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नव-जीवन का गीत [कविता] - अदिति मजुमदार

सुबह की पहली किरण ने पूछा-
तुम कौन हो?
मैंने कहा, मैं भोर हूँ,
मैं आशा हूँ,
नव जीवन की अभिलाषा हूँ|
poem by Pr. Aditi Majumdaarरचनाकार परिचय:- अदिति मजुमदार का जन्म पश्चिम बंगाल में कोल्कता शहर में हुआ। पिता के तबादले के कारण भारत के विभिन्न शहरों में अपनी पढ़ाई पूरी करती रहीं।
कोल्कता विश्वविद्यालय से एम.ए तथा जाधवपुर विश्वविद्यालय से बी.एड.की डिग्री प्राप्त कर शिक्षण और लेखन में कार्य किया।
२००६ में अमेरिका आने के उपरांत कई विदेशी पत्र- पत्रिकाओं में लेख छपने लगे, जिससे लिखने की और प्रेरणा मिली।

सुबह की पहली किरण ने पूछा-
और क्या हो?
मैंने कहा, मैं कुसुम हूँ,
मैं खुशबू हूँ,
मुरझाए कल की कली हूँ,
जो आज फूल बन कर खिली हूँ|

सुबह की पहली किरण ने पूछा-
और क्या हो?
मैंने कहा, नई नवेली दुल्हन हूँ-
प्रेयसी भी हूँ,
प्रेम के गीत गाती हूँ|

सुबह की पहली किरण ने कुछ ना पूछा-
बस कहा- चल तुम और मैं सखी बन
प्यार की, अनुराग की रौशनी फैलाएँ
और नव-जीवन का गीत गाएँ ......

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6 टिप्पणियां

  1. बडी ही आशा भरी कविता है, बधाई

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  2. सुबह की पहली किरण ने कुछ ना पूछा-
    बस कहा- चल तुम और मैं सखी बन
    प्यार की, अनुराग की रौशनी फैलाएँ
    और नव-जीवन का गीत गाएँ ......

    वाह मधुर भाव

    जवाब देंहटाएं
  3. अदिति, बहुत खूब--
    सुबह की पहली किरण ने कुछ ना पूछा-
    बस कहा- चल तुम और मैं सखी बन
    प्यार की, अनुराग की रौशनी फैलाएँ
    और नव-जीवन का गीत गाएँ ......
    अच्छी रचना पर बधाई ..

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत प्यारी रचना के लिये अदिति जी को बधाई! मकर संक्रांति के पर्व पर साहित्य शिल्पी तथा आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!

    जवाब देंहटाएं

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