवसर पर हमें जो उत्साहवर्धक संदेश, टिप्पणियाँ व मार्गदर्शन प्राप्त हुए हैं वे प्रस्तुत हैं:

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मुझे "साहित्य शिल्पी" के एक वर्ष पूरे करने पर बहुत प्रसन्नता हुई है. किसी भी ब्लॉग के लिए उसका पहला साल बहुत कठिन होता है क्यूँ की इस अवधि में उसे अपनी पहचान बनानी होती है और नए नए पाठकों तक पहुंचना होता है. "साहित्य शिल्पी" ने इस अवधि के दौरान न केवन अपनी साख बढ़ाई बल्कि ढेरों सुधि पाठकों को अपने साथ जोड़ने का करिश्मा भी कर दिखाया. आज इस ब्लॉग की पहचान आभासी जगत में एक श्रेष्ट स्तरीय हिंदी पत्रिका के रूप में बन चुकी है. ये काम कितना मुश्किल है वो ही जान सकते हैं जो ब्लॉग जगत से जुड़े हुए हैं. "साहित्य शिल्पी" को इस जगह पहुँचाने का श्रेय आपकी पूरी टीम को जाता है जिनके सम्मिलित प्रयासों ने इसे अल्प अवधि में ही वांछित सफलता दिलाई है. आप और आपके सभी सहयोगियों को मेरी और से ढेरों बधाईयाँ. मैं कामना करता हूँ की आने वाले समय में "साहित्य शिल्पी" सफलता की उन ऊंचाईयों को छुए जिन तक पहुँचने के लोग आजतक सिर्फ सपने ही देखते आये हैं.

नीरज गोस्वामी

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बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि एक साल पहले हिंदी का जो सितारा वेब पर उदित हुआ था वह आज एक साल पूरा कर रहा है। केवल साल ही पूरा नहीं कर रहा, बल्कि लोकप्रियता और सार्थकता की अनेक ऊँचे लक्ष्य भी स्थापित कर रहा है। साहित्य शिल्पी की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर टीम अभिव्यक्ति की और से हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें। आप हिंदी के विकास और लोकप्रियता को बढ़ाने का साधन बनें और इसी तरह हमेशा जगमगाते रहें यही मंगलकामना है।
पूर्णिमा वर्मन
(टीम अभिव्यक्ति-अनुभूति)
www.abhivyakti-hindi.org
www.anubhuti-hindi.org

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साहित्य शिल्पी के एक साल अंतरजाल पर हिंदी की मजबूती के भी साल हैं. आपलोग सच में बहुत महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं. मेरी बधाई और शुभकामनाएं स्वीकारें.



सादर आपका
आलोक पुतुल
सम्पादक – रविवार डॉट कॉम

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पिछले वर्ष यानी, 2008 का सितम्बर महीना। अविनाश वाचस्पति जी ने सूचना दी कि हाल में ही ‘साहित्यशिल्पी’ नाम से हिन्दी की एक स्तरीय वेब-पत्रिका निकलनी आरंभ हुई है जो आपके रुचि और मानदंड के अनुकूल हो सकता है। आप यहाँ लिख-पढ़ सकते हैं। सहर्ष मैंने ‘साहित्य-शिल्पी’ का अवलोकन किया और पत्रिका जँच गयी। तब मैंने पहली अप्रकाशित ताज़ा कविता ’ कोसी- शोक में डूबी एक नदी का नाम है।’ कविता दी। फिर क्या था... साहित्यशिल्पी पर लिखने-पढ़ने और आने-जाने का सिलसिला शुरु हो गया ! अब तो एक बरस पूर गये हैं और पत्रिका ने अंतर्जाल पर अपनी खासा पहचान भी बना ली है। सामग्री भी यहाँ एक से बढ़कर एक, और पठनीय रहती है। मैं शिल्पी के संचालक-संपादक श्री राजीव रंजन प्रसाद समेत उन तमाम मित्रों का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिन्होंने अपनी लगन और निष्ठा से अपने बहुमूल्य समय का अवदानकर ‘साहित्यशिल्पी’ को एक प्रतिष्ठित वेब-पत्रिका का मुक़ाम दिलाया है और मेरी हार्दिक शुभकामना है कि आने वाले दिनों में यह साहित्य का गौरव बन पायेगी।–

***सुशीलकुमार-
http://smritideergha.blogspot.com/
http://words.sushilkumar.net/
http://www.sushilkumar.net/
http://diary.sushilkumar.net/

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साहित्य शिल्पी के प्रथम वार्षिकोत्सव का निमंत्रण पत्र पढ़ कर अति हर्षित हूँ. कब नन्हा सा पौधा वृक्ष बन गया, पता ही नहीं चला. हालाँकि आप की टीम को मैंने इसे नित्य सींचते देखा है. अंतर्जाल पर साहित्य शिल्पी का एक वर्ष अपने आप में उपलब्धि है. जहाँ दिन में दो बार रचनाएँ पोस्ट की जाती हैं. आपकी टीम के उत्साह और ऊर्जा को मेरा सलाम. साहित्य शिल्पी तीव्र गति से सफलता की बुलंदियों को छूते हुए एक घना वृक्ष बन कर युवा रचनाकारों की सृजनस्थली और साहित्य की खोज स्थली बने. ऐसी मेरी कामना है. इस शुभ अवसर पर बहुत -बहुत बधाई.

मंगल कामनाओं के साथ..

सुधा ओम ढींगरा
http://www.vibhom.com/blogs/
http://www.vibhom.com

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साहित्य शिल्पी के प्रथम वार्षिकोत्सव पर साहित्य शिल्पी परिवार को अनेकानेक बधाईयाँ व शुभकामनाएँ. एक वर्ष के इस अत्यल्प समय में इंटरनेट पर हिन्दी साहित्य को स्थापित तथा प्रसारित प्रचारित करने में साहित्य शिल्पी का अहम योगदान रहा है. साहित्य शिल्पी ने इस दौरान बहुत से नए व नायाब विचार गढ़े. इंटरनेट पर हिन्दी साहित्य की सामग्री प्रस्तुत करने के नए अंदाज पेश किए. स्तरीयता बनाए रखते हुए, रचनाओं को प्रस्तुत करने के लिए टेलिविजन शैली में विषय, रचनाकार और समय की घोषणा स्क्रॉल पट्टी में चलाने का तरीका अपनाया जो वाकई बेजोड़ रहा है. पाठकों को साहित्य शिल्पी में प्रकाशित रचनाओं का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है. विषयों के चयन, प्रस्तुतियाँ तथा जालस्थल का रूप संयोजन भी कमाल के हैं.साहित्य शिल्पी दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति पथ पर अग्रसर रहे. इन्हीं कामनाओं के साथ..

रवि रतलामी
http://raviratlami.blogspot.com/
http://rachanakar.blogspot.com/

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साहित्य शिल्पी को पहले जन्मदिन पर हार्दिक बधाई। सच तो यह है कि मेरा साहित्य शिल्पी के साथ भावनात्मक रिश्ता है। जिस तरह आपकी युवा ब्रिगेड ने लगभग बारह घंटे तक अपना स्नेह दिया, मैं उसकी गुनगुनी यादों से आज भी ओतप्रोत महसूस करता हूं। यहां लंदन में भी साहित्य-शिल्पी देखे बिना कुछ अधूरा अधूरा सा महसूस करता हूं।

कथा यू.के. के साथ मिल कर जिस तरह से आपने हमारे सम्मानित कथाकारों का पूरा उत्सव मना डाला, अपने आप में क़ाबिले-तारीफ़ बात है। आपकी सृजनात्मकता एवं क्रियाशीलता अपने आप में सलाम की हक़दार है।

आपके १२ सितम्बर के कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता है डा. प्रेम जनमेजय का मुख्य अतिथि के रूप में चुनाव। अब समय आ गया है कि हम चुके हुए दिग्गजों से मुक्ति पाते हुए ऐसे साहित्यकारों को मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष बनाएं जिनके दिल अभी युवा हैं और जो युवा पीढ़ी की पीठ थपथपाने में शर्मिन्दा न महसूस करें।

कथा यू.के. के सभी पदाधिकारी यही कामना करते हैं कि साहित्य-शिल्पी ऐसे ही तरक्की करता रहे। साहित्य-शिल्पी केवल एक ब्लॉग नहीं है, यह एक संपूर्ण ई-पत्रिका है।

तेजेन्द्र शर्मा

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बधाइयाँ मात्र एक साल पूरा करने या वर्षगाँठ के लिए नहीं अपितु इस एक वर्ष मैं हिंदी साहित्य के प्रति अपने समर्पण के लिए, साहित्य को ब्लॉग्गिंग की नयी विधा से जोड़ने के निरंतर प्रयास के लिए. कई वरिष्ठ साहित्यकारों को ब्लॉग के मंच पर लाने के लिए, कई नए साहित्यकारों को मौका देने के लिए.

आज अंतरजाल पर हिंदी का तेजी से प्रचार प्रसार हो रहा है किन्तु विशुद्ध साहित्य एवं स्तरीय सामग्री का आभाव अक्सर देखने मैं आता है. यह कमी साहित्य शिल्पी जैसे प्रयोग पूरी कर रहे हैं. अपने शुरूआती वर्ष मैं स्तरीय, रोचक और विविधतापूर्ण सामग्री प्रस्तुत करने वाले साहित्याशिल्पी से अब और भी उत्कृष्ट प्रदर्शन की अपेक्षा स्वाभाविक है. साहित्याशिल्पी अपने पाठकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरें तथा तकनीक और साहित्य की यह बेहतरीन जुगलबंदी हिंदी, हिंदी साहित्य और हिंदी ब्लॉग्गिंग की दुनिया को और सम्रद्ध करे. यही शुभकामनाएं.

कीर्तिश भट्ट

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इंटरनेट के क्षेत्र में लंबे समय तक सीमाओं में कैद रही हिदी की नई उड़ान को अभिव्यक्त करता है साहित्य शिल्पी और उससे जुड़े ऊर्जावान साथियों का समूह। आपने नए जमाने के इस नए माध्यम का सचमुच बहुत ही रचनात्मक और सार्थक प्रयोग किया है। यह ऐसा माध्यम है जिसकी कोई सीमा नहीं है और साहित्य शिल्पी को देखकर लगता है कि आप सबकी रचनात्मकता तथा उत्साह की भी कोई सीमा नहीं है। हिंदी को अगर नए युग के साथ तालमेल बनाकर चलना है तो उसे इस तरह की पहलों की जरूरत है। उसे तकनीक के साथ ताल मिलाकर चलने की जरूरत है। उसे इंटरनेट के अश्व पर सवार होकर निकल जाना है उस अश्वमेध के लिए जो उसे विश्व मानचित्र पर यथोचित सम्मान दिलाएगा।

अधिकांश लोग इंटरनेट का प्रयोग सिर्फ अपने उद्देश्य की सामग्री लेने के लिए करते हैं। साहित्य शिल्पी जैसे बहुत कम लोग हैं जो इंटरनेट को कुछ देना भी चाहते हैं और दे रहे हैं। वे वैश्विक सूचना संसार को और समृद्ध बना रहे हैं। उसमें भारतीयता और हिंदी के नए पहलू जोड़ रहे हैं। साहित्य के गंभीर मुद्दों पर विमर्श, उनके दस्तावेजीकरण और सृजनात्मकता के मंच के रूप में इंटरनेट का यह अद्भुत प्रयोग हम सबके लिए एक प्रेरणा है। आपकी यात्रा का यह सार्थक प्रथम वर्ष साहित्य शिल्पी के बुलंद हौंसलों का परिचायक है और आने वाले वर्षों में आप हिंदी तथा इंटरनेट दोनों को अहम योगदान देने जा रहे हैं, इसे लेकर मैं आश्वस्त हूं। मैं साहित्य शिल्पी को इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक well deserving बधाई देने के साथ-साथ उसके उत्तरोत्तर समृद्ध एवं सफल होने की कामना करता हूं।

बालेन्दु शर्मा दाधीच

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"और देखते हीं देखते साहित्य-शिल्पी ने एक वर्ष पूरा कर लिया। पिछले एक वर्ष में साहित्य-शिल्पी ने उस मुकाम को हासिल किया है, जिसे कई सारे मंच और कई सारी पत्रिकाएँ कई सालों में भी हासिल नहीं कर पाई है। हर दिन दो नई रचनाओं के साथ हाज़िर होना- कोई आसान काम नहीं । इसी बहाने हमे उन प्रतिभाओं को भी जानने का अवसर मिला, जो किसी न किसी कारण से अंतर्जाल से सकुचाए होते हैं तो कभी ऐसा भी हुआ कि ऐसे साहित्यकार या रंगकर्मी या स्वर-शिल्पी हमसे मुखातिब हुए जिनके बारे में आज तक हम बस सुनते हीं आए हैं। अगर मुझसे मेरी व्यक्तिगत पसंद की बात पूछी जाए तो साहित्य-शिल्पी पर आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" जी की "काव्य का रचना-शास्त्र" नाम से चलाई जा रही श्रृंखला का मैं नियमित पाठक रहा हूँ। मेरे हिसाब से "हिन्दी-साहित्य" पर इतनी व्यापक जानकारी अंतर्जाल पर और कहीं उपलब्ध नहीं है। इतना हीं नहीं, प्राण शर्मा जी और सत्पाल ख्याल जी से गज़लों के बारे में मुझे बहुत कुछ जानने को मिला है। इसके अलावा नित्य-प्रति प्रस्तुत होने वाले आलेखों से भी बहुत कुछ सीखा है मैने और मुझे पूरा विश्वास है कि साहित्य-शिल्पी के दूसरे पाठकों की भी राय होगी। राजीव जी की कर्मठता का मैं सालों से प्रशंसक रहा हूँ और इस कारण मेरी दुआ है कि साहित्य-शिल्पी इसी तरह दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की करता रहे। “

विश्व दीपक "तनहा"
http://www.google.com/profiles/vdbhai.kgp

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आयोजन के लिए हार्दिक शुभकमनाएं और एक बरस पूरा करने पर हार्दिक बधाई। हम अपनी शुभकामनाओं के जरिये पूरे आयोजन में मौजूद होंगे। प्रेम जनमेजय तक हमारी बधाई पहुंचायें


सूरजप्रकाश

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"हिन्दी चेतना"

साहित्य शिल्पी ने अंतर्जाल पर एक वर्ष पूर्ण कर लिया. हिन्दी जगत के लिए बड़े गौरव कि बात है. १२ सितम्बर को आप इस सन्दर्भ में अपना प्रथम वार्षिकोत्सव मना रहे हैं, जानकर अति प्रसन्नता हुई. जिस निष्ठा, विश्वास, आस्था और निस्वार्थ प्रेम भाव से आप की टीम हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पित है, उसी के परिणाम स्वरूप एक वर्ष के भीतर आप ने अंतर्राष्ट्रीय पाठकों और रचनाकारों के हृदय में स्थान बना लिया है. उत्तरी अमेरिका की त्रैमासिक पत्रिका ''हिन्दी चेतना'' आप के इस हवन में आप के साथ है और शुभकामनाओं की आहुति अर्पित करती है.

''हिन्दी चेतना'' की ओर से बहुत -बहुत बधाई.

मुख्य संपादक- श्याम त्रिपाठी
सह संपादक- सुधा ओम ढींगरा

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साहित्य शिल्पी बहुआयामी कार्य से हिन्दी ब्लॉग जगत का संवर्धन करने में सफलता से १ वर्ष पूर्ण कर रहा है, ये अपार हर्ष तथा भविष्य की संभावना के लिए, नवीन आशा का संचार करनेवाला समाचार है . मेरी हार्दिक बधाई ..आपकी समस्त टीम को तथा सुरुचि संपन्न कार्य के लिए , शुभकामनाएं ...........

सादर, स - स्नेह,
- लावण्या के वंदन

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साहित्य शिल्पी के प्रथम वार्षिकोत्सव पर मेरी शुभकामनाएं!

देवमणि पाण्डेय
मुम्बई


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शुभकामनाएं..

ज़ाकिर अली “रजनीश”

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साहित्य-शिल्पी के प्रथम वर्षगाँठ पर हार्दिक शुभकामनाओं के साथ बधाई स्वीकार करें! परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि हमारा साहित्य-शिल्पी दीर्घायु और यशस्वी हो! साहित्य की जिस प्रतिमा को आपने एक शिल्पकार की तरह बड़ी सूक्ष्मता से तराशा है, वह निःसंदेह सराहनीय है. साहित्य-शिल्पी का अन्तर्जाल के माध्यम से हिंदी – साहित्य के विकास और विस्तार में गौरवपूर्ण योगदान रहा है. हिंदी - भाषा में सृजन और वहन का जो भार हमारे साहित्य - शिल्पी ने उठाया है वह अत्यंत सराहनीय है. साहित्य - शिल्पी ने हमारा परिचय हिंदी के अनेक ज्ञानी लेखकों, कवियों, कहानीकारों, शास्त्र - ज्ञाताओं और चित्रकारों से कराया है. यही नहीं इसने नए रचनाकारों को अभिव्यक्ति का धरातल प्रदान कर के उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन भी प्रदान किया है.विषय की आकर्षक प्रस्तुति शिल्पकार की सृजनात्मकता का द्योतक है.यह मेरा सौभाग्य है कि मैं साहित्य - शिल्पी परिवार की सदस्या हूँ. मुझे पूर्ण विश्वास है कि साहित्य – शिल्पी सदा निर्वाध गति से प्रगति - पथ पर अग्रसर रहेगा.

किरण सिन्धु

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साहित्‍यशिल्‍पी का एक वर्ष पूरा हो गया और पता भी नहीं चला। पिछले एक वर्ष में जिस तेजी से ब्‍लागर की दुनियां में अपने पैर जमाये हैं, क़ाबिलेतारीफ़ है। साहित्‍यशिल्‍पी की इस सफलता का मूल मंत्र है इसकी टीम की विनम्रता। पाठकों, लेखकों के सुझाव मानना और उनको अमल में लाने का भरसक प्रयत्‍न करना। मेरे व्‍दारा लिये गये साक्षात्‍कार बड़े प्‍यार से प्रकाशित करते हैं। इनका विनम्र व्‍यवहार ना करने की हिमाकत करने ही नहीं देता। बात करने में अनौपचारिक पर काम में बिल्‍कुल प्रोफेशनल। साहित्‍यशिल्‍पी पत्रिका और इसकी टीम इसी तरह आगे बढ़ती रहे। मेरी शुभ कामनाएं स्‍वीकारिये।

जब जन्‍मी साहित्‍यशिल्‍पी
तब अबोल थी, नादान थी।
दिन ब दिन बढ़ती गई
घुटनों के बल चलना सीखा ।
शब्‍दों को जोड़ना, बोलना सीखा
सुन्‍दर से सुन्‍दरतर हो गई।
सीढ़ी सीढ़ी चढ़ी दिन प्रतिदिन
आज हो गई एक साल की।
साहित्‍यशिल्‍पी के पितास्‍वरूप
राजीव रंजन व पूरी टीम को ,
साहित्‍यशिल्‍पी रूपी बेटी के
जन्‍मदिन की ढेरों बधाई।

मधु अरोरा

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साहित्य शिल्पी ने साहित्य की सेवा का अपना पहला मील का स्वर्ण मंडित पत्थर ब्लागजगत में स्थापित कर दिया है -यह ऐसे ही अनेक प्रतिमान स्थापित करे यही मंगल कामना है !

अरविन्द कुमार मिश्रा

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साहित्य-शिल्पी के अन्तर्जाल पर एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में हार्दिक बधाई। निसंदेह यह एक स्वर्णिम अवसर है क्योंकि जिन आयामों को लेकर साहित्य-शिल्पी का सृजन व गठन हुआ उसमें वो शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त करके नये आयाम की और अग्रसर है। नये रचनाकारों को यथोचित रुप से एक मंच देकर उनकी प्रतिभा और लेखन शक्ति को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान है। साहित्य की कई विधाऒं की प्रस्तुती उन विधाऒं के समुन्नयन व विकास में महत्ती भूमिका निभायेगी । यह प्रयास सराहनीय है। अल्प समय में साहित्य-शिल्पी ने अन्तर्जाल पर जो विशिष्ट स्थान बनाया है वो उल्लेखनीय है। एक बार फिर से साहित्य-शिल्पी परिवार को हार्दिक बधाई।

-- अनुराधा श्रीवास्तव
http://anuradhasrivastav.blogspot.com/

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साहित्य - शिल्पी को एक वर्ष की आयु पर अनेक अनेक बधाईयाँ और शुभकामनाएं |

साहित्य - शिल्पी के सक्रीय सम्पादन और प्रस्तुति से अच्छे साहित्यकारों को अंतर्जाल पर एक मंच मिला है और पाठकों को सामग्री | इससे साहित्यिक विकास में तेजी आयेगी |

साहित्य - शिल्पी बीते साहित्य और साहित्यकारों को आधार बनाते हुए हिन्दी साहित्य में नवीनता लाने में अपना योगदान देगा , ऐसी मंगल कामना है |

अवनीश तिवारी

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अविनाश जी, बहुत बधाई ! इस बेहद अच्छे कार्य के लिए. परन्तु मै तो आपसे नाराज़ हूँ. अब सन्देश दिया, इतना देरी से. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम को अब किसी भी सूरत में बदलना असंभव हो गया है. बहुत मन कर रहा है आने को. पर क्या करूँ, कैसे आऊँ. हाँ एक काम करता हूँ, अपनी मन रूपी कलि को इस बगीची में भेज देता हूँ. बस आप ढूंढ़ लेना बड़े-बड़े पेड़ों के बीच कहीं गुम ना हो जाए. तो आपकी इस महफिल में मेरी ओर से शामिल हो रहे है, मेरा मन, मेरा दिल और मेरी रूह !

एक बार फिर तमामतर नेक ख्वाहिशात के साथ,

अकबर खान.
http://www.thenetpress.com/

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बधाई हो, साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव एवं नुक्कड़ ब्लॉगर्स स्नेह महासम्मेलन के आयोजन के लिए। संयोग की प्रतीक्षा है, मुलाकात अवश्य होगी। सधन्यवाद।

दिलीप कुमार लाल
नवभारत टाइम्स, दिल्ली

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20 टिप्पणियाँ

  1. आप साहित्‍य शिल्‍पी की प्रथम वर्षगांठ मना रहे हैं, बहुत ही हर्ष का विषय है । आपको, आपकी टीम को और आपके सभी पाठको को अनेकानेक शुभकामनाएं । हिंदी से जुड़ना, जुड़ कर उसमें कार्य करना, कार्य के माध्‍यम से उसका प्रचार-प्रसार करना, वास्‍तव में साहित्‍य शिल्‍पी बहुत बड़ा काम है ।

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  2. प्रथम वर्षगांठ पर बधाई
    आपको, आपकी टीम को

    बी एस पाबला

    जवाब देंहटाएं
  3. राजीव भाई....

    साहित्य शिल्पी की प्रथम वरषगांठ पर हार्दिक बधाई और शुभकामना....अहम बात ये नहीं कि आपने एक साल का सफ़र तय कर लिया....वो तो कभी न कभी करना ही था...मगर महत्वपूर्ण बात ये है कि सिर्फ़ एक वर्ष में ...आपने जो मुकाम हासिल किया....उसे पाने में कईयों को युगों लग जाते हैं....मुझे इस परिवार से जुड कर खुशी होगी...जुड तो खैर मैं गया ही हूं..

    जवाब देंहटाएं
  4. साहित्य शिल्पी की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ
    regards

    जवाब देंहटाएं
  5. साहित्य शिल्पी की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर हार्दिक बधाई !!

    जवाब देंहटाएं
  6. साहित्य शिल्पी का समर्पण भरा काम देखते ही बनता है।
    डॉ. पी. आर शर्मा

    जवाब देंहटाएं
  7. पंकज सक्सेना14 सितंबर 2009 को 12:43 pm

    माईलस्टोन।

    जवाब देंहटाएं
  8. सभी संदेश स्वाभाविक हैं और हृदय से निकले हैं। साहित्य शिल्पी की नीयमित पाठिका होने के कारण मैं यह कह सकती हूँ कि मैंने इतना अधिक सुसज्जित और स्तरीय सामग्री की निरंतरता अन्य जाल स्थलों में नहीं पायी।

    जवाब देंहटाएं
  9. हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी के स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  10. साहित्य शिल्पी के साथ हिन्दी समृद्ध हो रही है, बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  11. राजीव रंजन जी ,
    साहित्य शिल्पी के एक साल पुरे करने के लिए मेरी हार्दिक बधाई ..हिंदी पत्रिका का नेट पर एक साल पूरा करना बहुत बड़ी बार है वो भी तब जब सबका सहयोग मिले , मुझे भी इस पत्रिका से जुड़ने में बहुत अच्छा लगा , मेरे लेख को बहुत अच्छा रेस्पोंस मिला , इस स्नेह के लिया बहुत बहुत धन्यवाद् ..सादर.

    जवाब देंहटाएं
  12. साहित्य शिल्पी के जन्मदिन पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
    मैं इसे एक वर्श पूरा होना नहीं कहूंगा क्योंकि आपने एक वर्ष में हिन्दी के प्रति कम्पयूटर को बलावान कर दिया अन्यथा यह कम्पयूटर सबकुछ अंग्रेजी में कहता था।
    सरकार जो काम ना कर सकी वो आपने कर दिया।
    शब्दों से बधाई देकर कार्य की इति श्री नहीं की जा सकती।
    आप साहित्य शिल्पी के माध्यम से बेरोजगार भाई-बहिनों के लिए भी कुछ करें। यह भी सेवा उतनी ही जरूरी है।
    मुझे ब्लाग पढाना आता है परन्तु ब्लाग वटवृक्ष बनाना नहीं आता। नहीं तो यह काम मैं जरूर करता और बेरोजगार भाई-बहिनों तथा योग्यता की परख करने वालों को संगम साहित्य शिल्पी को जरूर बनाता।
    आप नहीं जानते इसके माध्यम से रिष्ते बन रहे। समाज में प्यार पनप रहा है। कामेंटस से सम्पर्क हो रहा है और आप जानते ही हैं कि संवाद से दुनिया संवर जाती है।
    साहित्य शिल्पी ने समाज की अनेक कुरीतियों को मूल से ही नाश कर दिया है।
    बस ज्यादा नहीं लिख रहा क्योंकि करना ज्यादा अच्छा होता है।
    उपदेश नहीं दे रहा हूँ दिल की बात एक पाठक होने के नाते कहने का दुःसाहस भर कर रहा हूँ।
    अपने लिखे को दुबारा नहीं पढ़ रहा हूँ क्योंकि दुबारा पढ़ने से एक तो मौलिकता खत्म हो जाएगी दूसरा यह पत्र भी झूठा हो जाएगा।
    पुनः हार्दिक बधाई सभी सदस्यों को।
    रमेश सचदेवा ‘आचार्य’
    निदेशक एवं प्रधानाचार्य
    एचपीएस वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय

    जवाब देंहटाएं
  13. sahitya shilpi ki prathma varshganth ke suavsar per, meri aur se bhi sabhi karyekartaon ko hardik badhaie.

    जवाब देंहटाएं
  14. साहित्य शिल्पी के एक वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई.
    निशा

    जवाब देंहटाएं
  15. “Most hackers asks for payment before services that they do not still render at the end but I want to introduce you to a university master’s degree holder of Princeton in Finance as well as computer geek for any sort of hacking, it can be Social Media Accounts, Forex Trading Forecasts, Credit Reports/Credit Score Lifting ,School grade, Email, Credit card , contact him (wizardcyprushacker@gmail.com) Phone hacking, Erasing criminal records, Bitcoin recovering , Instagram Hack , Facebook Hack , Lost funds recovering ,Tender hacker , get Access code of different type of phones etc, you name it. Contact him : wizardcyprushacker@gmail.com , Whatsapps:+1 (424) 209-7204

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